3 साल की उम्र में फिल्मी डेब्यू, 13 में 43 साल के डांस मास्टर से शादी, पढ़ें- सरोज खान का सफरनामा

1950 के दशक में वो (Saroj Khan) बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम करती थीं. उन्होंने कोरियोग्राफर सोहन लाल (Sohanlal) के साथ काम करके डांस करना सीखा.
saroj choreograph more than 2000 songs, 3 साल की उम्र में फिल्मी डेब्यू, 13 में 43 साल के डांस मास्टर से शादी, पढ़ें- सरोज खान का सफरनामा

बॉलीवुड की मास्टर जी यानी सरोज खान (Saroj Khan) नहीं रहीं. कलाकारों को अपनी उंगलियों पर नचाने वालीं सरोज खान का जन्म का नाम निर्मला नागपाल था. सरोज खान की उम्र भले ही बढ़ती गई हो, लेकिन डांस सिखाने का उनका जज्बा और एनर्जी कभी कम नहीं हुई. उनका जन्म 22 नवंबर, 1948 को मुंबई में हुआ था. उनके माता-पिता बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आ गए थे.

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अभिनेत्री से बनीं कोरियोग्राफर

उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर की थी. वो तीन साल की थीं जब उन्हें फिल्म ‘नजराना’ में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने इस फिल्म में श्यामा का किरदार निभाया था.

1950 के दशक में वो बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम करती थीं. उन्होंने कोरियोग्राफर सोहन लाल के साथ काम करके डांस करना सीखा. इसके बाद उन्होंने अपना करियर कोरियोग्राफी में बनाने का फैसला किया. सबसे पहले वो असिस्टेंट कोरियाग्राफर के तौर पर काम करती रहीं. पर बाद में उन्होंने फिल्मी जगत में खुद की पहचान बनाने के लिए इंडिपेंडेंट कोरियोग्राफर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया.

13 साल की उम्र में की 43 साल के डांस मास्टर से शादी

सरोज खान 13 साल की थीं जब उन्होंने 43 साल के अपने डांस मास्टर सोहनलाल से शादी की. सोहनलाल से शादी करने के बाद निर्मला इस्लाम धर्म कबूल कर सरोज खान बन गईं. सरोज खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया था. उनपर इसके लिए किसी ने दवाब नहीं डाला था.

श्रीदेवी के ‘हवा हवाई’ गाने से मिली बॉलीवुड में पहचान

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उन्होंने बतौर इंडिपेंडेंट कोरियोग्राफर की शुरुआत 1974 में आई फिल्म ‘गीता मेरा नाम’ से की. हालांकि एक दशक से ज्यादा समय तक वो अपनी पहचान फिल्मों में नहीं बनाई थी. उन्हें पहचान तब मिली जब उन्होंने श्रीदेवी के साथ काम किया. 1987 में आई फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के गाने ‘हवा हवाई’ को सरोज खान ने ही कोरियोग्राफ किया था. जिसपर श्रीदेवी का डांस दर्शकों और बॉलीवुड जगत को भी खूब पसंद आया.

माधुरी की ‘धक-धक’ से हिंदुस्तान की जान बनीं सरोज खान

इसके बाद सरोज खान ने फिल्म ‘नगीना’ और ‘चांदनी’ जैसी फिल्मों में श्रीदेवी के लिए कोरियोग्राफी की. सरोज खान को अब एक अलग पहचान मिल चुकी थी. पर जब सरोज खान ने माधुरी के लिए 1992 में आई फिल्म ‘बेटा’ का ‘धक-धक करने लगा’ गाना कोरियोग्राफ किया तो वो हिंदुस्तान के हर दिल की जान बन गई थीं. माधुरी का गाना ‘धक-धक करने लगा’ आज भी जब कहीं बजता है तो लोग सरोज खान की कोरियोग्राफी को ही याद करते हैं.

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40 साल के करियर में किए 2000 से ज्यादा गाने कोरियोग्राफ

इसके बाद सरोज खान बॉलीवुड की सबसे सफल कोरियोग्राफर बन गईं. अपने 40 साल के करियर में सरोज खान ने 2 हजार से ज्यादा गाने कोरियोग्राफ किए हैं. उन्हें ‘The Mother of Dance in India’ या ‘The Mother of Choreography in India’ भी कहा जाता है.

अभिनेत्री और कोरियाग्राफर ही नहीं राइटर भी थीं

सरोज खान केवल अभिनेत्री और कोरियोग्राफर ही नहीं थीं बल्कि उन्होंने फिल्मों की कहानियां भी लिखी हैं. सरोज खान ने वीरू दादा, खिलाड़ी, हम हैं बेमिसाल, नजर के सामने, छोटे सरकार, दिल तेरा दीवाना जैसे कई फिल्मों में बतौर राइटर के तौर पर भी काम किया है. इसके अलावा सरोज खान कई टीवी रियलिटी शो भी जज कर चुकी हैं.

सरोज खान ‘देवदास’ फिल्म के ‘डोला रे डोला’, ‘जब वी मेट’ फिल्म के ‘ये इश्क हाय’ और ‘श्रृंगारम’ फिल्म के सभी गानों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने अपनी बेहतरीन कोरयोग्राफी के लिए कई फिल्मफेयर अवार्ड्स भी जीते हैं. फिल्म ‘लगान’ में अपनी शानदार कोरियोग्राफी के लिए सरोज खान अमेरिकन कोरियोग्राफी अवार्ड से भी सम्मानित हो चुकी हैं. उन्हें नंदी अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है.

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