हमारी छोटी सी भूल बेटों को गलत रास्ता दिखा सकती है, एक मिनट के इस वीडियो से समझिए

हमारी एक छोटी सी भूल हमारे बेटों को ग़लत रास्ता दिखा सकती है. क्या है वो भूल ? TV9 भारतवर्ष ने इसे दिखाने की कोशिश की है. इसे देख कर  सोचिए कि कैसे हम अपने घर बदल सकते हैं.
ghar, हमारी छोटी सी भूल बेटों को गलत रास्ता दिखा सकती है, एक मिनट के इस वीडियो से समझिए

हमारे समाज में, हमारे घरों में  बेटे और बेटियों के बीच किस कदर भेद-भाव किया जाता है उसे समझाने की एक अदद कोशिश है ‘घर’. लगभग एक मिनट की इस शॉर्ट फिल्म के संवाद हमारे घरों की सच्चाई बयान करते हैं.

सदियों से चूल्हा-चौके तक सीमित बेटियां अब घर की दहलीज पार कर बाहर तो निकली हैं, लेकिन सोच पूरी तरह नहीं बदल पाई. चाहे घर संभालना हो या किचन का काम, ये बेटियों के लिए ही मुनासिब समझा जाता है. मानो बेटे ये काम कर ही नहीं सकते.

हमारी एक छोटी सी भूल हमारे बेटों को ग़लत रास्ता दिखा सकती है. क्या है वो भूल? TV9 भारतवर्ष ने इसे दिखाने की कोशिश की है. इसे देखकर सोचिए कि कैसे हम अपने घर बदल सकते हैं.

फिल्म के संवाद कुछ यूं है…

खाना बनाने की तैयारी कर रही माँ अपनी बेटी को आवाज लगाती है – नेहा , नेहा, नेहा, बेटा सात बजने वाले हैं. जा न जरा टमाटर काट दे न प्लीज. मुझे खाना बनाना है. सुन प्याज भी काट देना..

नेहा – जी मम्मी पर मेरा साइंस प्रोजेक्ट अभी इनकम्पलीट है….

माँ –  कोई बात नहीं बेटा पांच मिनट लगेगा, बाकी काम मैं खुद कर लूंगी.

पिता – ये तो राहुल भी कर सकता है

माँ – दरअसल इसे आता नहीं है न

इसके बाद बिटिया काम में लग जाती है. अंतिम दृश्य कुछ यूँ है कि नेहा प्याज-टमाटर काट रही है और उसका भाई मस्ती में उसे परेशान कर रहा है..

ज़रा सोचिए, यही राहुल बड़ा होकर क्या महिलाओं के प्रति वही राय नहीं रखेगा जो उसने अपने मां-बाप से सीखा है.

Related Posts