बेटे की शादी छोड़ शिवाजी के लिए किला जीतने निकल पड़े, पढ़ें ‘तानाजी-द अनसंग वॉरियर’ की कहानी

तानाजी मालुसरे एक वीर मराठा योद्धा थे. वे मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना के सेनापति थे.

Movie Tanhaji : The Unsung Warrior, बेटे की शादी छोड़ शिवाजी के लिए किला जीतने निकल पड़े, पढ़ें ‘तानाजी-द अनसंग वॉरियर’ की कहानी

अजय देवगन स्टारर फिल्म ‘तानाजी-द अनसंग वॉरियर’ (Tanhaji : The Unsung Warrior)  रिलीज से पहले ही विवादों में उलझ गई है. यह अजय देवगन के फिल्मी करियर की 100वीं फिल्म है.

अखिल भारतीय क्षत्रिय कोली राजपूत संघ ने फिल्म के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. अखिल भारतीय क्षत्रिय कोली राजपूत संघ ने आरोप लगाया है कि इस फिल्म में तानाजी मालुसरे के असली वंश को पेश नही किया है. फिल्म के खिलाफ दायर की गई इस याचिका पर 19 दिसंबर को सुनवाई होगी.

अजय देवगन के अलावा इस फिल्म में काजोल और सैफ अली खान भी अहम भूमिका में नजर आएंगे.  ‘तानाजी-द अनसंग वॉरियर’ एक पीरियड ड्रामा फिल्म है. इस फिल्म का निर्देशन ओम राउत ने किया है.

कौन थे तानाजी मालुसरे

तानाजी मालुसरे एक वीर मराठा योद्धा थे. वे मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना के सेनापति थे. तानाजी को 1670 में हुए सिंहगढ़ युद्ध में उनकी वीरता के लिए याद किया जाता है.

तानाजी का जन्म 17वीं शताब्दी में महाराष्ट्र के कोंकण में महाड़ के पास ‘उमरथे’ में हुआ था. उनकी माता का नाम पार्वतीबाई और पिता का नाम सरदार कोलाजी था. उनके भाई का नाम सरदार सूर्याजी था. वे छत्रपति शिवाजी महाराज के बचपन के अच्छे दोस्त थे. दोनों बचपन में एक साथ खेलते थे. तानाजी छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे करीबी व भरोसेमंद माने जाते थे.

बेटे की शादी छोड़ शिवाजी महाराज के साथ युद्ध पर निकले 

कहा जाता है कि तानाजी मालुसरे अपने पुत्र रायबा के विवाह के लिए जब छत्रपती शिवाजी महाराज जी को आमंत्रित करने पहुंचे थे, तब उन्हें पता चला कि कोंढाणा पर छत्रपती शिवाजी महाराज चढ़ाई करने वाले हैं.

तानाजी मालुसरे ने उस समय कहा था कि विवाह बाद में होगा, मैं कोंढाणा पर आक्रमण करुंगा. अपने पुत्र रायबा के विवाह को बीच में ही छोड़ कर उन्होने शिवाजी महाराज की इच्छा का मान रखते हुए कोंढाणा किला जीतना ज़्यादा जरुरी समझा.

कोढ़ाणा का किला रणनीतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित था और शिवाजी महाराज द्वारा इसपर अपना कब्जा जमाना बहुत महत्वपूर्ण था. दुर्गम कोढ़ाणा दुर्ग पर तानाजी के नेतृत्व में 342 सैनिकों की टुकड़ी ने आक्रमण किया. तानाजी के साथ उनके भाई सूर्याजी मालुसरे और मामा शेलार मामा भी इस युद्ध में शामिल हुए.

कोढ़ाणा के दुर्ग पर उदयभान राठौड का कब्जा था. उदयभान राठौड के नेतृत्व में 5000 हजार मुगल सैनिकों के साथ तानाजी की 342 सैनिकों की टुकड़ी ने भयंकर युद्ध लड़ा और अंत में कोढ़ाणा किले पर फतह हासिल की, लेकिन इस युद्ध के दौरान तानाजी गंभीर रूप से घायल हो गए और युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए.

जब छत्रपती शिवाजी महाराज को तानाजी के वीरगती को प्राप्त होने की खबर मिली तो उन्होंने दुखी होते हुए कहा की “गढ़ आला, पण सिंह गेला”. यानी हमने गढ़ तो जीत लिया, लेकिन मैंने मेरा सिंह (तानाजी) खो दिया. बाद में शिवाजी ने कोढ़ाणा किले का नाम सिंहगढ़ रख दिया और आज यह किला इसी नाम से जाना जाता है.

 

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