महात्मा गांधी ने बताया क्यों उनके साथी को लोग प्यार से कहते थे ‘प्याज चोर’

30 जनवरी को गांधी की बरसी होती है, इसलिए हमने सोचा कि इस बार आपको उनसे जुड़े कुछ किस्से सुनाए जाएं. पहला किस्सा मोहनलाल पंड्या का है जिन्हें गांधी ने 'प्याजचोर' की सम्मानित पदवी दिलाई थी.
Mohanlal Pandya's story by Mahatma Gandhi, महात्मा गांधी ने बताया क्यों उनके साथी को लोग प्यार से कहते थे ‘प्याज चोर’

अगर पूरी दुनिया में भारत का नाम सम्मान से लिया जाता है तो इसके लिए सबसे पहला श्रेय महात्मा गांधी को जाता है. इस गोले पर लोग भारत को गांधी के देश के रूप में जानते हैं. वही अहिंसा और सत्य के पुजारी जिन्हें 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. 30 जनवरी को गांधी की बरसी होती है, इसलिए हमने सोचा कि इस बार आपको उनसे जुड़े कुछ किस्से सुनाए जाएं. इनमें से कुछ आप पहले से जानते होंगे, जो नहीं जानते हैं वो जानेंगे तो गांधी को और करीब से जान पाएंगे.

‘प्याजचोर’ का किस्सा

प्याजचोर की कहानी गांधी ने अपनी बायोग्राफी ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ में लिखी है. वे खेड़ा से शुरू हुए पहले सत्याग्रह की कहानी बताते हैं और लिखते हैं पाटीदारों के लिए सत्याग्रह की लड़ाई नई थी. गांव-गांव घूमकर बताना पड़ता था कि सरकारी अफसर जनता के मालिक नहीं नौकर हैं. उन्हें जनता के पैसे से तनख्वाह मिलती है इसलिए उनसे डरना नहीं चाहिए. गांधी लिखते हैं कि लोगों के मन से डर निकालना और उसके बाद भी उन्हें विनम्र बनाए रखना मुश्किल काम था क्योंकि लोग फिर अपने अपमान का बदला चुकाने को तैयार हो जाते थे.

वे लिखते हैं कि शुरुआत में सत्याग्रह को अंग्रेजों ने सीरियसली नहीं लिया लेकिन बाद में उनकी सख्ती बढ़ती गई. सत्याग्रहियों के घर में कुर्की हुई, उनके जानवर बेच डाले और पूरे गांव की फसलें जब्त कर ली गईं. इसका असर ये हुआ कि कुछ लोग डरे और लगान जमा करा दिया. कुछ लोग चाहते थे कि सरकार खुद उनका सामान जब्त करके लगान वसूल कर ले, तो वहीं कुछ ऐसे भी थे जो मर मिटने को तैयार थे.

गांधी सत्याग्रह की एक अनोखी कहानी बताते हैं कि शंकरलाल परीख की जमीन का लगान उस जमीन पर रहने वाले शख्स ने जमा करा दिया, इससे शंकरलाल बड़े शर्मिंदा हुए और वह जमीन जनता को समर्पित कर दी. इससे उनका सम्मान बचा और लोगों के सामने ये घटना एक मिसाल बन गई.

अब गांधी मोहनलाल पंड्या का किस्सा बताते हैं जो बड़े सत्याग्रही थे और डरे हुए लोगों में उत्साह भरने का काम करते थे. गांधी कहते हैं कि अंग्रेजों ने प्याज की एक खड़ी फसल गलत तरीके से जब्त कर ली थी, मैंने सलाह दी कि प्याज खोद लो. अगर मामूली लगान के लिए पूरी फसल जब्त कर लेना कानून में भी लिखा हो तो ये गलत है, लूट है, हमें इसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए.

Mohanlal Pandya's story by Mahatma Gandhi, महात्मा गांधी ने बताया क्यों उनके साथी को लोग प्यार से कहते थे ‘प्याज चोर’
मोहनलाल पंड्या और गांधी

मोहनलाल पंड्या पहले से तैयार बैठे थे. उनका कहना था कि सत्याग्रही जब तक जेल न जाए तब तक कुछ मामला जमता नहीं. उन्होंने प्याज खुदवाने का फैसला किया और सात-आठ किसानों ने उनका साथ दिया. अंग्रेजी हुकूमत ने उन सबके गिरफ्तार कर लिया और मुकदमा चला. कुछ दिन के लिए उन सभी को जेल भेज दिया गया.

सरकार की इस हरकत से लोगों में कॉन्फिडेंस आ गया. अदालत में मुकदमा देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. अदालत का फैसला गलत था क्योंकि प्याज उखाड़ना चोरी की कैटेगरी में आता नहीं था, लेकिन कोई फैसले के खिलाफ अपील करने को तैयार ही नहीं था. उस दिन के बाद मोहनलाल पंड्या को प्याजचोर नाम की सम्मानित पदवी मिली जो उनके साथ अंत तक रही.

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