रिया की जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह (Anil Singh) ने कोर्ट (Bombay High Court) से कहा कि हत्या एक व्यक्ति या एक परिवार को प्रभावित करती है. यह (Drug Cases) पूरे समाज को प्रभावित करते हैं.

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रिया और शोविक ने बॉम्बे हाई कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की हुई है.

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty), उनके भाई शोविक (Showik Chakraborty) और तीन अन्य की जमानत याचिका पर आज यानी मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई पूरी होने के बाद जस्टिस सारंग वी कोतवाल की सिंगल जज बेंच ने रिया, शोविक और अन्य आरोपियों की जमानत के मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

कोर्ट में रिया और अन्य लोगों की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) से कहा कि यह अपराध गैर-जमानती है. एनसीबी की तरफ से दलील दी गई कि यह अपराध हत्या या गैर इरादतन हत्या से भी बदतर है.

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हत्या या गैर-इरादतन हत्या से भी बदतर

सुनवाई के दौरान इस बात पर जिरह हुई कि क्या आरोपियों द्वारा किए गए अपराध जमानती हैं. साथ ही पूछा गया कि क्या वर्तमान मामलों में नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत कुछ प्रावधान हैं, जिनके जरिए जमानत दी जा सके. रिया, शोविक, सैमुअल मिरांडा, अब्दुल बासित परिहार और दीपेश सावंत सहित तीन अन्य की जमानत याचिका को 11 सितंबर को विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

बॉम्बे हाई कोर्ट में मंगलवार को एनसीबी की तरफ से अपील करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कोर्ट से कहा कि उस बैकड्रॉप को ध्यान में रखना होगा, जिसके तहत एनडीपीएस अधिनियम सामाजिक स्थिति और लेजिस्लेटिव मंशा के संबंध में बनाया गया है.

उन्होंने कहा कि यह एक अपराध की तरह है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्याख्या की गई है, जो हत्या या गैर-इरादतन हत्या से भी बदतर है. हत्या एक व्यक्ति या एक परिवार को प्रभावित करती है. हालांकि, यह (ड्रग मामले) पूरे समाज को प्रभावित करते हैं. हम देश के कॉलेज के युवाओं के रुझान को देख रहे हैं. यह एक अपराध है, जहां इसे गैर-जमानती बनाया जाना चाहिए, इसलिए विधानमंडल ने कहा है कि अपराध संज्ञेय होगा और उसने इसे जमानती नहीं बनाया है.

समाज को नष्ट कर रहे ये अपराध

अनिल सिंह ने आगे कहा कि इस तरह के अपराधों को देखते हुए, जो समाज को नष्ट कर रहे हैं, उनके लिए एनडीपीएस अधिनियम के लिए जमानत के प्रावधानों को और सख्त बनाया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि जहां तक ​​एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराध का संबंध है, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधान लागू नहीं होंगे.

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सोमवार को एनसीबी ने हाई कोर्ट में इस मामले में अपना हलफनामा दायर किया था, जिसमें कहा गया कि रिया और शोविक हाई सोसायटी की हस्तियों और ड्रग सप्लायर्स से जुड़े ड्रग सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य थे. केंद्रीय एंटी-ड्रग एजेंसी ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि आवेदनकर्ता ड्रग के खरीद-फरोख्त में शामिल रहे हैं, जो कि एनडीपीएस के सेक्शन 27ए के तहत अपराध है.

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