Balakot Air Strike Story with Complete Details, बालाकोट एयर स्‍ट्राइक : घर में घुसकर तबाह किए थे PAK के आतंकी कैंप, पढ़ें ‘ऑपरेशन बंदर’ की पूरी कहानी
Balakot Air Strike Story with Complete Details, बालाकोट एयर स्‍ट्राइक : घर में घुसकर तबाह किए थे PAK के आतंकी कैंप, पढ़ें ‘ऑपरेशन बंदर’ की पूरी कहानी

बालाकोट एयर स्‍ट्राइक : घर में घुसकर तबाह किए थे PAK के आतंकी कैंप, पढ़ें ‘ऑपरेशन बंदर’ की पूरी कहानी

14 फरवरी को पुलवामा में हमला हुआ था. सिर्फ 12 दिन बाद, हमने बालाकोट कर दिया. आखिर कैसे इतने कम समय में प्‍लान किया गया ये ऑपरेशन. पढ़ें बालाकोट एयर स्‍ट्राइक की पूरी कहानी.
Balakot Air Strike Story with Complete Details, बालाकोट एयर स्‍ट्राइक : घर में घुसकर तबाह किए थे PAK के आतंकी कैंप, पढ़ें ‘ऑपरेशन बंदर’ की पूरी कहानी

आज 26 फरवरी 2020 है. एक साल पहले, इसी तारीख को भारतीय रणबांकुरों ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में अपना पराक्रम दिखाया था. वहां मौजूद आतंकवादी संगठनों के कैंपों को तबाह किया गया. एक तरह से यह पुलवामा में CPRF जवानों पर हुए कायराना हमले का जवाब था. भारत ने जता दिया था कि उसकी संप्रभुता पर हमला हुआ तो वह में पलटवार से हिचकेगा नहीं. 14 फरवरी को पुलवामा में हमला हुआ था. सिर्फ 12 दिन बाद, हमने बालाकोट कर दिया. आखिर कैसे इतने कम समय में प्‍लान किया गया ये ऑपरेशन. पढ़ें बालाकोट एयर स्‍ट्राइक की पूरी कहानी.

पुलवामा हमले के बाद देश में ‘बदला’ लेने की भावना चरम पर थी. 15 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि ‘सुरक्षा बलों को खुली छूट दी गई है. कार्रवाई का वक्‍त, जगह और तरीका वे खुद तय करेंगे. आतंकवादियों ने बड़ी गलती की है. उनके सरपरस्‍त बचेंगे नहीं.’ टॉप मिलिट्री और इंटेलिजेंस अधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई. इस मीटिंग में युद्ध समेत अन्‍य विकल्‍पों पर भी चर्चा हुई. इसी दौरान एयरफोर्स की तरफ से एयर स्‍ट्राइक का ऑप्‍शन रखा गया. बात सबको जंच गई.

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पुलवामा हमले के बाद हुई कैबिनेट की बैठक.

18 फरवरी वो तारीख थी जब तय हुआ कि एक्‍शन कैसे होगा. रिसर्च एंड एनलिसिस विंग यानी R&AW ने लोकेशन भी बता दी. जगह तय की गई पाकिस्‍तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वा प्रांत स्थित बालोकोट. यहां जैश-ए-मोहम्‍मद के टेरर कैंप्‍स होने की पुख्‍ता जानकारी थी. बालाकोट इसलिए भी चुना गया क्‍योंकि वहां सिविलियन आबादी नहीं थी. अभियान को गोपनीय रखने के लिए इसे ‘ऑपरेशन बंदर’नाम दिया गया था.

सिर्फ 7 लोगों को थी मिशन की जानकारी

मिशन खतरनाक था. किसी तेज तर्रार और काबिल ऑफिसर की जरूरत थी. ऐसे में ‘ऑपरेशन बंदर’ के लिए एयर मार्शल सी हरि कुमार को जिम्मा सौंपा गया. सी हरि कुमार के मुताबिक, पुलवामा हमले के दिन ही एयरफोर्स चीफ ने उनसे बात कर कहा था कि कोई प्‍लान होना चाहिए. मिशन की जानकारी सिर्फ सात लोगों को थी. यहां तक कि ऑपरेशन में शामिल पायलट्स की फैमिलीज तक को इसके बारे में कुछ नहीं पता था.

ऑपरेशन की तैयारियां 22 फरवरी से शुरू हुईं. उस रात से भारतीय एयरफोर्स ने अपने कई एयरेबेसेज से लड़ाकू विमानों की टेस्टिंग फ्लाइट शुरू कर दी. इन फ्लाइट्स का मकसद था दुश्‍मन को कंफ्यूज करना. कॉम्बैट एयर पैट्रोल्स (CAP) को लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर उड़ाया गया. यह भारत की एक चाल थी.

25 फरवरी को पुख्ता इंटेलिजेंस इनपुट मिला कि बालाकोट में जैश के कैंप में 300 से 350 आतंकवादी मौजूद हैं. सेना ने तय कर लिया कि रात के वक्त कार्रवाई को अंजाम दे दिया जाएगा. पीएम मोदी को थोड़ी देर बाद देर शाम को जानकारी दी गई कि अगले कुछ घंटों के भीतर हमारी वायुसेना सीमा पार कर दुश्मनों का काम-तमाम करने वाली है.

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जब ये तय हो गया कि हम हमला करने के लिए तैयार हैं, तो NSA अजीत डोभाल ने अपने अमेरिकी समकक्ष जॉन बॉल्‍टन से टेलीफोन पर बात की. डोभाल ने उन्हें एयर स्ट्राइक की जानकारी देते हुए अपने देश की सुरक्षा के मद्देनजर इसकी जरूरत और ऐसा करने के अपने अधिकार के बारे में बताया.

यही तारीख क्‍यों चुनी गई?

स्‍ट्राइक में शामिल रहे एक IAF ऑफिसर के मुताबिक, “हम ऐसे समय हमला करना चाहते थे, जब सभी आतंकी एक जगह जमा हों. यह रात का समय हो सकता था. 19 फरवरी को पूर्णमासी थी. मिशन के समय 3 से 4 बजे तक चांद क्षितिज से 30 डिग्री पर होना था. ऐसे में चांदनी एकदम आदर्श थी.”

25-26 फरवरी को कुमार की रिटायरमेंट पार्टी थी. मिशन सीक्रेट रहे, इसलिए उसे कैंसिल नहीं किया गया. हरि कुमार के मुताबिक, ”पार्टी में मैंने वेटर को बुलाया और कहा कि जूस और चीनी से बनी नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक लाकर दो ताकि रंग व्हिस्की सा दिखाई दे. एयरचीफ बीएस धनोआ मुझे लॉन की तरफ ले गए. उन्होंने कहा कि जब ऑपरेशन हो जाए तो फोन पर सिर्फ ‘बंदर’ बोल देना.”

सिर्फ 90 सेकेंड्स में काम तमाम

25 फरवरी को स्पाइस-2000 मिसाइल को मिराज 2000 लड़ाकू विमान पर लोड किया गया. मिसाइल सिस्‍टम में टारगेट के कोऑर्डिनेट्स फीड किए गए थे. 26 फरवरी की रात 2 बजे एयरफोर्स की टीम ने उड़ान भरी. जान-बूझकर लंबा रास्‍ता चुना गया.

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अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते IAF पायलट्स को रावलपिंडी के आसमान में पाक वायुसेना का एक टोही विमान गश्त करता दिखा. उसे वहां से भटकाने के लिए IAF दो सुखोई-30 और चार जगुआर विमानों को बहावलपुर की ओर तेजी से रवाना किया.

खतरा टल गया. हमारे फाइटर पोजिशन ले चुके थे. पहली एयरस्ट्राइक 3 बजकर 28 मिनट पर हुई और चार बजे तक मिशन पूरा हो गया था. सभी लड़ाकू विमान सुरक्षित लौटकर पश्चिमी कमान के दो अड्डों पर उतर गए. स्‍ट्राइक में शामिल मिराज 2000 लड़ाकू विमान के एक पायलट ने कहा था, ‘मिशन 90 सेकंड में खत्म हो गया था. हमने हमला किया और फिर हम वापस आ गए.’

इस ऑपरेशन में मिराज 2000 और 2000i शामिल थे. सुखोई 30MKI को डिकॉय की तरह इस्‍तेमाल किया. वे मिराज को कवर भी दे रहे थे. एयरफोर्स के पास फाल्कन AWACS और एम्ब्रेयर AEWS मिड-एयर रिफ्यूएलर्स थे. हेरॉन ड्रोन को हमले के बाद टारगेट की तस्वीर खींचने के लिए तैनात किया गया था.

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