आज ही के दिन दादासाहेब फाल्के ने दुनिया को कहा ‘अलविदा’, जानें कुछ अनसुनी बातें

Share this on WhatsApp‘भारतीय सिनेमा के पितामाह’ कौन हैं, यह तो आप अच्छे से जानते ही होंगे. जो लोग नहीं जानते हैं तो उन्हें बता दें कि धुंदीराज गोविंद फालके, जो कि दादासाहेब फाल्के के नाम से मशहूर थे, उन्हें ही भारतीय सिनेमा का पितामाह कहा जाता था. भारतीय फिल्म जगत को पहली फिल्म देने […]

‘भारतीय सिनेमा के पितामाह’ कौन हैं, यह तो आप अच्छे से जानते ही होंगे. जो लोग नहीं जानते हैं तो उन्हें बता दें कि धुंदीराज गोविंद फालके, जो कि दादासाहेब फाल्के के नाम से मशहूर थे, उन्हें ही भारतीय सिनेमा का पितामाह कहा जाता था. भारतीय फिल्म जगत को पहली फिल्म देने वाले दादासाहेब फाल्के का जन्म महाराष्ट्र के ट्रिम्बक में हुआ था. फाल्के प्रतिभा के धनी थे.

ऐसा शायद ही कोई कार्य रहा हो जो उन्होंने न किया है, फिर वो चाहे फोटोग्राफी हो या देश को पहली फिल्म देना हो. उनकी शुरुआत एक फोटोग्राफर के तौर पर ही हुई थी, लेकिन इस फील्ड में वे ज्यादा दिन टिके नहीं. उनका किसी एक काम में मन नहीं लगता था. वे नई-नई चीजों को सीखने के लिए हमेशा अग्रसर रहते थे. आज हम आपके साथ देश की पहली साइलेंट मूवी बनाने वाले दादासाहेब फाल्के की जिंदगी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें साझा करने जा रहे हैं.

  • दादासाहेब फाल्के को पहली मूवी बनाने की इच्छा फ्रेंच डायरेक्टर एलिस गाय ब्लैशे की फिल्म ‘द लाइफ ऑफ क्राइस्ट’ को देखकर हुई.
  • जब उन्होंने पहली साइलेंट मूवी ‘राजा हरिशचंद्र’ बनाई थी तो उन्होंने हीरो के लिए एक विज्ञापन दिया था कि एक हैंडसम हीरो चाहिए और बदसूरतों को अपलाई करने की जरुरत नहीं है.
  • 15 हजार रुपए में दादासाहेब ने ‘राजा हरिशचंद्र’ बना दी थी.
  • इस फिल्म को बनाने में उनके पूरे परिवार ने उनकी मदद की थी.
  • वे अपनी फिल्मों में क्रिएटीविटी पर ज्यादा ध्यान देते थे, इसलिए खुद ही शूटिंग इक्यूपमेंट्स के साथ कुछ न कुछ कारनामा करते रहते थे. इक्यूपमेंट्स के साथ इतना एंगेज रहने के कारण उन्हें दिखना बंद हो गया था.
  • महिला किरदार के लिए कोई नहीं मिला तो राजा हरिशचंद्र के लिए पुरुष अभिनेता से महिला का किरदार करवाया.
  • राजा हरिशचंद्र की अपार सफलता के बाद दादासाहेब ने अपने 19 साल के करियर में 95 फिल्में और 29 शॉर्ट फिल्में बनाई.
  • महिलाओं के अंदर अभिनय का शौक जगाने और फिल्मों में लाने वाले दादासाहेब फाल्के ही थे.
  • उनके सम्मान में 1971 में इंडिया पोस्ट ने उनकी फोटो वाला पोस्टेज स्टैंप भी बनाया था.
  • फाल्के मेकअप करना भी जानते थे. जर्मनी में जब वे जाने-माने जादूगर कार्ल हर्ट्ज़ के पास मैजिक सीखते थे तो वे जादूगर का मेकअप भी करते थे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *