‘मुझे लगता है कि चांद पर मेरा कॉपीराइट है’

गुलजार चांद और चंदा पर 50 से भी ज्यादा कविताएं लिख चुके हैं. उनकी उन कविताओं में रोमांस और शरारत से लेकर एकांत और मौन तक को महसूस किया जा सकता है.
Gulzar Moon Chandrayan 2, ‘मुझे लगता है कि चांद पर मेरा कॉपीराइट है’

मुंबई: चंद्रमा की खूबसूरती का जिक्र जिस तरह से मशहूर लेखक गुलजार ने अपनी कविताओं और गीतों में किया है, शायद ही ऐसा किसी और ने किया हो. इन कविताओं और गीतों में भावनाओं का खुलकर जिक्र है, जो कि रोमांस और शरारत से लेकर एकांत और मौन तक को महसूस कराता है.

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, गुलजार साहब कहते हैं कि एक बार उनसे जानीमानी गायिका आशा भोसले ने कहा था कि अगर चांद नहीं होता तो वे कभी अपने अंदर के लेखक को खोज नहीं पाते. रिपोर्ट के अनुसार, गुलजार ने कहा, “साल 1963 में आई फिल्म ‘बंदिनी’ में पहली बार मैंने एक गीत लेखक के तौर पर काम किया था. उन्होंने फिल्म के लिए ‘मोरा गोरा अंग लइले’. इस गाने में लाइन थीं बद्री हटा के चंदा, चुपके से झांके चंदा.”

गुलजार चांद और चंदा पर 50 से भी ज्यादा कविताएं लिख चुके हैं. मुस्कुराते हुए गुलजार ने कहा, “मुझे लगता है कि चांद पर मेरा कॉपीराइट है.”

1969 में ल्यूनर सर्फेस पर कदम रखने वाले नील आर्मस्टॉन्ग की कामयाबी पर बात करते हुए गुलजार ने कहा, “मुझे अच्छी तरह से तो याद नहीं है कि उस समय मैं कहां था और क्या कर रहा था, लेकिन मुझे याद है कि वह एक व्यक्ति ने इस दुनिया से बाहर कदम रखा था, जो कि बहुत बड़ी उपलब्धि थी. इसमें एक चीज़ मुझे बहुत बुरी लगती है. लोग नील आर्मस्टॉन्ग के बारे में बात करते हैं, लेकिन एडविन को लोग हमेशा चांद पर कदम रखने वाले दूसरे व्यक्ति के तौर पर जानते हैं. अगर आप पहला स्थान नहीं लेते तो आपको भूले जाने का रिस्क बना रहता है.”

इसके आगे गुलजार ने कहा, “चांद को हमेशा एक पैमाने के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है और इसलिए एक बार मैंने लता मंगेशकर से एक मजाक किया था चांद पे पहुंच गई पर आशा भी तो पहुंची हैं.”

 

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