Birth Anniversary: ‘फ्लॉप शो’ से सुपरहिट हुए जसपाल भट्टी की कहानी

जसपाल भट्टी जिस तरह एक लाइन में व्यंग करते थे, वैसे शायद कोई और न करता होगा. उनके इस अंदाज की हर कोई तारीफ करता था और किसी को उनकी बात का बुरा भी नहीं लगता था.

नई दिल्ली: ब्लैक एंड वाइट के दौर में टीवी पर एक सरदार जी आते थे. ये बात 90 के दशक की है. उनकी एक्टिंग इतनी दमदार होती थी कि, देखने वाले उन्हें बस देखते ही रह जाते थे. अपने अनोखे अंदाज से सरदार जी सिस्टम और राजनीति पर हंसी मजाक में ही एक बड़ा संदेश दे जाते थे. यहां बात हो रही है जाने-माने कॉमेडियन जसपाल भट्टी की, जिनका आज जन्मदिन है.

‘कॉमेडी के किंग’ थे भट्टी साहब

एक लाइन में व्यंग के जरिए अपनी बात रखने का भट्टी साहब का अंदाज बेहद ही निराला था. लोग उन्हें व्यंग का राजा कहते थे. जसपाल भट्टी ना सिर्फ बेहतरीन अदाकार थे, बल्कि शानदार फिल्म निर्माता और निर्देशक भी थे. 80 के दशक के अंत में जसपाल भट्टी ने दूरदर्शन पर आने वाले ‘उल्टा-पुल्टा’ कार्यक्रम के जरिए लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई. इनमें सबसे लोकप्रिय शो था, ‘फ्लोप शो’, जो काफी हिट रहा. इस शो ने उन्हें घर-घर में एक नई पहचान दिलाई.

जसपाल भट्टी ने ‘सेहजी की एडवाइस’, ‘फुल टेंशन’, ‘थैंक्यू जीजा जी’ और ‘ढाबा जंक्शन’ जैसे सीरियल्स के जरिए आम लोगों की कहानी को सहजता से ऑडियन्स के सामने रखा, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया. इसके अलावा जसपाल भट्टी चंडीगढ़ में ‘द ट्रिब्यून’ न्यूजपेपर में व्यंग चित्रकार के तौर पर काम करते थे. लिहाजा उन्हें आम आदमी से जुड़ी समस्याओं और सिस्टम पर व्यंग के जरिए अपनी बात रखने का अनुभव तो पहले से ही था, लेकिन जब टीवी के पर्दे पर वे अपने इस अंदाज के साथ आए तो कॉमेडी का ये सरदार लोगों के दिलों पर राज करने लगे.

फिल्मों में भी छा गए थे ‘सरदार जी’

भट्टी साहब छोटे पर्दे पर ही नहीं बल्कि फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुके थे. उन्होंने सीरियल्स में अपने अभिनय से तो दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी ही, लेकिन फिल्मों के जरिए भी उन्होंने लोगों को खूब गुदगुदाया. 1991 में जसपाल भट्टी ने अपने निर्देशन में ‘माहौल ठीक है’ फिल्म का निर्देशन किया. इस फिल्म में जसपाल भट्टी को खूब तारीफ मिली. फिल्म ‘फना’ में उन्होंने गार्ड जोली सिंह का किरदार निभाया. ‘कॉमेडी के किंग’ ने ‘कोई मेरे दिल से पूछे’, ‘मौसम’, ‘जानी दुश्मन’, ‘कुछ ना कहो’, ‘जानम समझा करो’, ‘आ अब लौट चलें’ जैसी फिल्मों में भी काम किया है.

भट्टी साहब का सफरनामा

जसपाल भट्टी का जन्म 3 मार्च 1955 को अमृतसर के एक राजपूत सिख परिवार में हुआ था. भट्टी साहब ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर में ग्रेजुएशन की थी. जसपाल भट्टी की शादी 24 मार्च 1985 को सविता भट्टी से हुई थी. उनका एक बेटा जसराज भट्टी और एक बेटी, रतिया भट्टी हैं.

एक हादसे में हो गई थी मौत

25 अक्टूबर 2012 को जालंधर के शाहकोट के पास एक कार दुर्घटना में भट्टी साहब की मृत्यु हो गई थी. कार उनके बेटे जसराज भट्टी चला रहे थे. जसपाल भट्टी की मृत्यु उनके बेटे जसराज की फिल्म ‘पॉवर कट’ की रिलीज से ठीक एक दिन पहले हुई थी. 2013 में उन्हें भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘पद्म भूषण’ (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था.