Kapil Sharma Show : महाभारत के किरदारों की अब तक की अनसुनी कहानियां, सब यहां पढ़ लो

युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान का कहना है कि शकुनि ने जिंदगी में सिर्फ एक काम सही किया है वह है महाभारत की कास्ट का चयन

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 5:36 pm, Mon, 28 September 20
the kapil sharma show
द कपिल शर्मा शो में आए महाभारत के कलाकार

इस बार कपिल शर्मा के कॉमेडी शो में बीआर चोपड़ा (B R Chopra) की ‘महाभारत’ (Mahabharat) के किरदार खास मेहमान बन कर आए . 90 के दशक के सुपरहिट शो ‘महाभारत’ को हमेशा से लोगों ने बहुत प्यार दिया है.

महाभारत के कुछ कलाकार रविवार को कपिल के शो में पधारे थे. गुफी पेंटल उर्फ ‘शकुनी मामा’, पुनीत इस्सर उर्फ ‘दुर्योधन’, नितिश भारद्वाज उर्फ ‘श्री कृष्ण’, ‘अर्जुन’ ने कपिल के शो पर महाभारत के शूट से जुड़ी कई किस्से कहानियां शेयर की.

शकुनि मामा थे कास्टिंग डायरेक्टर

एक्टर गुफी पेंटल ने महाभारत में शकुनि मामा का किरदार निभाया था. आप को बता दें कि उन्होंने न सिर्फ शकुनि का किरदार निभाया बल्कि उन्होंने कास्टिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी भी निभाई थी. लगभग 3500 से भी ज्यादा ऑडिशंस के बाद उन्होंने कृष्णा, युधिष्ठिर, अर्जुन, दुर्योधन जैसे महाभारत में किरदार निभाने वाले एक्टर्स का चयन (selection) किया था. महाभारत के कुछ एपिसोड का निर्देशन भी गुफी पेंटल ने किया था. युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान का कहना है कि शकुनि ने जिंदगी में सिर्फ एक काम सही किया है वह है महाभारत की कास्ट का चयन.

नितीश भारद्वाज कैसे बने कृष्ण

महाभारत के भगवान श्रीकृष्णा (Lord Krishna) का रोल करने वाले नितीश भारद्वाज (Nitish Bhardwaj) को आज भी लोग इसी रूप में देखते हैं. महाभारत, गीतारहस्य, विष्णु पुराण कई सीरियल्स, फिल्मों और नाटकों में नितीश ने कृष्णा की भूमिका निभाई थी . नितीश का मानना है कि बचपन से उन्हें घर में गीता, ज्ञानेश्वरी का पाठ पढ़ाया जाता था इसलिए उनका संस्कृत काफी अच्छा था. कृष्णा के किरदार के लिए युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान भी स्पर्धा में थे. तो नितीश भारद्वाज को कृष्णा के रोल से पहले विदुर के लिए कास्ट किया गया था.

अर्जुन का असल नाम है फिरोज खान

अर्जुन का किरदार निभाने वाले एक्टर का असल नाम फिरोज खान है पर इंडस्ट्री में दो फ़िरोज़ खान होने के वजह से हमेशा गड़बड़ हो जाती थी. बाद में उनके अर्जुन के किरदार को इतना पसंद किया गया कि उन्होंने अपना नाम फिरोज खान से अर्जुन रखा लिया था. आज भी उन्हें अर्जुन के नाम से ही जाना जाता है. वो कहते हैं ‘महाभारत’ के पटकथा और संवाद लेखक डॉ राही मासूम रजा ने उन्हें यह सलाह दी थी. फिरोज खान का कहना है आज भी उनकी माता जी उन्हें अर्जुन नाम से पुकारती हैं.

