छह महीने से बंद हैं सिनेमाघर, फिल्म इंडस्ट्री से भी नहीं मिला समर्थन, अब MAOI ने सरकार से की अपील

14 मार्च से देशभर के सिनेमाघर (Cinema Hall) बंद हैं. एग्जीबिटर्स (Theatre Exhibitors) का कहना है कि वे अब बहुत ही लाचार महसूस कर रहे हैं.
theatres still shut after six month of lockdown, छह महीने से बंद हैं सिनेमाघर, फिल्म इंडस्ट्री से भी नहीं मिला समर्थन, अब MAOI ने सरकार से की अपील

कोरोनावायरस (Coronavirus) के कारण लोगों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ा रहा है. किसी की नौकरी गई, तो कहीं लॉकडाउन के कारण काम ठप पड़ गया. ऐसे में लोगों के पास निराशा के सिवा कुछ नहीं है. देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही सिनेमाघर बंद हैं. फिल्म निर्माता तो अपनी फिल्में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज कर पैसा कमा ले रहे हैं, लेकिन उन थिएटर मालिकों और थिएटर में काम करने वालों का क्या, जिनकी रोजी-रोटी ही थिएटर में फिल्म के प्रदर्शन से चलती थी.

भले ही देश में धीरे-धीरे चीजें पटरी पर आ रही हैं, लेकिन थिएटर अभी भी बंद पड़े हैं. छह महीने बाद भी थिएटर बंद हैं और अब नौबत यहां तक आ गई है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे कर्मचारी सुसाइड जैसा कदम उठा रहे हैं. हैदराबाद के एक मल्टिप्लेक्स के कर्मचारी ने आर्थिक तंगी के चलते अपनी जान दे दी. सिनेमाघर वालों को कहीं से भी समर्थन नहीं मिल रहा है, जिसके चलते वे निराश के साथ-साथ नाराज भी हैं.

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कर्मचारी के सुसाइड के बाद सरकार को लिखी चिट्ठी

इस बीच मल्टिप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर सिनेमाघरों को फिर से खोलने की अनुमति देने की अपील की है. इस चिट्ठी में कहा गया है कि पूरे भारत में एग्जीबिशन और डिस्ट्रीब्यूशन में हर महीने 1,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. एसोसिएशन ने अपने बयान में कोरोनावायरस प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की बात भी कही है. फिलहाल, देखना होगा कि आखिर सरकार इस पर क्या फैसला लेती है.

ऐसा लग रहा है जैसे 2010 में पहुंच गए

14 मार्च से देशभर के सिनेमाघर बंद हैं. एग्जीबिटर्स का कहना है कि वे अब बहुत ही लाचार महसूस कर रहे हैं. मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी सिनेमा एग्जीबिटर्स फेडरेशन के सदस्य आशुतोष अग्रवाल का कहना है कि मेरी सारी सेविंग खत्म हो गई हैं. ऐसा लग रहा है जैसे हम साल 2010 में पहुंच गए है. थोड़े से पैसे जो बचे हैं, उससे जब सिनेमाघर खुल जाएंगे तब कालीन साफ ​​करने होंगे, बैटरी बदलनी होगी और फिर सभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन करने के लिए अतिरिक्त खर्च करना होगा.

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इंडस्ट्री से समर्थन न मिलने पर नाराज

राजस्थान के एग्जीबिटर राज बंसल का कहना है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ कई बार बैठक हो चुकी हैं, लेकिन उनके पास अभी तक सिनेमाघर के वापस खुलने की को तारीख नहीं है. राज बंसल ने कहा कि अगर प्रार्थना करने की जगह खुल सकती हैं, तो सिनेमाघर क्यों नहीं? हम बहुत अच्छे से भीड़ को मैनेज कर सकते हैं. इंडस्ट्री से समर्थन न मिलने पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री ने हमें कभी सपोर्ट नहीं किया और न कभी करेंगे. हम सिर्फ खुद पर निर्भर हैं लाखों लोगों का भरण-पोषण दांव पर लगा है. कम से कम इंसानियत के नाते ही सिनेमाघरों को खोल देना चाहिए.

‘सूर्यवंशी’ और ’83’ के जरिए दर्शकों की वापसी की उम्मीद

इसी तरह देश के दूसरे राज्यों के एग्जीबिटर्स का भी कहना है. हर कोई सरकार से अपील कर रहा है कि फिर से सिनेमाघरों को खुलने की अनुमति दी जाए, ताकि सिनेमाघर में काम करने वाले कर्मचारियों की रोजी-रोटी चल सकते. रोहित शेटरी की फिल्म ‘सूर्यवंशी’ और रणवीर सिंह की फिल्म ’83’ से एग्जीबिटर्स को काफी उम्मीदें हैं. एग्जीबिटर्स का मानना है कि अगर ये दोनों ही फिल्में सिनेमाघर में रिलीज होती हैं, तो दर्शक फिर से सिनेमाघरों का रुख करेंगे और लाखों लोगों की नौकरी बच जाएगी. एग्जीबिटर्स का ये भी कहना है कि अगर अगले दो महीने में सिनेमाघर नहीं खुले तो ये दोनों फिल्में भी ओटीटी प्लेटफॉर्म का रास्ता चुनेंगी.

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