हैदराबाद के चाइनीज फूड हॉकर ने सोनू सूद के नाम पर रखा दुकान का नाम तो एक्टर ने मांग ली ट्रीट

हाल ही में सोनू सूद को यूनाइटेड नेशन्स द्वारा प्रतिष्ठित एसडीजी स्पेशल ह्यूमैनीटेरीयन एक्शन अवॉर्ड (SDG Special Humanitarian Action Award) से सम्मानित किया गया है. यह अवॉर्ड उनके द्वारा किए गए नेक काम के लिए मिला है.

बॉलीवुड अभिनेताा सोनू सूद

लॉकडाउन के दौरान अभिनेता सोनू सूद (Sonu Sood) लोगों के लिए मसीहा बनकर सामने आए. प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने से लेकर बच्चों के मुफ्त इलाज तक सोनू सूद ने कई लोगों की मदद की. यही वजह है कि लोगों के दिलों में आज उनके लिए खास सम्मान है.

कई लोग उन्हें अलग-अलग अंदाज में शुक्रिया कह रहे हैं. इसी कड़ी में हैदराबाद के एक चाइनीज फूड बेचने वाले हॉकर ने अपनी दुकान का नाम बदलकर सोनू सूद के नाम पर रख लिया है. जैसे ही सोनू सूद को इस बात का पता चला उन्होंने हॉकर से ट्रीट मांग ली.

दरअसल एक ट्विटर यूजर ने दुकानदार के साथ-साथ दुकान के मेन्यू की तस्वीर ट्विटर पर शेयर की थी. इस मेन्यू में सोनू सूद का फोटो लगा था. ट्वीट में यूजर ने लिखा, ” मिस्टर अनिल कुमार से मिलिए. उन्होंने अपनी दुकान से चीनी नाम हटाकर सोनू सूद का नाम रख दिया है. उनका कहना है कि उन्होंने कभी भगवान को नहीं देखा, लेकिन सच्चे भगवान को देखा है वो हैं सोनू सूद”

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सोनू सूद ने इस ट्वीट का जवाब भी दिया है. सोनू सूद ने कहा, क्या मुझे ट्रीट मिलेगी.

बता दें, हाल ही में सोनू सूद को यूनाइटेड नेशन्स द्वारा प्रतिष्ठित एसडीजी स्पेशल ह्यूमैनीटेरीयन एक्शन अवॉर्ड (SDG Special Humanitarian Action Award) से सम्मानित किया गया है. यह अवॉर्ड उनके द्वारा किए गए नेक काम के लिए मिला है.

सोमवार को आयोजित किए गए एक वर्चुअल समारोह के दौरान यूनाइटेड नेशन्स डेवलंपमेंट प्रोग्राम ने सोनू सूद को सम्मानित किया. इस खास सम्मान के बाद सोनू सूद ने कहा, ”मैंने बिना किसी उम्मीद के अपने देशवासियों के लिए वो किया जो मुझसे हो सका. हालांकि इस तरह से सम्मान मिलने से अच्छा लगता है.”

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ऐसे आया सोनू सूद के मन में प्रवासियों की मदद का ख्याल

अभिनेता के मन में प्रवासियों के लिए परिवहन की व्यवस्था करने का विचार तब आया, जब वह लॉकडाउन के दौरान कुछ दिनों तक प्रवासियों को भोजन के पैकेट बांट रहे थे. भोजन बांटने के दौरान वह बच्चों वाले एक परिवार से मिले, जो 10 दिनों के लिए भोजन चाहते थे, क्योंकि वे सभी मूल निवास स्थान बेंगलुरु के लिए निकले हुए थे, तब सूद ने उन्हें बताया कि वह परिवहन के लिए अनुमति प्राप्त करने की कोशिश करेंगे, ताकि उन्हें चल कर इतनी दूर न जाना पड़े.

हर दिन सैकड़ों लोगों को अपने घरों तक वापस भेजने की व्यवस्था करने में कामयाब रहे सोनू ने बताया था कि, “मैं उस समय 350 लोगों को भेजने का प्रबंधन कर सकता था. वह ट्रिगर पॉइंट था. मुझे एहसास हुआ कि मैं और अधिक लोगों को वापस भेज सकता हूं, जो परिवहन के अभाव में पैदल चलने की योजना बना रहे थे. उसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.”

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