‘पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस’- तो क्या इस बार भारतीय सिनेमा का इतिहास बदलेगा?

सिखिया एंटरटेनमेंट निर्मित इस फिल्म का निर्देशन गुनीता मोंगा ने किया है. सिखिया एंटरटेनमेंट का ‘द लंच बॉक्स’ और ‘मसान’ जैसी फिल्मों के प्रोडक्शन में अहम योगदान रहा है.

24 फरवरी को अमेरिका के लॉस एंजलिस के डॉल्बी थियेटर में जब 91वें ऑस्कर पुरस्कार की घोषणा की जा रही होगी, तभी फिल्म ‘पीरियड : एंड ऑफ सेंटेंस’ भारत में उम्मीदों की मशाल उठा रही होगी. ‘पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस’ को ‘डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट’ कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया है. अगर इस फिल्म को अवॉर्ड मिलता है तो क्या सचमुच इस बार भारतीय सिनेमा का इतिहास बदल जाएगा? क्या सच में ‘मदर इंडिया’ के बाद से ‘लगान’ तक ना मिल पाने वाले अवॉर्ड का सूखा इस बार खत्म हो जाएगा.

पीरियड्स से जुड़े टैबू पर आधारित

‘पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस’ फिल्म का सब्जेक्ट नारी स्वास्थ्य को लेकर जागरूक करना है. यह फिल्म पीरियड से जुड़े टैबू से जूझ रही एक महिला के किरदार पर आधारित है. इससे पहले इसी विषय पर अक्षय कुमार की ‘पैडमैन’ फिल्म भी आ चुकी है. ‘पीरियड : एंड ऑफ सेंटेंस’ फिल्म यूपी के हापुड़ जिले के काठीखेड़ा गांव की रहने वाली स्नेहा की असली जिंदगी पर आधारित है. सिखिया एंटरटेनमेंट निर्मित इस फिल्म का निर्देशन गुनीता मोंगा ने किया है. सिखिया एंटरटेनमेंट का ‘द लंच बॉक्स’ और ‘मसान’ जैसी फिल्मों के प्रोडक्शन में अहम योगदान रहा है.

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फिल्म ‘पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस’ का एक सीन. (Photo Source: Facebook)

ऑस्कर अवॉर्ड की घोषणा

पूरी दुनिया के फिल्म जगत में इस सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड को सराहा जाता है. ऑस्कर पुरस्कार जीतना बहुत सम्मान की बात मानी जाती है. इस बार 91वां ऑस्कर पुरस्कार की घोषणा की जानी है. ऑस्कर की घोषणा अमेरिका के लॉस एंजेलिस शहर के डॉल्बी थियेटर में होगी. कुल 24 कैटेगरी में पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी. ‘पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस’ की 6 सदस्यीय टीम बीते गुरुवार को ऑस्कर अवॉर्ड सेरेमनी के लिए अमेरिका रवाना हो गई हैं.

ऐसे हुई थी ऑस्कर अवॉर्ड की शुरुआत

अमेरिकी संस्था अमेरिकन अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर ऑर्टस एंड साइंसेस की ओर से दिए जाने वाले ऑस्कर अवॉर्ड की शुरूआत 16 मई 1929 को हुई थी. पहला अवॉर्ड समारोह अमेरिकी शहर हॉलीवुड के रूजवेल्ट होटल में आयोजित किया गया था, जिसमें करीब 250 लोग मौजूद थे. इस सम्मान की ख्याति इतनी बढ़ गई कि 200 से भी ज्यादा देशों में इसका लाइव प्रसारण किया जाता है..

