जिनके गाने से रानू मंडल को पहचान मिली, उसके गीतकार संतोष आनंद के पास स्मार्टफोन तक नहीं

एकलौते बेटे और बहू के सुसाइड करने के बाद संतोष आनंद ने खुद को घर में कैद कर लिया था.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 11:42 pm, Sun, 25 August 19

परछाइयां रह जातीं, रह जाती निशानी है…जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है… गाने के बोल इसके गीतकार संतोष आनंद की जिंदगी बयां करते हैं, जो आजकल गुमनामी में खोए हुए हैं. संतोष आनंद गुजर-बसर के लिए छोटे-मोटे सम्मेलनों में शामिल होते हैं.

उनके लिखे गाने ‘एक प्यार का नगमा है…’ से जहां रेलवे स्टेशन में भीख मांगने वाली रानू मंडल को नई पहचान मिल गई है. वहीं बूढ़े हो चुके गीतकार संतोष जिंदगी के मुश्किल दौर से जूझ रहे हैं.

संतोष आनंद ने बताया कि जबसे रानू मंडल उनके गाने से फेमस हुई हैं, लोग उन्हें फोन करते हैं कि आपके गाने को गाकर रानू मंडल बॉलीवुड पहुंच गईं. उन्हें हिमेश रेशमिया की फिल्म में गाना गाने का मौका मिला है. इसके बाद संतोष ने बताया कि उनके पास स्मार्टफोन तक नहीं है, जिससे वो रानू मंडल के गाने को सुन सकें.

वो कहते हैं, ‘जबसे बेटे की मौत हुई, जिंदगी के सारे रंग चले गए. अब तो बस जी रहा हूं.’ संतोष ने 1995 के बाद फिल्मों के गाने छोड़ दिया था, लेकिन एकलौते बेटे और बहू के सुसाइड करने के बाद उन्होंने खुद को घर में कैद ही कर लिया. बाद में कुछ कवि मित्रों के कहने पर उन्होंने दोबारा मंच पर जाना शुरू किया.

संतोष कहते हैं, ‘अब इन गीतों में न कोई रंग है और न ही उमंग है. बस घर खर्च चलाने के लिए कवि सम्मेलनों में जाता हूं. शरीर साथ छोड़ रहा है. जिंदगी व्हील चेयर्स पर सवार हो गई है.’

‘जिंदगी में जो भोगा, मैंने उसे गानों में पिरोया. मेरी पूरी जिंदगी संघर्ष में बीती है. पहले के गानों के साथ कला भी थी, मगर आज के गानों से कला गायब है बस बाजार हावी है.’

बता दें कि पश्चिम बंगाल के रानाघाट रेलवे स्टेशन पर काम करने वाली रानू के एक वीडियो ने उन्हें मीडिया की सुर्खियों में ला दिया और उनकी किस्मत बदल गई. इस वीडियो में वो लता मंगेशकर का चर्चित गाना ‘एक प्यार का नगमा’ गा रही थीं. रानू ने अपनी मधुर अवाज से कई लोगों का दिल जीता और अब उन्हें शोज के ऑफर मिलने लगे.

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