VIDEO: पांच आइकॉनिक रोल्स जो साबित करते हैं फिल्म इंडस्ट्री के बाबा हैं ‘संजू’

KGF chapter 2 का पोस्टर संजय दत्त के जन्मदिन पर जारी हुआ. उनके 60वें जन्मदिन पर पांच बेस्ट रोल्स के बारे में पढ़ें.

संजय दत्त जिंदगी के 60 साल पूरे कर चुके हैं. सरकारी नौकरियों से रिटायरमेंट की स्टैंडर्ड उम्र. लेकिन उनके जन्मदिन पर ‘KGF: Chapter 2’ का जो पोस्टर आया है, उसे देखकर लगता है कि संजू फिल्म इंडस्ट्री के बाबा हैं, बाबा रहेंगे. ब्लैक एंड व्हाइट इमेज में संजय दत्त की लाल लाल आंखें साफ दिख रही हैं.

उनकी रील और रियल लाइफ किसी बायोपिक में नहीं समा सकती. संजय दत्त की जिंदगी पर यासिर उस्मान ने किताब लिखी, संजय दत्त ने लेखक पर मुकदमा कर दिया. करना ही था, 2-400 पन्नों में संजय की बायोग्राफी कैसे समा सकती है. उसके लिए महाभारत लिखनी चाहिए थी.

खैर, संजय दत्त की निजी जिंदगी के बारे में जानने के बहुत से मौके आएंगे. फिलहाल तो उनके पांच सबसे खास रोल्स की बात करते हैं, जिन्होंने संजय दत्त को संजय दत्त बनाया.

1. रॉकी (राकेश/रॉकी डिसूज़ा)

रॉकी 1981 की सुपरहिट फिल्म थी. सुनील दत्त ने अपने बेटे संजय को इस फिल्म से दमदार तरीके से लॉन्च किया था. वो इसके डायरेक्टर भी थे. फिल्म में संजय दत्त के अपोजिट टीना मुनीम थीं. जिनसे संजय दत्त को प्यार और फिर दर्द में डुबा देने वाला ब्रेकअप हुआ. रॉकी में संजय दत्त का रोल एक लवर बॉय का था जो तमाम उतार चढ़ाव से गुजरकर अपने पिता की मौत का बदला लेता है. संजय दत्त की एक्टिंग इस फिल्म में बता रही थी कि ये उनकी पहली फिल्म है. उन्हें अभी बहुत कुछ करना है.

2. नाम (विकी कपूर)

1986 में आई फिल्म नाम से संजय दत्त का नाम पक्का हुआ था. इसमें वो अमीर बार की नहीं, गरीब फैमिली के बिगड़ैल बेटे बने हुए थे. गैरकानूनी काम करके बार बार मुश्किल में फंसता, जिसे छोटा भाई रवि(कुमार गौरव) बचाता है. फिर नौकरी के चक्कर में दुबई जाकर फंस जाता है. एक स्मगलर के लिए मजबूरी में काम करते विकी की अंदर की मनोदशा को संजय दत्त ने बारीकी से परदे पर उतारा. महेश भट्ट के निर्देशन में संजय दत्त निखर आए थे.

3. साजन (अमन)

साजन साल 1991 की टॉप की कमाई वाली फिल्म थी. इस फिल्म ने संजय दत्त, माधुरी दीक्षित और सलमान खान, तीनों के पैर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जमा दिए. संजय ने इसमें एक पैर से लाचार शायर का रोल किया था जो अपने भाई के लिए अपनी मोहब्बत को छोड़ने के लिए तैयार हो जाता है. ये थोड़ा कंट्रोवर्सियल है कि बिना उस मोहब्बत से पूछे. खैर प्यार मोहब्बत वाला रोल संजय दत्त पहली फिल्म में ही कर चुके थे लेकिन साजन में उनका जो रूप दिखा, वो तो आग में तपने के बाद ही आता है.

4. वास्तव (रघु)

कायदे से चौथे नंबर पर खलनायक को होना चाहिए था लेकिन वास्तव और खलनायक में एक को चुनना हो तो वास्तव का रघु ही जीतेगा. 1999 में आई इस फिल्म में संजय दत्त ने मुंबई की एक चॉल में रहने वाले गरीब लड़के का रोल किया जो ग्रेजुएट होकर बेरोजगार है. वो अपने भाई के साथ मिलकर वड़ा पाव का ठेला लगाता है. बिजनेस अच्छा चल निकलता है लेकिन फिर लोकल गुंडों के आतंक से निपटता अंडरवर्ल्ड जा पहुंचता है.

अच्छाई से बुराई के गड्ढे में जबरदस्ती धकेला गया लड़का दौड़ते दौड़ते थक जाता है तो लास्ट में उसकी मां मदर इंडिया बन जाती है. गोली मारकर उसे मुक्ति देती है. अंडरवर्ल्ड की गलीज गलियों में भटकते नायक का संघर्ष संजय दत्त ने दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

5. मुन्नाभाई एमबीबीएस (मुरली प्रसाद शर्मा/ मुन्ना)

मुन्नाभाई एमबीबीएस संजय दत्त की बेस्ट फिल्म कही जा सकती है. पढ़ाई में कमजोर मुन्ना पापा मम्मी को धोखा देने के लिए जुगाड़ से डॉक्टर बन जाता है. उस जमाने में डिग्री देखने वाला फैशन नहीं होता था लेकिन फिर भी मुन्ना की हरकतें ऐसी रहती हैं कि किसी को भी शक हो जाए. फिर चोरी पकड़ न जाए इसके जुगाड़ में जो स्थितियां बनती हैं वो राजकुमार हिरानी ने जितने अच्छे से फिल्माया है, संजय दत्त ने उतनी ही सफाई से निभाया है.

इनके अलावा रुद्राक्ष का ट्रैशी रोल हो या अग्निपथ का कांचा चीना, सबकी अलग वैल्यू है. कभी मौका मिला तो उन पर भी फुरसत से बात की जाएगी.

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