The Family Man, The Family Man Review: देशभक्ति का शोर मचाए बगैर देशभक्त बना जा सकता है
The Family Man, The Family Man Review: देशभक्ति का शोर मचाए बगैर देशभक्त बना जा सकता है

The Family Man Review: देशभक्ति का शोर मचाए बगैर देशभक्त बना जा सकता है

इस सीरीज में आपको हिंदी बेल्ट वाले सारे कलाकार अपने आस-पड़ोस के लोगों जैसे नज़र आते हैं. चाहे वो श्रीकांत तिवारी की भूमिका में मनोज बाजपेयी हों या JK तलपडे की भूमिका में शारिब हाशमी.
The Family Man, The Family Man Review: देशभक्ति का शोर मचाए बगैर देशभक्त बना जा सकता है

बिना देशभक्ति का शोर मचाए, कैसे एक आम आदमी चुपचाप देश के लिए काम कर रहा होता है, इसी का एक पर्याय है ‘द फैमिली मैन’. साथ ही ये एक उदाहरण है उन फिल्म निर्माताओं के लिए जिन्हें लगता है कि राष्ट्रप्रेम, देश भक्ति, जय हिंद, वंदे मातरम, जय श्री राम जैसे शब्दों के इस्तेमाल के बिना देश के हित में काम करने वाले किरदारों को पर्दे पर नहीं उतारा जा सकता. इस सीरीज में तकनीकी तौर पर भी कई ऐसे प्रयोग किए गए हैं, जो बॉलीवुड में अमूमन देखने को नहीं मिलते.

‘द फैमिली मैन’ सीरीज की कहानी किरदार श्रीकांत तिवारी के इर्द-गिर्द घूमती है. श्रीकांत तिवारी एक इंटेलिजेंस एजेंसी के लिए काम करते हैं, जिसका उद्देश्य है देश में होने वाली आतंकी घटनाओं को रोकना.

The Family Man, The Family Man Review: देशभक्ति का शोर मचाए बगैर देशभक्त बना जा सकता है

श्रीकांत तिवारी की भूमिका निभा रहे हैं मनोज बाजपेयी. एक तरफ तिवारी देश के लिए लड़ते दिखते हैं तो दूसरी ओर किसी आम पिता-पति की तरह परिवार संजोने की कोशिश में लगा ‘फैमिली मैन’ दिखाई देते हैं.

किसी किरदार में दर्शक खुद को ढूंढ ले या अपने गली-कूचे के किसी व्यक्ति को ढूंढने लगे, इससे अच्छी बात किसी फिल्मकार या कलाकार के लिए क्या हो सकती है!

इस सीरीज में आपको हिंदी बेल्ट वाले सारे कलाकार अपने आस-पड़ोस के लोगों जैसे नज़र आते हैं. चाहे वो श्रीकांत तिवारी की भूमिका में मनोज बाजपेयी हों या JK तलपडे की भूमिका में शारिब हाशमी.

किरदार और सच्चे लगें इस बात का खासा ध्यान रखा गया है. मलयाली और कश्मीरी किरदारों को कश्मीरी-मलयाली मूल के कलाकारों के द्वारा निभाया गया है. इससे मलयाली के मुंह से मलयालम और कश्मीरी के मुंह से हिंदी और सुंदर लगने लगती है.

बाल कलाकारों की भूमिका बहुत अच्छी है. ये आपको याद दिलाते रहेंगे कि आप दुनियाभर में चाहे कितने भी झंडे गाड़ रहे हों, पत्नी और बच्चों के सामने आप सिर्फ एक पिता और पति होते हैं. और जब उसके कंधों पर देश को बचाने की जिम्मेदारी आ जाए तो वो आप बन जाते है, श्रीकांत तिवारी  यानी ‘द फैमिली मैन’.

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शारिब हाशमी भी अपने किरदार में समाए हुए दिखाई देते हैं. हालांकि पांचवें एपिसोड के बाद हाशमी का रोल काफी कम है. जिसकी कमी आपको खल सकती है. वहीं ISIS आतंकी का रोल निभा रहे नीरज माधव आपको अपने अभिनय से काफी प्रभावित करते दिखते देंगे. माधव का किरदार कभी बहुत मासूम, कभी प्रेम में पागल तो कभी एक खूंखार दरिंदा नज़र आएगा.

