KBC 12: करमवीर स्पेशल में मूक-बधिरों की ‘आवाज’ बने ज्ञानेन्द्र और मोनिका पुरोहित होंगे मेहमान

कौन बनेगा करोड़पति 12 के करमवीर स्पेशल एपिसोड में मूक-बधिरों की ‘आवाज’ बने ज्ञानेन्द्र पुरोहित और मोनिका पुरोहित मेहमान होंगे.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 2:05 am, Fri, 16 October 20
कौन बनेगा करोड़पति 12
कौन बनेगा करोड़पति 12

इच्छाशक्ति अगर मजबूत हो तो कहते है हर काम आसान हो जाता है. ऐसी ही कहानी है सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन का शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 12’ के करमवीर स्पेशल में आने वाले ज्ञानेन्द्र पुरोहित और उनकी पत्नी मोनिका पुरोहित की. जिन्होंने समाज के ऐसे बच्चो को अपनी आवाज दी, जो न तो मुंह से बोल सकते है और ना ही अपने कानों से सुन सकते है. इन लोगों का भविष्य के अंधकार को इन्होने प्रकाशमय कर दिया है.

पुरोहित दम्पति ने इन लोगों का हाथ थाम के समाज की मुख्यधारा में उन्हें शामिल किया. इंदौर में पुरोहित दम्पति मूक बधिर बच्चों की मदद के लिए आनंद सर्विस सोसाइटी नाम की एक संस्था चलाते हैं. इस संस्था की स्थापना 1997 में हुई. जिसका नाम श्री पुरोहित के भाई के नाम पर रखा गया. पुरोहित के भाई आनंद भी मूक-बधिर थे और ट्रेन में यात्रा के दौरान किसी ने उन्हें धक्का दे दिया. हादसे में उनकी मौत हो गई. पुरोहित को इस बात का मलाल था कि लोग उनके भाई को अक्सर चिढ़ाते थे. उन्होंने निश्चय किया कि अब वे भाई की तरह हजारों मूक-बधिर भाई-बहनों की मदद करेंगे.

उन्होंने न सिर्फ साइनिंग लेंग्वेज (सांकेतिक भाषा) सीखी और देश-विदेश के मूक-बधिरों पर अध्ययन किया. इस दौरान कई सवालों से उनका सामना हुआ, नए-नए विचार आए और उन्होंने मूक-बधिरों के जीवन की कठिनाइयों को दूर करने के बीड़ा उठाया और इस दिशा में कई कार्य किए जो माइल स्टोन बन गए.

इन कर्मवीरों की कहानी और उनके काम से प्रभावित होकर केबीसी 12 के मेगा होस्ट श्री अमिताभ बच्चन ने इस दंपति से इन बच्चों की मुश्किलों के बारे में जानना चाहा और यह भी पूछा कि ये बच्चे अपनी समस्याएं किस तरह बताते हैं.

श्रीमती मोनिका पुरोहित ने बताया, “कुछ बच्चों के साथ भयानक हादसे भी हुए हैं. यह जानकर हैरानी होती है कि ये बच्चे अपनी जिंदगी में इतने बुरे दौर से गुजर चुके हैं. लेकिन सच तो कड़वा होता है.” दोनों पति-पत्नी पूरी संवेदनशीलता के साथ इन बच्चों को इस मानसिक उथल-पुथल से बाहर निकलने और उन्हें न्याय दिलाने में मदद करते हैं. उनकी तरकीबें अनोखी हैं और वो अधिकारियों को भी इस मामले में संवेदनशीलता के साथ समझाते हैं कि वो बच्चा क्या कहने की कोशिश कर रहा है.

श्री बच्चन ने राष्ट्र के निर्माण में इस दंपति के नेक योगदान की सराहना की और इन कर्मवीरों से कोविड-19 महामारी के चलते लगाए गए लॉकडाउन के दौरान के अपने अनुभव बताने को कहा.

श्री ज्ञानेंद्र पुरोहित ने कहा, “जब लॉकडाउन की घोषणा हुई तो हमने महसूस किया कि हमारे देश के 70 लाख लोग मूक-बधिर हैं. हमें इस बात की चिंता थी कि यह सूचना उन तक कैसे पहुंचेगी. हमने तुरंत एक यूट्यूब चैनल बनाया और सांकेतिक भाषा के वीडियोज़ के जरिए लॉकडाउन के बारे में जानकारी देने की कोशिश की ताकि यह देश के सभी लोगों तक पहुंच सके.”

लॉकडाउन के दौरान आनंद सर्विस सोसाइटी की ओर से भी सहायता की गई. ज्ञानेंद्र बताते हैं, “इन वीडियोज़ को देखने के बाद हमें गुरुग्राम के एक मूक-बधिर व्यक्ति से एक वीडियो कॉल आया.उन्होंने तीन दिनों से खाना नहीं खाया था और कोविड-19 की स्थिति के कारण उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया गया था. हम उन तक पहुंचे और उन्हें राशन उपलब्ध कराया.”

सिर्फ इतना ही नहीं! जब लॉकडाउन जारी रहा तो बहुत से लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने लगे.इस दंपति ने इन सभी प्रवासियों से सांकेतिक भाषा में वीडियोज़ भेजने को कहा, जिन्हें वे आगे कुछ सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाते थे.

मध्य प्रदेश के ऐसे ही कुछ मूक बधिर बच्चे गुरुग्राम में फंसे हुए थे. अधिकारियों को उनकी तकलीफों के बारे में बताया गया जिससे इन बच्चों को मध्यप्रदेश में अपने घर सुरक्षित लौटने में मदद मिली. इस सफलता को देखते हुए आनंद सोसाइटी को देश के 22 राज्यों से मूक बधिर व्यक्तियों के कॉल आए, जिन्हें इस लॉकडाउन के दौरान मदद की जरूरत थी.

श्रीमती मोनिका पुरोहित ने भी जरूरतमंदों की मदद करने के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हमें काफी संघर्ष के बाद सफलता मिली, लेकिन हम इस पर डटे रहे और इससे हमें अनेक लोगों तक पहुंचने में मदद मिली. हमारी संस्था के बच्चे जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है, अब सरकारी नौकरियों में हैं, और वे उन लोगों के लिए प्रशिक्षक बन गए हैं जो सुन और बोल नहीं सकते”