Shikara : विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म पर छिड़ा विवाद, उठी बायकॉट करने की मांग

लोगों का कहना है कि 30 साल पहले कश्मीर में जो हुआ वह कभी भी भुलाया नहीं जा सकता. ऐसे में 'शिकारा' फिल्म बनाकर फिल्ममेकर केवल प्रोपेगेंडा सेट कर रहे हैं.

फिल्म निर्माता विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘शिकारा’ को बायकॉट करने की मांग उठ रही हैं. यह मांग विधु के उस बयान के बाद उठी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी फिल्म ‘शिकारा’ दो दोस्तों की कहानी है जो कि कश्मीर दंगे के समय बिगड़ें हालातों के कारण दोनों अलग हो जाते हैं.

30 साल बाद फिर से दोनों की मुलाकात होती है और वे तीन दशक पहले हुई घटना को भुलाकर नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं. विधु का यह बयान सुनने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भड़क गए हैं.

यूजर्स का कहना कि फिल्म निर्माता के लिए बस यह कहानी एक पैसा कमाने का जरिया भर है और उनकी 30 साल पहले कश्मीरी पंडितों के साथ हुई वीभत्स घटना से कोई सहानुभूति नहीं है. तरह-तरह की प्रतिक्रिया देते हुए लोग इस फिल्म को बायकॉट करने की मांग कर रहे हैं.

लोगों का यह भी कहना है कि 30 साल पहले कश्मीर में जो हुआ वह कभी भी भुलाया नहीं जा सकता. ऐसे में ‘शिकारा’ फिल्म बनाकर फिल्ममेकर केवल प्रोपेगेंडा सेट कर रहे हैं.

इस फिल्म में दिखाए गए रिफ्यूजी कोई प्रोफेशनल एक्टर्स नहीं बल्कि 4000 से ज्यादा कश्मीरी पंड़ितों से ही एक्टिंग कराई गई है. 19 जनवरी 1990 को कश्मीरी पंड़ितों को घाटी छोड़ पलायन करना पड़ा था. तकरीबन 4 लाख से भी ज्यादा कश्मीरी पंड़ित अपना घर और पुश्तैनी ज़मीन छोड़कर रिफ्यूजी कैंप में रहने के लिए मजबूर हो गए.

घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए और कई मंदिरों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. इस भयानक दिन को आज भी कश्मीरी पंड़ित भुला नहीं पाए हैं और यहीं कारण है कि वे हर साल इस दिन को विस्थापन दिवस के तौर पर मनाते हैं.

 

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