The family man, The Family Man: किसी हीरो की नकल नहीं, ये है नौकरी, बीमारी और फैमिली से जूझता जासूस
The family man, The Family Man: किसी हीरो की नकल नहीं, ये है नौकरी, बीमारी और फैमिली से जूझता जासूस

The Family Man: किसी हीरो की नकल नहीं, ये है नौकरी, बीमारी और फैमिली से जूझता जासूस

सीरीज खत्म होने पर बस एक लाइन याद रह जाती है. 'उन्हें सिर्फ एक बार जीतना होता है और हमें हर एक बार, वो भी सही तरीके से.'
The family man, The Family Man: किसी हीरो की नकल नहीं, ये है नौकरी, बीमारी और फैमिली से जूझता जासूस

द फैमिली मैन. नाम से ही जाहिर है कि किसी घर गृहस्थी के बोझ में दबे इंसान की कहानी है. बस ट्रेलर ने लोगों को उलझा दिया. पता चला कि वो फैमिली वाला आदमी देश के लिए जासूसी भी करता है. आतंकी हमलों से भी निपटता है. सीरीज 20 सितंबर से अमेजन प्राइम पर आ गई. देखकर कुछ लोगों ने उसकी तुलना हॉलीवुड की अर्नाल्ड स्वॉर्जनेगर स्टारर ‘ट्रू लाइज़’ से की. कुछ लोगों को उसमें कमल हासन की ‘विश्वरूपम’ की झलक मिली.

असल में ये झलक ही थी. समानता ये है कि गृहस्थी वाला इंसान फैमिली लाइफ से अलग जासूस भी है. लेकिन आगे चीजें पूरी तरह से बदल जाती हैं. द फैमिली मैन का श्रीकांत तिवारी जासूस है, ड्यूटी के लिए समर्पित बंदा है. लेकिन अर्नाल्ड या कमल हासन के करेक्टर की तरह ‘ब्रूस ली’ नहीं है. टिपिकल फिल्मों की तरह ‘हीरो मटीरियल’ नहीं है. वो मुक्के मार-मारकर आतंकियों को इंटरोगेट नहीं करता.

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श्रीकांत तिवारी तीन लेवल पर आम आदमी लगता है.

1. सरकारी नौकरी में है. उसकी नौकरी पर हमेशा मुसीबत बनी रहती है. हर गलती पर बॉस बुलाकर झाड़ लगाता है. उसे हीरोगीरी के लिए ‘कुछ भी’ करने की छूट नहीं है. बल्कि उसको तमाम बंदिशों में रहकर नौकरी करनी है. TASC की नौकरी. आतंकी हमला होने से पहले उसका पता लगाने और नाकाम करने की नौकरी. हमला होने के बाद जिम्मेदारों का पता लगाने की नौकरी.

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2. उसकी फैमिली लाइफ है. उससे सबको शिकायत है, सबको उससे शिकायत है. उसे शिकायत है कि पूरा परिवार उसे लूज़र समझता है. परिवार की शिकायत है कि वो वक्त नहीं देता. पत्नी जॉब स्विच करने की प्रोसेस में कलीग से रात-रात बात करती है तो उसे लगता है कि ये धोखा दे रही है.

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3. श्रीकांत की खुद की लाइफ है. वो भी पूरी तरह से छीछालेदर मचाए हुए है. डॉक्टर ने उसे सिगरेट पीने, नॉनवेज खाने, अल्कोहल पीने, स्ट्रेस लेने से मना कर रखा है. लेकिन डॉक्टर को पता नहीं कि उसके स्ट्रेस का लेवल क्या है. जब हर दिन मर जाने का खतरा हो और घर वालों को इसका पता भी न हो तो स्ट्रेस कितना कम रह सकता है?

 

 

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ये सारी चीजें द फैमिली मैन के मुख्य किरदार को असल में फैमिली मैन बनाती हैं. अब आते हैं सीरीज की स्टोरी लाइन पर. इसमें थोड़े से स्पॉइलर हो सकते हैं. अपने रिस्क पर पढ़ें. फिल्म में दिखाई गई घटनाएं रोज आती अखबार की सुर्खियों पर बेस्ड हैं. उसी हिसाब से इसके संवाद गढ़े गए हैं. कुछ घटनाएं और संवाद याद रखने लायक हैं:

1. श्रीकांत अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहा है. रास्ते में एक बाइक सवार उसके साइड व्यू मिरर पर टक्कर मार देता है. उसके मुंह से गाली निकलती है लेकिन वो रोक लेता है. उसका बच्चा जरूर गाली देता है. बाप अपने बच्चों को गाली और मारपीट देखने-सीखने से बचाना चाहता है. अगले एपिसोड के एक सीन में ऐसे एक ही एक आदमी को वो पीटता है.

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2. मुंबई का एक लोकल थानेदार जाधव एक पूरी यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को ‘एंटी नेशनल’ कहता है. जरा सी बात पर वो सबको उठाकर बंद कर देना चाहता है. श्रीकांत तिवारी उसके लिए कहता है ‘जाधव त्रिशूल लेकर घूम रहा है एंटी नेशनल का शिकार करने के लिए.’

3. मॉब लिंचिंग वाला सीन. ये सच्चाई के काफी करीब लगता है. मारने से पहले की भाषणबाजी और आफ्टरमैथ, सब कुछ आंखों के सामने रोज के अखबार नचा देते हैं.

4. तीन स्टूडेंट्स को गलती से मार देने के बाद श्रीकांत तिवारी का गिल्ट. वो सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेता है भले नौकरी चली जाए.

5. कश्मीर में मिलिटैंट्स, जनता और आर्मी के बीच का रिश्ता.

6. पाकिस्तान में जब एक आतंक का आका अपने साथी को समझा रहा होता है कि हम ऐसा हमला करेंगे कि हिंदुस्तान पाकिस्तान पर हमला करने को मजबूर हो जाए. उसी उथल पुथल में हम तख्तापलट कर देंगे. उस सीन में पाकिस्तान के मौजूदा हालात दिखाई देते हैं.

और तलपड़े का आतंकियों के बारे में तिवारी को दिया हुआ ज्ञान, जो उसे याद रह जाता है. ‘उन्हें सिर्फ एक बार जीतना होता है, और हमें हर एक बार वो भी सही तरीके से.’

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