जान बचाने को चौथी मंजिल से कूद गए, सूरत अग्निकांड के पीड़‍ितों ने बयां किया खौफनाक मंजर

सूरत का कोचिंग सेंटर शुक्रवार को श्मशान में तब्दील हो गया. एक टीचर समेत 22 बच्चों की तक्षशिला बिल्डिंग आग हादसे में जान चली गई.

सूरत अग्निकांड में एक टीचर समेत 22 लोगों की मौत हो चुकी है. यह हादसा इतना दर्दनाक था कि बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए आग की लपटों में कैद तक्षशिला आर्केड बिल्डिंग की चौथी मंजिल से ही कूदना पड़ा. कई बच्चों को आग ने अपनी चपेट में लिया तो कुछ बिल्डिंग से कूदने के कारण घायल हुए.

इस हादसे में घायल हुए 17 वर्षीय रुशित वेकरिया ने बताया कि जब आग लगी वे वहीं मौजूद थे. टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, एसी से निकल रहे धुएं को देख सब डर गए थे. रुशित को सिर और हाथ में चोट आई है. डॉक्टर्स के मुताबिक रुशित को कई टांके आए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, रुशित ने कहा, “हमारे टीचर ने कहा कि ये धुआं पेपर जलाए जाने का है जो कि नीचे से आ रहे है, लेकिन जब यह बढ़ता चला गया तो हम अपनी सेफ्टी के लिए आखिरी कमरे की तरफ भागे. इसके बाद हर जगह धुआं-धुआं हो गया था, जिसके कारण सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और फिर हमने खिड़की के शीशे तोड़ दिए.”

इसके बाद रुशित ने बताया, “हमने नीचे फायर ब्रिग्रेड के लोगों को देखा और लोग उनसे कह रहे थे कि कूद जाओ, लेकिन उनके पास कोई नेट नहीं था, जिससे वे हमें कूदने पर बचा सकें. मैंने सोचा कि अगर मैं यहां धुएं में रहा तो मर जाऊंगा. खैर मैंने चांस लिया और तीसरी मंजिल से कूद गया. कूदने के बाद सिर्फ दर्द महसूस हुआ, मैं बेहोश हो गया और जब होश आया तो खुद को अस्पताल में पाया.”

बिल्डिंग से कूदने वालों में से एक उर्मिला पटेल भी थीं, जिनका इलाज पीपी सावनी अस्पताल में चल रहा है. 15 वर्षीय उर्मिला ने घटना के बारे में बात करते हुए एचटी से कहा, “हम चौथी मंजिल पर थे. अचानक हर जगह धुआं-धुआं हो गया, जिसके कारण हमें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. हम मदद के लिए चिल्लाए. मैंने अपनी मां को आवाज लगाई और वहां से निकलने के लिए सीढ़ियों की तरफ भागे, लेकिन वहां आग फैली हुई थी.”

इसके बाद उर्मिला ने कहा, “बाकियों की तरह मैं और मेरे दोस्त वापस क्लास रूम में आ गए. हमारे पास कूदने के आलावा और कोई विकल्प नहीं था. मैंने दूसरों को खिड़की से कूदते हुए देखा और उन्हें देखकर मैं भी कूद गई.”

अन्य छात्रा हैप्पी पंचाली ने कहा, “जो मैंने अनुभव किया वह बहुत ही बुरा था. मुझे नहीं पता कि मैं कब तक उस बिल्डिंग में रही और क्यों मैंने छलांग लगाई. मुझे बस इतना याद है कि सभी मदद के लिए रो रहे थे. बिल्डिंग से कूदने के बाद मुझे लगा कि मैं मर गई हूं.”

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