Satire of Hindi film lovers on Oscar awards 2020, व्यंग्य: Oscar से लगी बॉलीवुड लवर्स के कलेजे में चोट, अपना टाइम आएगा…लेकिन कब?
Satire of Hindi film lovers on Oscar awards 2020, व्यंग्य: Oscar से लगी बॉलीवुड लवर्स के कलेजे में चोट, अपना टाइम आएगा…लेकिन कब?

व्यंग्य: Oscar से लगी बॉलीवुड लवर्स के कलेजे में चोट, अपना टाइम आएगा…लेकिन कब?

हर साल रिलीज होने वाली सैकड़ों फिल्में, सैकड़ों करोड़ कमाने वाले एक्टर-प्रोड्यूसर-डायरेक्टर, इतना एक्शन इमोशन और ड्रामा, लेकिन हम तरस जाते हैं एक ऑस्कर अवॉर्ड लाने को. सिनेमा प्रेमियों को कलेजे में कितनी चोट लगती है जब हमारी कोई फिल्म ऑस्कर में नहीं पहुंचती.
Satire of Hindi film lovers on Oscar awards 2020, व्यंग्य: Oscar से लगी बॉलीवुड लवर्स के कलेजे में चोट, अपना टाइम आएगा…लेकिन कब?

आज सारी दुनिया Oscar 2020 के खुमार में सराबोर है. आम दिनों में सूना पड़ा रहने वाला The Academy का ट्विटर हैंडल आज भर-भरकर रिट्वीट पा रहा है. वहां जोकिन फीनिक्स और ब्रैड पिट स्टेज पर जाकर थैंक्यू-थैंक्यू बोल रहे हैं. एक आम हिंदुस्तानी इस समय लिस्ट बना रहा है कि किस फिल्म को, किस डायरेक्टर को, किस एक्टर-एक्ट्रेस को, किस सिनेमेटोग्राफर को ऑस्कर मिला. लिस्ट में एक भारतीय नाम खोज रहा है जो नदारद है.

इतनी बड़ी दुनिया में हमारी प्राचीन संस्कृति वाला देश, हर साल रिलीज होने वाली सैकड़ों फिल्में, सैकड़ों करोड़ कमाने वाले एक्टर-प्रोड्यूसर-डायरेक्टर, इतना एक्शन इमोशन और ड्रामा, लेकिन हम तरस जाते हैं एक ऑस्कर अवॉर्ड लाने को. अवॉर्ड लाने की छोड़िए, उस मंच तक एक फिल्म पहुंचती भी नहीं है. सिनेमा प्रेमियों को कलेजे में कितनी चोट लगती है जब हमारी कोई फिल्म ऑस्कर में नहीं पहुंचती.

सिनेमा के इतिहास में वह अभूतपूर्व पल था जब स्लमडॉग मिलेनियर न सिर्फ ऑस्कर में पहुंची बल्कि जीती भी. बस यहीं से भारतीय फिल्मकारों को फॉर्मूला मिल गया. उन्हें पता चला कि जूरी में बैठने वाले लोगों को झोपड़पट्टी, गंदा नाला, कीचड़, भूखे सूखे बच्चे, बिना नहाए गंधाए इंसान देखकर किक मिलती है और वे फटाफट ऑस्कर दे देते हैं.

इसी फॉर्मूले के तहत यहां से ‘गली बॉय’ भेज दी गई. हम इंतजार करते रहे कि ‘अपना टाइम आएगा.’ टाइम तो आया लेकिन फिल्म को ऑस्कर से वापस भेजने का. सितंबर में भेजी गई, दिसंबर में वापस आ गई. हमें ऐसा लगा कि हमारी तरफ से ही कमी रह गई, पर्याप्त गंदा नाला दिखाने में नाकाम रहे इसलिए जूरी को फिल्म की बदबू इम्प्रेस नहीं कर पाई.

ऑस्कर के विनर्स की लिस्ट आई तो मैंने अपने यहां 2019 में रिलीज हुई फिल्मों की लिस्ट पर नजर डाली. अचानक अपनी गलती का अहसास हुआ कि गली बॉय को ऑस्कर में भेजने वालों पर फर्जी लाल पीला हो रहा था. ‘आर्टिकल 15’ और गली बॉय के अलावा एक भी फिल्म ऐसी नहीं दिखी जिसे फिल्म के जानकार किसी शख्स को दिखाया जा सके.

पिछले साल सुपर 30, मणिकर्णिका, सांड की आंख जैसी बोरा भरकर बायोपिक रिलीज हुई, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर और ‘सत्य घटनाओं से प्रेरित’ पानीपत, बाटला हाउस, उरी जैसी फिल्में रिलीज हुईं लेकिन वे ऐसी हैं कि इंटरनेशनल जूरी के सामने दिखाने में शर्म आए. हम अपने देश के लोगों को भावनाओं में बहाकर सैकड़ों करोड़ रुपए तो कमा सकते हैं लेकिन कायदे का सिनेमा नहीं बना सकते.

निराश होने की जरूरत नहीं है. ये कोई आखिरी मौका नहीं है, अगली बार फिर ऑस्कर आएंगे. फिर से हम जंगली, कबीर सिंह, टोटल धमाल, कलंक, कमांडो 3 और दबंग 3 जैसी फिल्में भेज सकते हैं. बस कोशिश करें कि वह किसी ‘8 Mile’ जैसी किसी हॉलीवुड फिल्म की कॉपी न हो.

नोटः ये लेखक के निजी विचार हैं. ऑस्कर विनर्स की पूरी लिस्ट नीचे क्लिक करके देख सकते हैं.

Oscars 2020: किन फिल्मों और कलाकारों के नाम रहा सिनेमा की दुनिया का सबसे बड़ा अवॉर्ड, देखें पूरी लिस्ट

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