गुजरात के गांव में दलित दूल्‍हा चढ़ा घोड़ी, अगड़ी जातियों ने किया पूरे समुदाय का बहिष्‍कार

पुलिस ने ऊंची जाति से आने वाले पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

नई दिल्‍ली: गुजरात के एक गांव में दलित युवक का अपनी शादी में घोड़ी चढ़ना अगड़ी जातियों को अच्‍छा नहीं लगा. आरोप है कि मेहसाणा जिले में, ऊंची जातियों ने युवक के पूरे समुदाय का बहिष्‍कार कर दिया है. स्‍थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दूल्‍हे के पिता ने गांव के सरपंच और उप-सरपंच समेत अगड़ी जातियों के 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. पुलिस ने भारतीय दंड संहिता और एससी/एसटी एक्‍ट के तहत केस दर्ज कर लिया है.

क्‍या है मामला?

मजदूरी कर गुजर-बसर करने वाले मनुभाई परमार (50) की शिकायत के मुताबिक, उसके बड़े बेटे मेहुल (24) की 7 मई को शादी हुई थी. बारात गांव से निकली तो दूल्‍हा घोड़ी पर चढ़ा. FIR के मुताबिक, अगले दिन गांव के मंदिर में सरपंच विजु ठाकोर और उप-सरपंच बलदेव ठाकोर ने ‘हरिजनों’ को छोड़कर पूरे गांव को पंचायत में इकट्ठा होने को कहा. शिकायत के अनुसार, तीन दलित उस पंचायत के गवाह थे. उन्‍होंने बताया कि अगड़ी जातियों के लोगों ने कहा कि वे मेहुल की बारात से ‘परेशान थे क्‍योंकि उन्‍हें लगा कि गांव के हरिजनों को ”अपनी सीमाएं तोड़ दीं.”

FIR के मुताबिक, सरपंच विजु, उप-सरपंच बलदेव, भोपा ठाकोर, मनु बरोट और गाभा ठाकोर ने दलितों का बायकॉट करने को कहा. कथित तौर पर यह तय हुआ कि कोई भी दलितों को खाना या काम नहीं देगा और उन्‍हें गाड़ियों में नहीं बैठाएगा. शिकायत के मुताबिक, यह भी तय हुआ कि जो यह नियम तोड़ेगा, उसे न सिर्फ 5,000 रुपये का जुर्माना देना होगा बल्कि गांव से भी निकाल दिया जाएगा. FIR में कहा गया है कि अगले दिन एक दलित महिला को दुकान से आटा नहीं मिला औद एक अन्‍य महिला को सामान बेचने से इनकार कर दिा गया.

परमार के हवाले से PTI ने लिखा है, “कुछ गांववालों ने मुझसे बारात न निकलवाने के लिए कहा था. किसी ने हमें सुबह चाय बनाने के लिए दूध तक नहीं दिया.” मेहसाणा के एसपी निलेश जजाड़‍िया ने कहा, ”एक एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पांचों आरोपी जल्‍द पकड़े जाएंगे.”

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