पुनीत इस्सर भीम बनते बनते बन गए दुर्योधन

‘कुली’फिल्म के बाद पुनीत को हमेशा से निगेटिव किरदार ही मिलते रहे. जब महाभारत के ऑडिशन के लिए वह गए तब उन्हें पहली बार सकारात्मक भूमिका करने का मौका मिल रहा था. दरअसल पुनीत को भीम का किरदार ऑफर हुआ था. तब पुनीत इस्सर क कहना था कि मुझे दुर्योधन बनाना है. बी आर चोपड़ा ने उन्हें कहा कि हम तुम्हें हीरो बनाना चाहते हैं और तुम दुर्योधन क्यों करना चाहते हो? तो पुनीत इस्सर ने कहा कि उन्हें लगता है कि दुर्योधन किरदार महाभारत में महत्वपूर्ण है. मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित प्रसिद्ध खण्डकाव्य जयद्रथ वध पुनीत से सुनने के बाद उनकी हिंदी से प्रभावित होकर उन्हें दुर्योधन के किरदार के लिए चुना गया.

भीम और हनुमान का “पंजाबी” कनेक्शन

रामायण के हनुमान हो या फिर महाभारत के भीम दोनों किरदारों के लिए जिनका चयन हुआ था वह दोनों एक्टर पंजाबी ही थे. कई बार संवाद करते वक़्त ( डायलॉग के वक़्त ) उनके मुंह से पंजाबी अनुवाद निकल जाते थे. पर उनकी दमदार आवाज के चलते यह बात नजरअंदाज की जाती थी. इसलिए मज़ाक में कहा जाता था कि पूरा हिन्दुस्तान ये मान के ही चलता था कि हनुमान और भीम पंजाबी ही थे. भीम का किरदार स्वर्गीय दारा सिंह जी ने किया था तो महाभारत में भीम का किरदार प्रवीण कुमार सोबती ने निभाया था.

कभी नफरत कभी शोहरत

दुर्योधन और शकुनि के किरदार की वजह से काफी बार असल जिंदगी में भी पुनीत इस्सर और गुफी पेंटल को लोगों की नफरत का सामना करना पड़ता था. इस बारे में बात करते हुए गुफी कहते हैं कि उस जमाने में उनको काफी फैंस मेल आते थे एक बार एक चिट्ठी में लिखा था “ओए शकुनि! तूने बड़ा ख़राब काम किया है. तुमने द्रौपदी का चीरहरण करवाया. कौरव पांडवों में झगड़ा लगवाया यहां तक कि तुम हमारे श्रीकृष्ण भगवान की बात भी नहीं मान रहे हो. अगर अगले एपिसोड तक युद्ध बंद नहीं हुआ तो तेरी दूसरी टांग भी तोड़ दूंगा.”

पुनित इस्सर का कहना है मुकेश खन्ना, सुरेंद्र पाल और तमाम कलाकरों की आवाज काफी साफ़ थी पर मेरी आवाज थोड़ी अलग हस्की (husky)थी. इसलिए उन्हें हमेशा चिढ़ाया जाता था. उन्हें कहां जाता था कि यार तू आवाज डब करा ले. तेरी आवाज बहुत हल्की है. एकबार एयरपोर्ट पे इतने में 3-4 बहुत खूबसूरत लड़कियां आईं और उन्होंने सब एक्टर्स के सामने कहा कि सर आपने क्या कमाल का काम किया है और आपकी आवाज बहुत सेक्सी है.’ तब से उन्हें आवाज को लेकर चिढ़ाना बंद हो गया.

पुनीत इस्सर ने दुर्योधन को लोगों से मिलती हुई नफरत याद करते हुए कहा कि महाभारत के दौरान एक जयपुर शूट के वक़्त एक उद्योगपति ने उन्हें दावत पर बुलाया था. पुनीत इस्सर ने बताया था कि उन्हें दावत पर बुलाकर खाना तो परोसा पर कोई घर की औरत उनके आस पास नहीं आयी थी. इतना ही नहीं उस दावत पे रूपा जी को भी नसीहत दी गयी थी की वह उनके साथ खाना ना खाएं. हद तो तब हुई जब एक माताजी ने उन्हें डांटा कि तुमने पांडवों पर इतने जुल्म क्यों किए. तुम्हे पांडवों को 5 गांव दे देने चाहिए थे.