उस्ताद नुसरत के इन 10 गानों को नहीं भूलेगा जमाना, पिता के श्रद्धांजलि कार्यक्रम से की थी शुरुआत

बॉलीवुड के लिए उन्होंने कई गाने गाए हैं, जिनमें आफरीन आफरीन, दूल्हे का सेहरा, कोई जाने कोई न जाने जैसे कई गाने शामिल हैं.
नुसरत फतेह अली, उस्ताद नुसरत के इन 10 गानों को नहीं भूलेगा जमाना, पिता के श्रद्धांजलि कार्यक्रम से की थी शुरुआत

कव्वाली को देश-विदेश में मशहूर करने वाले उस्ताद नुसरत फतेह अली खान का आज जन्मदिन है. पाकिस्तान के फैसलाबाद में जन्मे नुसरत फतेह अली खान की कव्वालियों को लोग आज भी बहुत पसंद करते हैं. इसी का नतीजा है कि बॉलीवुड की फिल्मों में उनके गानों को रिमेक करके इस्तेमाल किया जाता है.

सूफी सिंगर नुसरत फतेह अली खान को शहंशाह-ए-कव्वाली भी कहा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि कई सालों से उनका परिवार कव्वाली गाता आ रहा है. नुसरत फतेह अली खान ने पहली बार कव्वाली तब गायी थी जब उनके पिता का देहांत हुआ था. वे केवल 16 के थे. पिता के लिए आयोजित किए गए श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उन्होंने पहली बार कव्वाली गाई थी.

क्या बूढ़े, क्या बच्चे, जब भी कोई नुसरत फतेह अली खान की आवाज को सुनता, वह मंत्रमुग्ध हो जाता है. उनकी आवाज में जो मिठास और करारा पन था वो शायद ही किसी और गायक के अंदर हो.

नुसरत फतेह अली खान को केवल पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि भारत में भी काफी पसंद किया जाता है. बॉलीवुड के लिए उन्होंने कई गाने गाए हैं, जिनमें आफरीन आफरीन, दूल्हे का सेहरा, कोई जाने कोई न जाने जैसे कई गाने शामिल हैं. संगीत का उम्दा प्रयोग कर जब नुसरत साहब कव्वाली गाते थे तो वह समा ही कुछ और होता था.

साल 1997 में यह सूफी सिंगर दुनिया को अलविदा कह गया था, लेकिन आज भी उनके गानों को सुनकर लोग झूम उठते हैं.

1. सानू इक पल चैन न आवे

2. कीवें मुखरे तून नाजरान हटावन

3. नित् खैर मंगा सोहनिया मैं तेरी

4. अल्लाह हू…

5. अखियां उड़ीक दियां

6. सुन चरखे दी मिठी-मिठी कूक

7. ये जो हल्का-हल्का सुरूर है

8. मेरा पिया घर आया

9. कोई जाने कोई न जाने

10. दम मस्त कलंदर

 

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