बाबरी मस्जिद की टूटी ईंटों को प्रसाद के रूप में बांटा गया

Share this on WhatsAppपाँच घंटे की कारसेवा में सबसे पहले ढाँचे की बाहरी और भीतरी दीवार गिराई गई. उसके बाद पौने तीन बजे ढाँचे का दाहिना गुंबद जमीन पर आ गया. इसमें दो कारसेवक दबकर मारे गए. पौने चार बजे विवादित ढाँचे का बायाँ गुंबद गिरा. बीच का मुख्य गुंबद, जिसे विहिप गर्भगृह कहती थी, […]

पाँच घंटे की कारसेवा में सबसे पहले ढाँचे की बाहरी और भीतरी दीवार गिराई गई. उसके बाद पौने तीन बजे ढाँचे का दाहिना गुंबद जमीन पर आ गया. इसमें दो कारसेवक दबकर मारे गए. पौने चार बजे विवादित ढाँचे का बायाँ गुंबद गिरा. बीच का मुख्य गुंबद, जिसे विहिप गर्भगृह कहती थी, वह 4 बजकर 40 मिनट पर नीचे आया. तब तक सभी महत्वपूर्ण नेता गायब हो गए थे, वे कहीं बैठक कर रहे थे.

विहिप के साधु-संत, विनय कटियार, उमा भारती, ऋतंभरा और आचार्य धर्मेंद्र मंच से लगातार कारसेवकों को ललकार रहे थे. आचार्य धर्मेंद्र रामकथा कुंज में बैठे कारसेवकों से अपील कर रहे थे कि जिन्होंने प्रसाद नहीं लिया है, वे प्रसाद ले लें. आचार्य धर्मेंद्र ढाँचे की ईंटों को प्रसाद कह रहे थे. उमा भारती ने कहा, “अभी पूरा काम नहीं हुआ है. आप तब तक परिसर न छोड़ें, जब तक पूरा इलाका समतल न हो जाए.” इस तमाशे में उमा भारती, ऋतंभरा और आचार्य धर्मेंद्र की भूमिका सबसे अहम रही. उमा भारती ने भीड़ को दो नारे दिए—‘राम नाम सत्य है. बाबरी मस्जिद ध्वस्त है.’ और ‘एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो.’ ये दो नारे कई घंटे तक उस परिसर में गूँजते रहे.

आचार्य धर्मेंद्र रामकथा कुंज में बैठे कारसेवकों से अपील कर रहे थे कि जिन्होंने प्रसाद नहीं लिया है, वे प्रसाद ले लें.

उमा भारती ने भीड़ के सामने मेरठ की शिव कुमारी को यह कहकर पेश किया कि ‘वे इस ढाँचे के गुंबद पर चढ़ने वाली पहली महिला हैं.’ उमा भारती ने 2 नवंबर, 1990 की कारसेवा में मारे गए दो भाइयों रामकुमार और शरद कोठारी के माता-पिता को भी भीड़ के सामने पेश किया और कहा, ‘देखिए, कोठारी बंधुओं की माता की आँखों में खुशी के आँसू हैं. इनके बेटों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया है. उनकी हत्या का बदला ले लिया गया है.’

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *