अंग्रेज लूट ले गए 45 ट्रिलियन डॉलर, हम कर रहे 5 ट्रिलियन डॉलर के लिए स्ट्रगल

रिसर्च के मुताबिक तरह-तरह के पैंतरों से ब्रिटेन ने कुल 190 सालों में भारत से करीब 44.6 ट्रिलियन डॉलर चुराए और इस पैसे का इस्तेमाल अपने साथ-साथ दूसरे देशों के विकास में किया.

अंग्रेजों ने भारत को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी और देश की संपत्ति से 45 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 3,19,29,75,00,00,00,000.50 रुपए) लूट ले गए थे. ये रकम यूनाईटेड किंगडम की GDP से 17 गुना ज्यादा है. 1765 से 1938 तक अंग्रेजों ने कुल 9.2 ट्रिलियन पाउंड का खजाना लूटा, जिसकी कीमत आज 45 ट्रिलियन डॉलर है.

उत्सा पटनायक की एक रिसर्च के मुताबिक ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय व्यापारियों और नागरिकों पर कई तरह के कर लगाए थे जिससे कंपनी को काफी आमदनी हुई. ये एक स्कैम की तरह था, जिसमें वसूले गए कर के एक हिस्से से भारतीयों से सामान खरीदा जाता था. कुल मिलाकर ब्रिटिश भारतीयों से फ्री में सामान खरीदते थे और बचे सामान को दूसरे देशों को एक्सपोर्ट कर देते थे.

औद्योगिकीकरण में ब्रिटेन ने भारत से जमकर चोरी की और तरक्की की. उन्होंने सस्ते दाम में भारत से सामान खरीदकर उसे महंगे दामों में बेचा और 100 फीसदी मुनाफा प्लस रेवेन्यू कमाया. 1847 तक भारत में पूरी तरह से ब्रिटिश शासन लागू हो गया और नया टैक्स एंड बाय सिस्टम लागू किया गया. इसमें इस बात का खास ध्यान रखा गया कि आय और मुनाफा सीधे लंदन पहुंचे.

इतना ही नहीं भारतीय रेवेन्यू से ही ब्रिटेन दूसरे देशों के साथ हुई जंग का खर्चा निकालता रहा. 1840 में चीन की घुसपैठ और 1857 में विद्रोह आंदोलन को दबाने के लिए भी आया खर्चा भारतीयों के कर से वसूला गया.

यही नहीं भारत से ले जाया गया सामान और पैसा ब्रिटेन ने अपने साथ-साथ दूसरे देशों के विकास में भी इस्तेमाल किया.

पटनायक की रिसर्च के मुताबिक तरह-तरह के पैंतरों से ब्रिटेन ने कुल 190 सालों में भारत से करीब 44.6 ट्रिलियन डॉलर चुराए और इसमें वो ब्रिटिश काल के दौरान भारत पर पड़ा कर्ज शामिल नहीं है.

गौरतलब है कि अगर ये पूरा पैसा और कर भारत के अपने विकास में लगा होता तो आज हमारा देश सबसे ताकतवर देशों में से एक होता. अर्थव्यवस्था के मामले में भारत सबसे आगे हो सकता था और देश की सदियों की गरीबी दूर हो जाती. बीच में इस पूरे मसले को दबाने की कोशिश भी की गई थी.