हवाई जहाज में कितना है संक्रमण के फैलने का खतरा, जानें क्‍या कहती है स्टडी

आमतौर पर फ्लाइट में संक्रमण (Infection) का खतरा कम माना जाता है, क्योंकि यात्रियों के बीच संपर्क कम होता है और हवाई जहाज (Airplanes) पर केबिन की हवा अक्सर बदल जाती है. मास्क (Mask) पहनने से संक्रमण फैलने का खतरा और भी कम हो सकता है.

हवाई जहाज में यात्रा के दौरान कोरोना संक्रमण का कितना खतरा हो सकता है, इसे लेकर हाल ही में दो स्टडी की गई हैं. रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control) जर्नल में प्रकाशित दो नए अध्ययनों में, हवाई जहाज में कोरोनावायरस संक्रमण (Coronavirus) के फैलने के खतरे का विश्लेषण (एनालिसिस) किया गया है. इन दोनों स्टडी की तुलना करने पर पता चलता है कि यदि सावधानियां बरती जाएं तो हवाई जहाज में संक्रमण का खतरा किसी ऑफिस या एक शॉपिंग सेंटर की तुलना में कम है.

इन दोनों अध्ययनों में WHO के कोरोना को महामारी घोषित करने से पहले, यानी कि मार्च महीने की शुरुआती उड़ानों का विश्लेषण किया गया है, जिसके बाद ही एयरलाइंस ने यात्रियों को मास्क पहनने के लिए प्रोटोकॉल जारी किए थे. अब इंटरनेशनल एयर ट्रैवल एसोसिएशन (IATA) ने यात्रियों से सिफारिश की है कि सभी यात्री अपनी पूरी यात्रा के दौरान मास्क पहनें, यानी कि जब वे एयरपोर्ट से बाहर निकलते हैं या एयरपोर्ट में प्रवेश करते हैं.

पहला अध्ययन

पहले अध्ययन में मार्च की शुरुआत में की गई लंदन से हनोई तक की 10 घंटे की व्यावसायिक उड़ान (Commercial flight) का विश्लेषण करके यह बताने की कोशिश की गई है कि फ्लाइट में एक संक्रमित व्यक्ति से बाकी यात्रियों को कितना खतरा हो सकता है, जिसे लेखकों ने इन-फ्लाइट ट्रांसमिशन नाम दिया है. लेखकों का कहना है कि फ्लाइट में संक्रमित व्यक्ति के एयरोसोल (हवा में मौजूद बूंदें) से संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा हो सकता है.

इस फ्लाइट में चालक दल (Crew members) के 16 सदस्य और 201 यात्री सवार थे. 201 यात्रियों में से 21 ने बिजनेस क्लास, 35 ने प्रीमियम इकोनॉमी क्लास और 145 ने इकोनॉमी क्लास की सीटों पर सफर किया. इसमें किसी भी यात्री ने मास्क नहीं पहना था.

एक महिला से 15 लोगों तक पहुंचा था संक्रमण

लेखकों ने इस फ्लाइट में यात्रा कर रही 21 साल की एक महिला जो संभवत: कोरोना से संक्रमित थी, को नोटिस किया. उस महिला को बिजनेस क्लास की सीट (Business Class Seat) दी गई थी और उसे फ्लाइट में बैठने से पहले ही गले में खराश और खांसी थी. बाद में इस फ्लाइट में बैठे 15 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि की गई थी.

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इन 15 लोगों में से 12 यात्री बिजनेस क्लास में और दो इकोनॉमी क्लास में और बाकी बचे एक यात्री ने फ्लाइट अटेंडेंट के रूप में सफर किया था. 15 में से 11 लोगों को उस संक्रमित महिला से लगभग 2 मीटर की दूरी पर बिठाया गया था. इसके अलावा, एक व्यक्ति जिसकी सीट महिला से दो सीट दूर थी, की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. इससे पता चलता है कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने से बाहर आने वाली सूक्ष्म बूंदों से आस-पास बैठे लोगों में संक्रमण तेजी से फैलता है.

दूसरा अध्ययन

दूसरे अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने 23 जनवरी से 13 जून के बीच हांगकांग (Hong Kong) में सामने आए 1,000 से ज्यादा संक्रमित व्यक्तियों के रिकॉर्ड की जांच की. लेखकों ने इनमें से ऐसे 4 संक्रमित व्यक्तियों की पहचान की जो 9 मार्च को अमेरिका के बोस्टन (Boston) से 10 मार्च को हांगकांग पहुंचे थे.

15 घंटे की इस उड़ान में करीब 294 यात्री सफर कर रहे थे. इन चारों संक्रमित मरीजों में से 2 मरीज केबिन सदस्य थे और 2 यात्री थे. इनमें से 2 मरीज जो कि विवाहित थे, बिजनेस क्लास में एक दूसरे के सामने खिड़की वाली सीट पर बैठे थे. वहीं, बाकी दोनों मरीज फ्लाइट अटेंडेंट थे और दोनों में से एक ने इन दोनों यात्री मरीजों को अपनी सेवाएं दी थीं.

शोधकर्ताओं ने क्या-क्या निकाले नतीजे

लेखकों का कहना है कि सबसे संभावित रिजल्ट जो निकलता है, वह यह है कि जो दोनों यात्री मरीज थे, वे फ्लाइट में बैठने से पहले अमेरिका (America) से ही संक्रमित होकर आए थे या उनमें से कोई एक संक्रमित था जिससे दूसरे को भी इन्फेक्शन पहुंच गया और उन्हीं दोनों से दोनों केबिन सदस्यों को भी संक्रमण पहुंचा.

हालांकि एक निष्कर्ष यह भी निकलता है कि जिस केबिन सदस्य ने दोनों यात्री मरीजों को अपनी सेवाएं दी थीं, उसे उन यात्रियों से संक्रमण पहुंचा और फिर उसने अपना संक्रमण बाकी बचे केबिन सदस्य को भी दे दिया. इस तरह, पहले अध्ययन के मुताबिक एक संक्रमित व्यक्ति से आसपास बैठे लोगों में संक्रमण फैला, जबकि दूसरे अध्ययन के अनुसार संक्रमित व्यक्ति के पास जाने से दूसरा व्यक्ति भी संक्रमित हुआ.

लेखकों का कहना है कि यदि किसी संक्रमित यात्री के पास ना बैठा जाए और सावधानियों का ध्यान रखा जाए, तो आमतौर पर फ्लाइट में संक्रमण का खतरा कम माना जाता है, क्योंकि यात्रियों के बीच फेस टू फेस संपर्क कम होता है और हवाई जहाज (Airplane) पर केबिन की हवा अक्सर बदल जाती है.

मास्क पहनने से संक्रमण से बचा जा सकता है

हवाई जहाज के केबिन के अंदर हवा के ट्रांसमिशन की दर कम हो सकती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है. मास्क (Mask) पहनने से यह खतरा और भी कम हो सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि यात्रियों के पास-पास बैठने या एक ही क्लास में बैठने या संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने या एक-दूसरे को छूने से संक्रमण तेजी से फैल सकता है. वहीं, जिस विमान में वेंटिलेशन सिस्टम नहीं चल रहा होता है, वहां अन्य यात्रियों में भी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है.

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