जब अमिताभ ने चुनाव लड़कर तोड़े कई रिकॉर्ड और आहत होकर छोड़ दी राजनीति

अमिताभ बच्चन लंबे समय तक दिलों पर राज करने वाले अभिनेता के अलावा नेता भी रह चुके हैं, जानिए उनके पॉलिटिकल करियर के बारे में.

अमिताभ बच्चन 11 अक्टूबर को पूरा देश सेलिब्रेट करता है. उनके फैन्स गिफ्ट भेजते हैं. वे अब 77 साल के हो गए हैं, उनके फैन्स ने उनके घर के सामने 77 बनाकर अपना प्यार पहुंचाया. इस उम्र में भी वे फिल्मों में न केवल पूरी तरह से एक्टिव हैं बल्कि पिछले साल ठग्स ऑफ हिंदोस्तान फिल्म में नामुमकिन से दिखने वाले एक्शन सीन भी किए.

अभिनेता अमिताभ की पहचान छोटे से समय के लिए नेता के रूप में भी रही है. उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा रिकॉर्डतोड़ जीत दर्ज कर संसद पहुंचे. तीन साल में राजनीति से ऊबकर संसद से इस्तीफा देकर फुलटाइम फिल्मों में लौट गए. उस छोटे से पॉलिटिकल करियर से जुड़े कुछ किस्से हैं जो काफी दिलचस्प हैं.

Amitabh Bachchan, जब अमिताभ ने चुनाव लड़कर तोड़े कई रिकॉर्ड और आहत होकर छोड़ दी राजनीति

नामांकन से एक दिन पहले प्रत्याशी घोषित

1984 के आम चुनाव आ चुके थे. अमिताभ बच्चन फिल्मी दुनिया के चमकते सितारे थे. शायद उनकी फिल्मों से ही थोड़ा सस्पेंस और थ्रिल कांग्रेस ने उधार ले लिया था. नामांकन का दिन आने वाला था और कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले थे. किसी को नहीं पता था कि कांग्रेस इलाहाबाद सीट से किसे टिकट दे रही है. लोकदल के टिकट से हेमवती नंदन बहुगुणा ताल ठोंक चुके थे. राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी बहुगुणा को इस सीट पर हराना लगभग नामुमकिन था.

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अमिताभ की दोस्ती देश के सबसे बड़े राजनैतिक घराने यानी गांधी परिवार के चिराग राजीव गांधी से थी. नामांकन से एक दिन पहले कांग्रेस ने ऐलान किया कि वो अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद से चुनाव लड़ने के लिए उतारेगी. इलाहाबाद की फिज़ा इस ऐलान के बाद बदल गई, खलबली मच गई. अमिताभ ने नामांकन भरा और नामांकन के अगले दिन रोडशो भी हुआ. रोडशो अपने तय समय से चार घंटे देरी से शुरू हुआ, लेकिन जनता का उत्साह देखकर कांग्रेस को अंदाजा हो गया कि उन्होंने सही प्रत्याशी चुना है.

‘विजयी भव’ का आशीर्वाद और टूटे रिकॉर्ड

नामांकन भरने के बाद प्रचार-प्रसार शुरू हो गया. किस्से यहां तक मशहूर हैं कि अमिताभ बच्चन के रोड शो में उनकी गाड़ी के आगे लड़कियां अपना दुपट्टा फैला देती थीं. इसी माहौल में एक दिन हेमवती नंदन बहुगुणा और अमिताभ बच्चन का रोडशो आमने सामने आ गए. अमिताभ बच्चन अपनी गाड़ी से उतरकर बहुगुणा के पास गए और उनके पैर छुए. कहते हैं कि बहुगुणा ने उन्हें विजयी होने का आशीर्वाद दिया.

Amitabh Bachchan, जब अमिताभ ने चुनाव लड़कर तोड़े कई रिकॉर्ड और आहत होकर छोड़ दी राजनीति

वो आशीर्वाद खूब काम कर गया. अमिताभ बच्चन रिकॉर्ड मतों से जीते और बहुगुणा के हिस्से हार आई. यही नहीं, इलाहाबाद में मतदान का भी रिकॉर्ड टूटा था. 57.17 फीसदी मतदान उस चुनाव में हुआ था जिसमें से 68.21 फीसदी वोट अमिताभ को मिले थे. दिलचस्प ये रहा कि वोटों की गिनती में लगभग चार हजार वोट रद्द हो गए थे क्योंकि उन पर मोहर के बजाय लिप्सटिक के निशान बने हुए थे.  उसके पहले कभी इलाहाबाद में इतने बड़े पैमाने पर वोटिंग नहीं हुई थी. इसके पीछे अमिताभ का स्टार चेहरा था.

मोहभंग

चुनाव जीतकर अमिताभ संसद में तो पहुंच गए लेकिन वो गली उन्हें ज्यादा रास नहीं आई. इलाहाबाद की जनता ने जिन उम्मीदों के साथ अमिताभ को संसद भेजा था वो पूरी नहीं हुईं. अमिताभ और उनके भाई अजिताभ का नाम बोफोर्स तोप घोटाले में आया जिससे उनकी छवि को काफी नुकसान हुआ. इससे आहत अमिताभ ने तीन साल बाद 1987  में संसद से इस्तीफा दे दिया और राजनीति छोड़ दी. हालांकि बाद में वो इस केस से बाइज्जत बरी हुए और कहा गया कि इसमें उनका नाम साजिश के तहत जोड़ा गया था. लेकिन संसद छोड़कर वे इलाहाबाद की जनता के मन से उतर गए जिसने बड़ी उम्मीदों से उन्हें सांसद बनाया था.