Video: राहुल गांधी के ‘महागठबंधन वॉट्सऐप ग्रुप’ की चैट वायरल, देवगौड़ा के मैसेज पर भड़कीं मायावती

जल्‍दी से महागठबंधन नेताओं को एकजुट करने के लिए राहुल गांधी ने एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया. इस ग्रुप में मायावती, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी ने जो मैसेज लिखे, वो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं.

नई दिल्‍ली: 2019 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को टक्‍कर देने के लिए कांग्रेस लगातार क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने में जुटी है. चुनाव का पहला चरण 11 अप्रैल से शुरू हो रहा है. नतीजे 23 मई को घोषित कर दिए जाएंगे. मतलब महागठबंधन को एकजुट करने के लिए अब ज्‍यादा नहीं बचा. समय की कमी के चलते कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी को एक आइडिया आया और उन्‍होंने बिना देरी किए वॉट्सऐप ग्रुप बना डाला.

राहुल गांधी ने ग्रुप बनाते ही पहला मैसेज डाला- ”ये हमारा महागठबंधन ऑफिशियल ग्रुप है, सभी विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को एड किया है, अगर कोई छूट गया है तो प्‍लीज ऐड”. यहां तक कहानी एकदम ठीक-ठाक चल रही थी, लेकिन अचानक ट्विस्‍ट आ गया.

राहुल गांधी का मैसेज पढ़ते ही एचडी कुमारस्‍वामी ने पिता एचडी देवगौड़ा को ग्रुप में ऐड कर दिया. ऐड करने के बाद एचडी कुमारस्‍वामी ने पहला मैसेज डाला- ”डैड ये ग्रुप हमने इसलिए बनाया है, ताकि आपको प्रधानमंत्री बनाने में मदद मिल सके.”

कुमारस्‍वामी का यह मैसेज पढ़ने के बाद मायावती भड़क गईं. बसपा सुप्रीमो ने ग्रुप में मैसेज लिखा, ”माननीय देवगौड़ा जी की हम इज्‍जत करते हैं, लेकिन उन्‍हें प्रधानमंत्री नहीं सकते.”

मायावती के बाद अखिलेश यादव समेत अन्‍य नेताओं के भी मैसेज आए, लेकिन ट्रेजडी यह रही कि महागठबंधन के सभी नेताओं के वॉट्सऐप ग्रुप मैसेज वायरल हो गए. हमारे क्रिएटिव सूत्र के मुताबिक, इस वीडियो का किसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है.

क्रिएटिव सूत्र का दावा यह भी है कि महागठबंधन वॉट्सऐप ग्रुप पर राहुल गांधी, मायावती, कुमारस्‍वामी और अखिलेश यादव के जो मैसेज वायरल हो रहे हैं, वे 100 प्रतिशत से भी ज्‍यादा फर्जी हैं.

सबसे महत्‍वपूर्ण बात जो हमारे बेहद भरोसेमंद क्रिएटिव सूत्र ने बताई है, वो यह है कि इस वॉट्सऐप ग्रुप को किसी पार्टी को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं बनाया गया है, यह सिर्फ और सिर्फ चुनावी चुटकुला है, लेकिन आप इसे केवल चुटकुला न माने, क्‍योंकि यह टेक्‍नोलॉजी से लैस क्रिएिटिवटी है. इसे किसने बनाया, ये हमारे क्रिएटिव सूत्र पता लगा तो रहे हैं, पर सच पूछें तो पता करने का मन बिल्‍कुल भी नहीं है.