ये हैं वो 10 फिल्में, जिनके खिलाफ मचा जमकर हो हल्ला

Manikarnika, ये हैं वो 10 फिल्में, जिनके खिलाफ मचा जमकर हो हल्ला

नयी दिल्ली
दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की फिल्म ‘पद्मावत’ के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली करनी सेना तो आपको याद ही होगी. इस सेना को हल्ला मचाने के लिए अब एक और मौक़ा मिल गया है. इसबारगी यह मौक़ा किसी और ने नहीं बल्कि बॉलीवुड क्वीन कंगना रनौत की फिल्म मणिकर्णिका ने दिया है. जहां एक तरफ कंगना इन्हें आड़े हाथों ले रही हैं वहीं करनी सेना ने भी साफ़ कर दिया है कि वो महाराष्ट्र में इसकी डगर में काटें बिछाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. ‘मणिकर्णिका’ पहली फिल्म नहीं है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हुआ है. इससे पहले भी कई फिल्में आयीं हैं, जिनका समय-समय पर विरोध होता रहा है. आइये एक नज़र ऐसी फिल्मों पर…

  • किस्सा कुर्सी का
    1975 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के दौरान कई हिंदी फिल्मों की रिलीज़ पर रोक लगा दी गई थी. इन फिल्मों में एक फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ भी थी. इस फिल्म को लेकर इतना विवाद हुआ था कि इसके ऑरिजनल प्रिंट तक को जला दिया गया था क्योंकि यह फिल्म इंदिरा गांधी सरकार के ऊपर राजनैतिक व्यंग्य पर आधारित थी.
  • आंधी
    1975 में आई फिल्म ‘आंधी’ को इंदिरा गांधी सरकार द्वारा बैन कर दिया गया था. यह एक राजनैतिक फिल्म थी, जो कि इंदिरा गांधी के जीवन पर आधारित थी. इस फिल्म के साथ ही इमरजेंसी के दौरान कई अन्य फिल्मों को भी बैन किया गया, लेकिन जब बाद में बीजेपी की सरकार सत्ता में आई तो उन्होंने फिल्म ‘आंधी’ से बैन हटा दिया. दूरदर्शन पर भी इस फिल्म को दिखाया गया था.
  • बैंडिट क्वीन
    यह फिल्म फूलन देवी पर आधारित थी. एक ऐसी महिला जो कि नीची जाति से होने के कारण समाज में भेदभाव और यौन शोषण का शिकार होने के बाद डकैत बन जाती है. इस फिल्म में फूलन देवी का किरदार सीमा विश्वास ने निभाया था. न्यूड सीन्स और अभद्र भाषा के कारण इस फिल्म को विवादों ने घेरा लेकिन शेखर कपूर की यह फिल्म लोगों को काफी पसंद आई थी.
  • परज़ानिया
    यह फिल्म दस साल के एक लड़के की जिंदगी से प्रेरित है, जो कि 2002 गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार के दौरान गायब हो जाता है. इस नरसंहार में करीब 69 लोगों की मौत हुई थी. यह उन घटनाओं में से एक है जिनके कारण गुजरात दंगे हुए थे. इस फिल्म को लेकर गुजरात के सिनेमाघर मालिकों का कहना था कि वे फिल्म अपने यहां रिलीज़ नहीं करेंगे.
  • द लेजेंड ऑफ भगत सिंह
    इस फिल्म को लेकर भी 2002 में काफी विवाद खड़ा हुआ था. इसकी रिलीज़ को लेकर सेंसर बोर्ड को आपत्ति थी. अजय देवगन स्टार्र इस फिल्म में सेंसर बोर्ड को कई सारे कट लगाने पड़े, जब जाकर फिल्म को रिलीज़ करने की इजाजत मिली.
  • हैदर
    ‘मकबूल’ और ‘ओमकारा’ जैसी फिल्मों के निर्माण के बाद फिल्म ‘हैदर’ लेकर आए निर्देशक विशाल भारद्वाज को इस फिल्म के लिए कड़ा विरोध झेलना पड़ा था. इस फिल्म को 1990 के कश्मीर की पृष्ठभूमि पर बनाया गया था. इसमें जिस प्रकार से भारतीय सेना को दर्शाया गया, उसका कई लोगों ने विरोध किया.
    इसके अलावा कश्मीरी पंडितों ने भी निर्देशक पर इस फिल्म के जरिए कुछ सीन्स में धार्मिक भावना आहत करने का आरोप लगाते हुए फिल्म को बैन करने की मांग की थी. हालांकि सारे विवादों के बावजूद फिल्म को रिलीज़ किया गया और सभी को फिल्म काफी पसंद आई.
  • बाजीराव मस्तानी
    फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली का विवादों से गहरा नाता रहा है. फिल्म पद्मावत से पहले साल 2015 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ को लेकर भी देश में काफी विवाद हुआ था. मराठी समाज के लोगों का कहना था कि पेशवा बाजीराव के किरदार से फिल्म में छेड़छाड़ की गई है. इतना ही नहीं इसके कुछ डायलॉग्स को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी. इसके अलावा फिल्म के गाने ‘पिंगा’ में बाजीराव की पत्नी काशीबाई और मस्तानी को एक साथ डांस करते हुए दिखाया गया, जिस पर खूब बवाल मचा.
  • पीके
    राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘पीके’ साल 2015 की सबसे विवादित फिल्मों में से एक थी. इस फिल्म पर सभी धर्म के लोगों ने बैन लगाने की मांग की थी. लोगों ने फिल्म निर्माताओं पर इस फिल्म के जरिए उनकी धार्मिक भावना को आहत करने का आरोप लगाया था. देश के कई राज्यों में फिल्म के पोस्टर तक जला दिए गए थे और सिनेमाघरों में भी तोड़फोड़ की गई थी.
  • आरक्षण
    यह फिल्म भारत में जाति के आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण व्यवस्था पर आधारित थी. इसको लेकर काफी विवाद हुआ. निर्देशक प्रकाश झा निर्मित इस फिल्म को लेकर कहा गया था कि यह फिल्म दलित विरोधी और आरक्षण विरोधी है. इस फिल्म को इतना विरोध झेलना पड़ा कि इसे उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पंजाब में बैन कर दिया गया था.
  • पद्मावत
    इस फिल्म को लेकर करणी सेना समेत कई राजपूत संगठनों ने हंगामा किया था. करणी सेना का कहना था कि इसके निर्माता संजय लीला भंसाली ने फिल्म को बनाने के लिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ की है. राजपूत संगठनों के कई नेताओं ने यहां तक घोषणा कर दी थी कि जो कोई भी दीपिका पादुकोण का सिर काटकर लाएगा उसे इनाम दिया जाएगा.

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