नहीं रहे संगीतकार खय्याम साहब, मुंबई अस्पताल में हुई मौत

खय्याम साहब ने आखिरी खत, कभी-कभी, त्रिशूल, नूरी, बाजार, उमराव जान और यात्रा जैसी फिल्मों में अपने संगीत का जादू चलाया.

भारतीय सिनेमा के दिग्गज संगीतकार खय्याम ने मुंबई के सुजॉय अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनकी तबीयत पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रही थी. फेफड़ों में इंफेक्शन की वजह से उनका इलाज चल रहा था.

खय्याम साहब का पूरा नाम मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी है. 18 फरवरी 1927 को पंजाब के जालंधर जिले के नवाब शहर में जन्मे खय्याम ने 92 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया.

खय्याम साहब ने लुधियाना में 1943 में अपने म्यूजिक करियर की शुरुआत में की थी, उस दौरान उनकी उम्र 17 साल थी. 1953 में फिल्म ‘फुटपाथ’ से उन्होंने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की. 1961 में आई फिल्म ‘शोला और शबनम’ में उन्होंने संगीत दिया और पहचान हासिल की. इसके बाद खय्याम साहब ने आखिरी खत, कभी-कभी, त्रिशूल, नूरी, बाजार, उमराव जान और यात्रा जैसी फिल्मों में अपने संगीत का जादू चलाया.

बेहतरीन काम के लिए खय्याम को 2007 में संगीत नाटक एकेडमी अवॉर्ड और साल साल 2011 में पद्म भूषण जैसे सम्मानों से नवाजा गया. फिल्म कभी-कभी और उमराव जान के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

इतना ही नहीं बॉलीवुड में ख्याति कमाने से पहले खय्याम ने तीन साल भारतीय सेना में सिपाही के रूप में काम भी किया.