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शुरूआत से ही स्क्रीनप्ले थोड़ा बिखरा बिखरा लगता है. और यह सिलसिला 5वें एपिसोड तक जारी रहता है. हालांकि मनोज वाजपेई की एक्टिंग दर्शकों को आगे के एपिसोड देखने के लिए प्रेरित जरूर करती है.

सीरीज में कई जगह जबरदस्ती घुसाया हुआ एक्शन मिलता है, दूसरे एपिसोड के ऑफिस वाले सीन में कंपनी के CEO की मदद से तीनों संदिग्धों को केबिन में बुलाकर पकड़ा जा सकता था लेकिन एक्शन ज़रूरी था क्योंकि सबकुछ इतना सिंपल होता तो आपको मनोज बाजपेयी की स्कूटी पर कमाल की एक्टिंग देखने को नहीं मिलती. और इसी के लिए मनोज बाजपाई जाने जाते हैं.

निराश मत होइए देशभक्ति यहां भी पीछा नहीं छोड़ती. दूसरा एपिसोड खत्म होते-होते राष्ट्रगान और कश्मीर से जुड़े मुद्दे दर्शकों को देखने को मिलते हैं.

‘बीफ के शक में गौ भक्तों ने दो मुस्लिमों को पीट पीट कर मार डाला’

अभी आप कोई न्यूज़ नहीं पढ़ रहे आप अभी उस सीन के बारे में पढ़ रहे हैं जो दर्शाता है कि समाज में लिंचिंग किस कदर भीतर तक घुस चुकी है.

तीसरे एपिसोड में आपको बहुत कुछ ऐसा देखने को मिलता है, जो आजकल आप अख़बारों में पढ़ते हैं. किसी को भी राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट दे देना. पुलिस के द्वारा किसी को भी बिना वारंट के उठाकर ले जाना. नेताओं के भड़काऊ बयान और बीफ के शक में किसी को भी पीट-पीटकर मार देना. तीसरा एपिसोड समाज का वही आइना है….. और फैमिली मैन, फैमली मैन लड़ रहा है देश को बचाने के लिए, परिवार को बचाने के लिए.

देखने को मिलेंगे नए प्रयोग

सीरिज के डायरेक्टर राज निदिमोरु और कृष्ण डीके ने तकनीकी तौर पर इस फिल्म सीरीज में कैमरे के साथ बहुत ही अच्छे और नए प्रयोग करवाए हैं, आपको ‘द फैमिली मैन’ में 5 मिनट और 12 मिनट के सिंगल शॉट देखने को मिलेंगे.  सिंगल शॉट यानी  बिना कैमरा रोके लगातार 12 मिनट से ज्यादा की शूटिंग. यानी एक गलती और पूरी मेहनत खराब!

बैकग्राउंड म्यूज़िक औसत है लेकिन हर एपिसोड के बाद में लगाए गए गाने आपको बहुत पसंद आएंगे इनमें से कई गानों को आप लूप में भी सुनना चाहेंगे.

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पूरी सीरीज को इस तरह से बनाया गया है कि आप इसमें कॉमेडी भी देखेंगे, सीरियस मिशन भी देखेंगे और रिश्ते को बचाने में लगी दो जानों की ऊहापोह भी.  शुरुआत के 5 एपिसोड कॉमेडी और एक आम आदमी, रिश्तों को लेकर क्या समझ रखता है, ये ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. और बाकी के 5 एपिसोड में आपको श्रीकांत तिवारी यानी मनोज वाजपेई मिशन को पूरा करने की जद्दोजहद में दिखाई देंगे.

अगर आपको हैप्पी एंडिंग पसंद है तो आखरी एपिसोड आपको निराश कर सकता है. आखरी एपिसोड काफी बिखरा हुआ है. सब कुछ सभी किरदारों से करा लेने के चक्कर में कुछ भी होता हुआ नहीं दिखा. अंत और बेहतर हो सकता था.

‘द फैमिली मैन’ जैसी सीरीज़ बॉलीवुड को एक कदम और आगे लेकर जा रही है. इस तरह की सीरीज़ बॉलीवुड में बनना शुरू ही हुई हैं इस लिहाज से आप द फैमिली मैन को देख सकते हैं और फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ा सकते हैं जो इस तरह की लीक से हटकर फिल्में और सीरीज़ बनाने के बारे में सोच रहे हैं.

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