शेखर कपूर ने ऐसा क्या ट्वीट किया जो जावेद अख्तर ने उन्हें कह डाला मनोरोगी?

जावेद अख्तर ने एक के बाद एक कई सारे ट्वीट कर शेखर कूपर को खूब खरीखोटी सुनाई.

मुंबई: इन दिनों नांमचीन हस्तियां चिट्ठी-चिट्ठी खेल रही हैं. कुछ दिनों पहले 49 जानीमानी हस्तियों ने देश में बढ़ रहे मॉब लिंचिंग के मामलों पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी. इसके बाद फिर सामने आईं देश की अन्य 61 हस्तियां जिन्होंने ‘सेलेक्टिव आउटरेज’ के खिलाफ खुला ख़त लिखते हुए उन 49 हस्तियों को जवाब दिया.

इसके बाद से नामी हस्तियों के बीच ट्विटर वॉर छिड़ गई है. ऐसी ही एक ट्विटर वॉर मशहूर लेखक जावेद अख्तर और फिल्मकार शेखर कपूर के बीच देखने को मिली. शेखर कपूर उन 49 हस्तियों के समर्थन में नहीं थे शायद जिन्होंने पीएम को चिट्ठी लिखकर मॉब लिंचिंग को लेकर कड़ा कानून बनाने की मांग की थी. बस क्या था फिर, शेखर कपूर ने एक ऐसा ट्वीट कर दिया, जिससे जावेद अख्तर भड़क गए और उन्होंने शेखर कपूर को मनोरोगी कह डाला.

शेखर कपूर ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “बंटवारे के रिफ्यूजी के तौर पर जीवन शुरू किया. परिजनों ने अपने बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए सबकुछ किया. हमेशा से ‘बुद्धिजीवियों’ के डर में जिया हूं. उन्होंने हमेशा मुझे तुच्छ होने का अहसास दिलाया है. इसके बाद उन्होंने अचानक मुझे मेरी फिल्मों के कारण गले लगा लिया. मैं अभी भी उनसे डरता हूं. उनका गले लगना सांप के डसने जैसा है. मैं अभी भी एक रिफ्यूजी हूं.”

शेखर कपूर का यह ट्वीट जावेद अख्तर को पसंद नहीं आया और उन्होंने फिल्मकार को करारा जावाब देते हुए लिखा, “कौन हैं ये बुद्धिजीवी जिन्होंने आपको गले लगाया और आपको उनका साथ सांप के डसने जैसा लगा? श्याम बेनेगल, अदूर गोपालकृष्णा, राम चंद्र गुहा? सच में? शेखर साहब आप ठीक नहीं लग रहे हैं. आपको मदद की जरूरत है. कम ऑन एक अच्छे साइकेट्रिस्ट से मिलें, इसमें कोई शर्म की बात नहीं है.”

इसके बाद शेखर कपूर के अभी भी रिफ्यूजी होने की बात कहने पर उन्हें गुस्से में जवाब देते हुए जावेद अख्तर ने लिखा, “अभी भी रिफ्यूजी होने से आपका मतलब क्या है. क्या इसका यह मतलब है कि आप अभी भी खुद को भारतीय नहीं बल्कि बाहरी व्यक्ति महसूस करते हैं और आपको ऐसा लगता कि यह आपकी मातृभूमि नहीं है. अगर आपको भारत में भी रिफ्यूजी जैसा महसूस होता है तो आप कहां खुद को रिफ्यूजी महसूस नहीं करेंगे, पाकिस्तान में? बेचारे अमीर लेकिन अकेले आदमी, यह ड्रामा बंद कीजिए.”

इसके बाद जावेद अख्तर ने कड़े शब्दों में लिखा, “आपने खुद को न तो अतीत से प्रभावित बताया है न ही इस क्षण में रहने वाले भविष्य से डरते हैं और उसी सांस में आप कहते हैं कि आप पार्टिशन वाले रिफ्यूजी हैं और अभी भी रिफ्यूजी हैं. विरोधाभास देखने के लिए किसी को मैग्निफाइंग ग्लास की जरूरत नहीं होगी.”

 

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