37 साल पहले चुनाव आयोग ने किया था EVM का प्रयोग, कराना पड़ गया था बैलेट पेपर से मतदान

चुनाव के शोर में उस पहले चुनाव के बारे में भी जान लीजिए जो 1982 में पहली बार ईवीएम से हुआ था. उस चुनाव के दिलचस्प विवाद और नतीजे की कहानी मज़ेदार है.

हमारे देश में हर चुनाव के बाद ईवीएम की अग्निपरीक्षा शुरू हो जाती है. जीतनेवाला चुप रहता है लेकिन हारनेवाला खूब शोर मचाता है.. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदुस्तान में पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल कब हुआ और उस चुनाव का नतीजा क्या रहा?

वो साल 1982 था और प्रयोग का मैदान था केरल की परावुर विधानसभा का उपचुनाव. छोटी और शांत विधानसभा प्रयोग के लिहाज से चुनाव आयोग को ठीक लगी होगी. यहां 123 में से 50 मतदान केंद्रों पर ईवीएम का इस्तेमाल करके देखा गया.  मुकाबले में थे कांग्रेस के ए सी जोस और सीपीआई के के सिवन पिल्लई.

मतदान से पहले ही सीपीआई वाले के सिवन पिल्लई ने केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी और ईवीएम की उपयोगिता और इस्तेमाल पर सवाल खड़े कर दिए. चुनाव आयोग अदालत में पेश हुआ. मशीन का इस्तेमाल करके दिखाया. कोर्ट ने संतुष्ट होकर मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया.

कमाल देखिए. ईवीएम पर भरोसा ना करनेवाले सीपीआई के पिल्लई साहब ने चुनाव में 2 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज कर ली.

EVM पर भरोसा ना करनेवाले सीपीआई के उम्मीदवार सिवन पिल्लई को EVM से हुए मतदान में जीत मिली थी

अब बारी कांग्रेस के ए सी जोस की थी. वो भी हाईकोर्ट जा पहुंचे. उन्होंने दलील रखी कि आरपी एक्ट 1951 और कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स 1961 ईवीएम के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देते हैं. हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के पक्ष में ही फैसला दोहराया मगर हार से दुखी जोस साहब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंचे. इस बार सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उन 50 पोलिंग बूथ पर फिर से वोटिंग कराई जाए जहां ईवीएम का इस्तेमाल हुआ था, और वोट मशीन से नहीं बैलेट पेपर से डाले जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने मशीन में गड़बड़ी जैसी कोई बात नहीं कही थी लेकिन ईवीएम का इस्तेमाल कानूनी होने तक रुकने पर सहमति बनी.

कांग्रेस प्रत्याशी जोस कब तक ईवीएम के समर्थक थे जब तक हार का मुंह नहीं देखा

खैर फिर से मतदान हुआ. इस बार नतीजा उलट गया. 2 हज़ार से ज्यादा वोटों के अंतर से हारे जोस साहब ने 2 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव जीत लिया.

देशभर के मीडिया में जमकर सुर्खियां बनीं. वो तब की बड़ी घटना थी. मशीन का पहली बार इस्तेमाल हुआ था लेकिन लौटकर बैलेट पेपर पर ही आने से ये खबर और बड़ी हो गई. कांग्रेस के प्रत्याशी ए जी जोस वैसे भी केरल विधानसभा के स्पीकर रह चुके थे. उनका कद बहुत बड़ा था. ज़ाहिर है उनकी हार से बड़ा झटका भी महसूस किया गया होगा.

इस चुनाव के डेढ़ दशक बाद तक ईवीएम का प्रयोग नहीं किया गया. 1998 वो साल था जब दिल्ली, मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव के दौरान 16 सीटों पर एक बार फिर प्रयोग हुआ. प्रयोग चल निकला. आखिरकार 2004 में पूरे देश ने लोकसभा चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल किया.

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