‘शिकारा’ के खिलाफ J&K हाइकोर्ट पहुंचे 3 कश्मीरी, बोले- ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाली इस फिल्म पर बैन लगे

याचिका में कहा गया कि कश्मीरी मुस्लिमों को गलत तरह से पेश किया गया है. ये देश में ध्रुवीकरण को और बढ़ाने वाला है. ये सिर्फ हिन्‍दुओं के प्रताड़‍ित होने की बात नहीं है, बल्कि हर आम कश्‍मीरी किसी न किसी रूप में इसका शिकार है.
petition against the film shikara, ‘शिकारा’ के खिलाफ J&K हाइकोर्ट पहुंचे 3 कश्मीरी, बोले- ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाली इस फिल्म पर बैन लगे

कश्मीरी पंडितों पर जुल्म को दिखाती विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म शिकारा विवादों में फंसती जा रही है. अब 3 कश्मीरियों ने फिल्म शिकारा की रिलीज पर रोक लगाने के लिए हाइकोर्ट का रुख किया है. पत्रकार माजिद हैदरी, इफ्तिखार मिसगर और एडवोकेट इरफान हाफिज लोन की ओर से जम्मू कश्मीर हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसमे फिल्म पर बैन लगाने की मांग करते हुए कहा गया कि कश्मीर के मुस्लिमों को गलत तरह से पेश किया गया है. ये देश में ध्रुवीकरण को और बढ़ाने देने वाला है. उन्‍होंने ये भी कहा कि ये सिर्फ हिन्‍दुओं के प्रताड़‍ित होने की बात नहीं है, बल्कि हर आम कश्‍मीरी किसी न किसी रूप में इसका शिकार है. वे कभी सुरक्षा बलों की ज्‍यादती तो की आतंकियों की गोली का शिकार होते रहे हैं.

फिल्म शिकारा 7 फरवरी को रिलीज होनी है. विरोध करने वालों का कहना है कि देश में जिस तरह के मौजूदा राजनीतिक-सामाजिक हालात हैं. उसमें ये फिल्‍म सामाजिक विभाजन को और बढ़ा सकती है. इस फिल्‍म में जिस तरह से दृश्‍यों का दिखाया गया है, वो एक विशेष समुदाय के सभी सदस्‍यों को एक जैसा दर्शाने वाला है.

हालांकि फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा का कहना है कि कश्मीर से कश्मीरी पंड़ितों के पलायन पर आधारित बनी फिल्म शिकारा का मकसद विशेष समुदाय को दुख का अहसास कराना नहीं बल्कि ये दिखाना है कि कैसे त्रासदी का डट कर उन्होने सामना किया. विनोद चोपड़ा का कहना कि शिकारा एक मनोरंजन फिल्म है लेकिन लोगों को सिनेमा तक लाने के लिए कहानी की रुह के साथ खिलवाड़ नहीं किया गया.

 

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