‘मदर इंडिया’ थी ऑस्कर में नॉमिनेट होने वाली पहली फिल्म

साल 1929 में भारतीय फिल्में बनना तो शुरू हो गई थीं, लेकिन तब के दौर में फिल्मों का निर्माण होना बहुत मुश्किल काम था. तकनीकी रूप से भारतीय फिल्म बहुत कमजोर थीं, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ भारतीय सिनेमा में प्रभावी दौर शुरू हुआ. जैसे ही भारत में प्रभावी सिनेमा का दौर शुरू हुआ वैसे ही ‘मदर इंडिया’ ( साल 1957 ) ने ऑस्कर में धमक दी. महबूब खान द्वारा निर्मित ये फिल्म ऑस्कर जीतने के बहुत करीब पहुंची लेकिन सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा का पुरस्कार नहीं जीत सकी. इसके बाद कई फिल्में ऑस्कर में नॉमिनेट की गई, लेकिन कोई भी फिल्म पुरस्कार जीत नहीं सकी. ‘मधुमती’ ( 1958 ), द वर्ल्ड ऑफ अपु ( 1959 ), साहिब, बीबी और गुलाम ( 1962 ), गाइड ( 1965 ), उपहार (1972 ), सलाम बॉम्बे ( 1988 ) , बैंडिट क्वीन ( 1994 ), लगान ( 2001 ), देवदास ( 2002 ), रंग दे बसंती ( 2006 ), तारे ज़मीन पर ( 2008 ) जैसी प्रमुख फिल्में थी. इसके अलावा भी कई फिल्में थीं, जिनको ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया था. इतनी फिल्मों के नॉमिनेट होने के बाद भी एक भी बार पुरस्कार ना जीतना हैरत में डालता है. अब तक केवल 3 फिल्में ही थी जो फाइनल तक का सफर कर पाई थी. वो फिल्में थीं – महबूब खान की ‘मदर इंडिया’ ( 1957 ), मीरा नायर की ‘सलाम बॉम्बे’ ( 1988 ) और आशुतोष गोवारिकर की ‘लगान’ ( 2001 ), जो जीतने के बहुत करीब पहुंच कर भी अवॉर्ड हासिल नहीं कर पाईं.

‘बेस्ट कॉस्टयूम’ कैटेगरी में जीता था पहला अवॉर्ड

हालांकि बेस्ट कॉस्टयूम डिजाइन श्रेणी में एक बार भारत ऑस्कर जीत चुका है. साल 1983 में आई फिल्म ‘गांधी’ के लिए पहली बार भानु अथैय्या को पुरस्कार मिला था. फिल्म ‘गांधी’ में ही पहली बार भारतीय प्रतिभा को विश्व मंच पर पहचान मिली थी .एक दिलचस्प बात और भी है . साल 1992 में भारतीय फिल्मकार सत्यजीत रे को ऑस्कर के मंच पर बुलाकर मानद ऑस्कर अवार्ड ( ऑनररी अवॉर्ड ) दिया गया. ऑनररी अवॉर्ड लाइफटाइम अवॉर्ड के समकक्ष होता है.

2009 में ‘स्लम डॉग मिलेनियर’ को 3 कैटेगरी में अवॉर्ड मिला

इसी क्रम में साल 2007 में दीपा मेहता की फिल्म ‘वॉटर’ को सर्वश्रेष्ट विदेशी भाषा के लिए नॉमिनेट किया गया, लेकिन ये फिल्म भी अवॉर्ड जीतने में नाकाम रही. यह साल था 2009 का जब भारतीयों की प्रतिभा का दुनिया ने भी लोहा माना. दरअसल तीन भारतीयों को 3 अलग-अलग कैटेगरी में पुरस्कार मिला. फिल्म थी ‘स्लम डॉग मिलेनियर’.इस फिल्म में बेस्ट साउंड मिक्सिंग के लिए रेसूल पुकुट्टी को पुरस्कार मिला.इसी फिल्म में एआर रहमान को बेस्ट ओरिजनल स्कोर और गुलजार-एआर रहमान को संयुक्त रूप से बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग की श्रेणी में पुरस्कार मिला था. इसी फिल्म के बाद ही एआर रहमान को दुनियाभर में पहचान मिली.

इन 5 फिल्मों से है प्रतिस्पर्धा

26 मिनट की इस शॉर्ट फिल्म ‘पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस’ में उत्तर भारत की लड़कियों और महिलाओं की कहानी है. इस फिल्म को अन्य 5 फिल्मों से प्रतिस्पर्धा मिलेगी. ये फिल्में इस प्रकार है:

· Black Sheep (ब्लैकशिप)

· End Game (एंड गेम)

· Lifeboat (लाइफ बोट)

· A Night at the Garden (अ नाइट एट द गार्डन)

· Period. End of Sentence (पीरियडः एंड ऑफ सेंटेंस)

ये सभी फिल्में ‘डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट’ कैटेगरी में नॉमिनेट की गई हैं. देखना दिलचस्प होगा कि किस शॉर्ट फिल्म को अवॉर्ड मिलता है. हर भारतीय इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रहा है कि क्या इस बार भारतीय सिनेमा का इतिहास सच में बदल जाएगा.