कंगना से सीखकर क्या अब शुरू हो जाएगा बॉलीवुड में मुद्दों पर बोलने का चलन?

बॉलीवुड स्टार्स पर हमेशा ये आरोप लगते रहते हैं कि मुद्दों पर बोलने के वक्त स्टार्स ज्यादातर बचते नजर आते रहे हैं. शायद उनको अपनी फिल्मों की रिलीज रुकवाने का डर लगता हो लेकिन कंगना ने एक ऐसे ट्रेंड की शुरुआत की है जिससे काफी कुछ सीखा जा सकता है

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कंगना रनौत बोल रही हैं और जमकर बोल रही हैं. उनके निशाने पर महाराष्ट्र सरकार है. चाहे मुंबई से सटे पालघर में साधुओं की हत्या का मामला हो या फिर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या को हत्या करार देने वाले बयान. कंगना ने उद्धव ठाकरे की सरकार और मुंबई पुलिस के खिलाफ बेधड़क अपने दिल की बात रखी. वो निडर हैं. उनकी इन बातों से फिल्म इंडस्ट्री का एक तबका नाराज हुआ तो एक बड़ा धड़ा कंगना के साथ भी खड़ा नजर आया.

इसका बदला उद्धव सरकार ने उनके ऑफिस में तोड़फोड़ करके जरूर ले लिया, लेकिन पूरे देश में जिसने भी टीवी पर कंगना के साथ हुए इस अत्याचार को देखा उसे कहीं न कहीं कंगना की ये बात सच जरूर लगी कि महाराष्ट्र में राजनीतिक पार्टियों से अपनी अलग राय रखना, आपको पाकिस्तान में होने जैसा अहसास जरूर करा सकता है. गुंडे आपको मारने पीटने आ जाएंगे. सबकी रक्षा का वचन देने वाली सरकार और पुलिस चुप लगाकर पहले आपको पिटते हुए देखेंगे, बाद में ऐसी कानूनी कार्रवाई करेंगे जिससे धमकाने वाले लोग ही ज्यादा ‘सेफ फील’ करेंगे.

बॉलीवुड का नया चलन

लगता है कंगना ने जब से फिल्म मणिकर्णिका में झांसी की रानी का रोल किया है उसके बाद उनकी पर्सनैलिटी में मणिकर्णिका जैसी ही छवि आ गई है. वो निडर हैं, बेबाक हैं और बेधड़क हैं. उनका करोड़ों रुपए की लागत से बना ऑफिस तोड़ दिया गया, फिर भी कंगना ने चुप बैठने के बजाय अपने बयानों में धार कम नहीं होने दी. वो अपने काम पर ध्यान देने के साथ-साथ उन मुद्दों को खूब उठा रही हैं, जिन पर खुलकर बोलने, खासतौर से राजनीतिक पार्टियों की आलोचना से तो फिल्म इंडस्ट्री ने हमेशा से ही चुप्पी साधे रखी है.

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आलोचना करने से डरते हैं ए लिस्टर स्टार्स?

ए लिस्टर स्टार्स पर हमेशा उनके आलोचक इस बात का इल्जाम लगाते रहे हैं कि उन्हें जनता के मुद्दों पर बोलने से हमेशा परहेज रहा है. अपने मन से सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने वाले स्टार्स में अब तक अनुपम खेर जैसे गिने चुने एक्टर्स ही हैं. लेकिन अमिताभ बच्चन, सलमान खान, शाहरुख, आमिर, अक्षय, ऋतिक रोशन, दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट, करीना कपूर जैसे टॉप स्टार्स खुद को हमेशा कॉन्ट्रोवर्सी से दूर रखने की कोशिश करते रहे हैं.

स्टार्स ने झेला है विरोध

अक्षय कुमार को अगर छोड़ दें तो बाकी स्टार्स ने जब भी कोई राजनीतिक बयान दिया तो उसका दंश भी उनको झेलना पड़ा. शाहरुख की फिल्म माय नेम इज खान का विरोध शिवसेना के खूब किया. सलमान की फिल्मों का विरोध भी खूब हुआ. अमिताभ बच्चन से राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इतनी नाराज हुई थी कि उनके घर पर बोतलें फेंकने पहुंच गए थे एमएनएस के गुंडे. दीपिका की फिल्म पद्मावत को करणी सेना ने रिलीज कराने से रोका था, फिर उनकी फिल्म छपाक के वक्त जेएनयू में उनके जाने का ऐसा विरोध हुआ कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर पानी तक नहीं मांगा.

साउथ के स्टार्स को नहीं पड़ता फर्क

बॉलीवुड से बिल्कुल अलग साउथ की फिल्म इंडस्ट्री के स्टार्स वहां की जनता की आवाज उठाने में कभी भी पीछे नहीं रहे. उनके सबसे बड़े स्टार्स रजनीकांत और कमल हासन ने तो राजनीतिक पार्टियां ही बना ली हैं. वहीं जयललिता, करुणानिधि, एनटीआर, एमजी रामचंद्रन जैसे पुराने स्टार्स से दशकों तक अपनी पार्टियों और राज्यों को चलाया. नए जमाने के स्टार्स जैसे सूर्या, रंगनाथन माधव, कमल हासन समेत कई स्टार्स ने नीट परीक्षा में असफल हुए 3 छात्रों की आत्महत्या के मुद्दे पर सरकार की जमकर आलोचना की है. इन स्टार्स को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि सरकार उनके बारे में क्या राय रखती है, वो हमेशा अपने फैंस की आवाज उठाने और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करते हैं.

क्या अब बदलेगा बॉलीवुड?

ऐसे में बड़ा सवाल अब भी यही है कि क्या हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के स्टार्स अपनी राय खुलकर रखने जनता के सामने आएंगे या फिर बस कंगना ही खुद जलाई इस मशाल को लेकर आगे बढ़ती रहेंगी. कंगना काफी बार कह चुकी हैं कि अगर आवाज नहीं उठाओगे तो जो आज उनके साथ हो रहा है वो हो सकता है कल किसी और के साथ भी.

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