कोरोनावायरस: सूंघने वाली वैक्सीन और पैसिव टीका कितना प्रभावी? फार्मा कंपनियां कर रहीं खोज

जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) के कोरोना वैक्सीन को डिजाइन करने वाले हावर्ड वैक्सीन के रिसर्चर डॉ डैन बारोच ने कहा कि सिंगल-शॉट वैक्सीन बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियानों और वैश्विक महामारी में ज्यादा फायदेमंद साबित होगी.

corona vaccine

कोरोनावायरस (Corona Virus) की प्रभावी वैक्सीन की दौड़ में कई फार्मा कंपनियां लीक से हटकर खोज कर रही हैं. जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) कंपनी सिंगल-शॉट वैक्सीन का परीक्षण कर रही है, जबकि पारंपरिक वैक्सीन उम्मीदवारों को दो शॉट्स की जरूरत होती है. भारत बायोटेक ने इंट्रानैसल वैक्सीन बनाने की घोषणा की है, जो इसे अंतरापेशी से अलग करेगा.

ज्यादातर कोरोनावायरस वैक्सीन (Vaccin) उम्मीदवार इंट्रामस्क्युलर हैं, जहां शॉट्स को मांसपेशियों में इंजेक्ट किया जाता है. इस प्रक्रिया के लिए चिकित्सा पेशेवरों, उपकरणों आदि की जरूरत होती है. जबकि इंट्रानैसल वैक्सीन इससे अलग होती हैं, यह कम लागत के साथ खुद प्रभाव में लाई जाने वाली हो सकती है.

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करोना से बचने के लिए इंट्रानैसल वैक्सीन पर चल रहा काम

भरत बॉयोटेक के अध्यक्ष और एमडी कृष्णा एला ने कहा कि उन्हें इस नए वैक्सीन (Vaccin) पर मिलकर काम करने पर गर्व हो रहा है. उन्हें लगता है कि वह इस वैक्सीन को अरबों लोगों तक पहुंच सकेगी. हर व्यक्ति को एक खुराक से ही टीका (vaccination)  लगाया जा सकता है. कृष्णा एला ने कहा कि इंट्रानैसल वैक्सीन न केवल नशीली दवाओं बल्कि सुई, सिरिंज, आदि जैसी चीजों के उपयोग के प्रयोग को भी कम करेगा, जिससे टीकाकरण के लिए लागत में भी फायदा होगा.

फार्मा कंपनी (Farma Company) मॉडर्ना, फाइज़र, और एस्ट्राजेनेका द्वारा बनाई जा रही सभी वैक्सीन डबल शॉट्स हैं, जो प्रतिभागियों को कई हफ्तों के अंतराल में दिए जा रहे हैं. जॉनसन एंड जॉनसन और भरत बायोटेक मिलकर एक शॉट वाली इंट्रानैसल वैक्सीन पर काम कर रहे हैं. इनका उद्देश्य वैक्सीन की प्रक्रिया को आसान बनाना है.

सिंगल शॉट वैक्सीन कोरोना में ज्यादा प्रभावी-रिसर्च

जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) के कोरोना वैक्सीन को डिजाइन करने वाले हावर्ड वैक्सीन के रिसर्चर डॉ डैन बारोच ने कहा कि सिंगल-शॉट वैक्सीन बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियानों और वैश्विक महामारी में ज्यादा फायदेमंद साबित होगी. शुक्रवार को एक क्लीनिकल ट्रायल में डॉक्टर डैन ने दावा किया कि जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा प्रयोग की जा रही कोरोना वैक्सीन की सिंगल खुराक कोरोनोवायरस के खिलाफ इम्यूनिटी को बूस्ट करेगी.

पारंपरिक वैक्सीन में रेडीमेड एंटीबॉडी मौजूद

वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि पैसिव वैक्सीन (Passiv Vaccin) से कोरोनावायरस के खिलाफ ज्यादा प्रभावी एंटीबॉडीज विकसित हो सकते हैं. एक्टिव वैक्सीनेशन के विपरीत पैसिव वैक्सीनेशन में रेडीमेड एंटीबॉडी का संचालन शामिल होता है, जो कुछ समय बाद घट जाता हैं.

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पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मन सेंटर फॉर न्यूरोडीजेनेरेटिव डिजीज और चाराइट – यूनिवर्सिटेडमेडिसिन बर्लिन के वैज्ञानिकों ने हालही में कोरोना से ठीक हुए अलग-अलग मरीजों के खून से करीब 600 एंटीबॉडी को अलग किया है. यह वह प्रक्रिया है, जिसमें प्लाज्मा थेरेपी काम करती है, लेकिन वैज्ञानिक अब यह पता लगा रहे हैं कि क्या इसका उपयोग उन लोगों के टीकाकरण के लिए किया जा सकता है जो अभी तक कोरोनावायरस से संक्रमित नहीं हैं.

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