अब फिल्‍मों और गानों में महिलाओं पर हिंसा वाले सीन दिखाए तो…

ऐसे सीन जिनमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा को वाजिब ठहराया जाता हो, जल्द ही फिल्मों से गायब हो सकते हैं.
disclaimers on scenes of gender violence in films, अब फिल्‍मों और गानों में महिलाओं पर हिंसा वाले सीन दिखाए तो…

बॉलीवुड ने हमें कई यादगार फिल्में और गाने दिए हैं. इनमें से कुछ गाने हैं ‘चोली के पीछे क्या है’, ‘मुझको राणाजी माफ करना’ और ‘खंबे जैसी खड़ी है’. ये गाने हमने कभी न कभी गुनगुनाये ही हैं. इन गानों ने हमारे देश के एक बहुत बड़े वर्ग की सोच को भी आकार दिया है.

वहीं फिल्मों में एक तरफ तो अभिनेत्रियों के डांस को काफी सराहा जाता है, तो वहीं दूसरी ओर फिल्म्स में कई ऐसे सीन भी होते हैं, जिनमें उनके खिलाफ हिंसा होती है. अब इसके खिलाफ महिलाओं के हक के लिए लड़ने वाली संस्था ने आवाज उठाई है.

90 के दशक में मजबूती से बेबसी तक

वैसे तो अक्सर देखा गया है कि फिल्में ज्यादातर हिरो पर ही क्रेंद्रित होती हैं. अगर 90 के दशक में अगर किसी फिल्म में एक महिला मुख्य भूमिका में होती भी थी तो उस फिल्म में उसके साथ ऐसी कोई घटना होती थी, जिसके खिलाफ वह लड़ती थी.

इसका एक उदहारण है रानी मुख़र्जी की पहली फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’. इस फिल्म में रानी मुखर्जी का किरदार माला नाम की एक टीचर का होता है. 90 के दशक के हिसाब से ये काफी मजबूत किरदार है. इस फिल्म में जब रानी मुखर्जी के साथ दुष्कर्म होता है तो जज जो फैसला सुनाता है वो सुनके आप अपना सिर दीवार में मारना चाहेंगे.

गानों का तो पता नहीं, लेकिन बहुत जल्द फिल्मों में ऐसे सीन्स का दिखाए जाने पर रोक लग सकती है. ऐसे सीन जिनमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा को वाजिब ठहराया जाता हो, जल्द ही फिल्मों से गायब हो सकते हैं.

जी हां, इसी साल सितम्बर के महीने में ब्रेकथ्रू नाम की महिलाओं के हक के लिए लड़ने वाली संस्थान ने सूचना प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड के पास एक याचिका दायर की थी.

इस याचिका में उन्होंने लिखा था कि फिल्मों में महिलाओं के विरुद्ध हिंसक सीन्स की पहचान की जाए और इन सीन्स के नीचे डिस्क्लैमर्स लगाए जाएं.

पेटिशन को मिला पॉजिटिव रिस्पांस

हाल ही में इस संस्थान ने एक ओपन लेटर भी जारी किया है. ब्रेकथ्रू द्वारा चलायी गई इस ऑनलाइन याचिका पर कम से कम 50,000 लोगों ने साइन किये हैं. ये ओपन लेटर और पेटिशन चेंज डॉट ऑर्गेनाइजेशन और आवर डेमोक्रेसी डॉट इन जैसी वेबसाइट्स द्वारा चलाये जा रहे हैं.

ब्रेकथ्रू की सीईओ और अध्यक्ष सोहिनी भट्टाचार्य ने कहा कि वे इस याचिका पर मिले रिस्पांस से काफी खुश हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि फिल्मों और गानों के जरिए एक टिकाऊ बदलाव लाने कि उनकी ये कोशिश और सामाजिक कदम उठाए जाने से महिलाओं के विरुद्ध हो रही हिंसा पर रोक लगाई जा सकती है.

 

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