LTTE के खात्मे के लिए जाने जाते हैं गोताबेया राजपक्षे, आज भी डरते हैं तमिल

सिंहली बौद्धों में गोताबेया की लोकप्रियता से मुस्लिम भी डरे हैं. उन्हें आशंका है कि ईस्टर के मौके पर इस्लामी आतंकवादियों के गिरजाघरों पर किए गए हमले के बाद दोनों समुदायों में पैदा हुई खाई और चौड़ी होगी.

गोताबेया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) ने श्रीलंका के 7वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली. श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई व पूर्व रक्षा मंत्री गोताबेया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) ने श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में रविवार को जीत हासिल कर ली लेकिन लगभग सभी तमिल और मुस्लिम अल्पसंख्यक वाले प्रांतों में हार गए.

उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी, न्यू डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीएफ) व यूनाइडेट नेशनल पार्टी (यूएनपी) के उपनेता साजित प्रेमदासा ने एक बयान में गोताबेया को बधाई देते हुए कहा कि वह तत्काल प्रभाव से सत्तारूढ़ यूनाइटेड नेशनल पार्टी के उपनेता का पद छोड़ देंगे.

गोतबेया राजपक्षे को 4,940,849 मतों के साथ 51.41 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी प्रेमदासा को 4,106,293 मतों के साथ 42.72 प्रतिशत वोट से संतोष करना पड़ा.

देश के कानून के अनुसार, राष्ट्रपति के दावेदार को चुनाव जीतने के लिए 50 फीसदी या उससे अधिक वोट प्राप्त करने होते हैं.

एलटीटीई को निर्दयतापूर्ण तरीके से किया खत्म

गोताबेया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) वह व्यक्ति हैं जिन्हें ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ (एलटीटीई) के साथ तीन दशक से चल रहे गृहयुद्ध को निर्दयतापूर्ण तरीके से खत्म करने का श्रेय जाता है. गोताबेया की द्विपीय देश में विवादित एवं नायक दोनों की छवि है.

बहुसंख्यक सिंहली बौद्ध उन्हें ‘युद्ध नायक’ मानते हैं वहीं अधिकतर तमिल अल्पसंख्यक उन्हें अविश्वास की नजर से देखते हैं. इसी वजह से वह तमिल बहुसंख्यक वाले गृह युद्ध से प्रभावित उत्तरी प्रांत और मुस्लिम बहुल पूर्वी प्रांत में 65 से 70 प्रतिशत वोट के साथ हारे हैं.

तमिल मूल के परिवार जिनके अपने गृहयुद्ध के दौरान मारे गए या लापता हो गए हैं वे गोताबेया पर युद्ध अपराध का आरोप लगाते हैं.

गोताबेया (Gotabaya Rajapaksa) से तमिल अल्पसंख्यकों को लगता है डर

सिंहली बौद्धों में गोताबेया की लोकप्रियता से मुस्लिम भी डरे हैं. उन्हें आशंका है कि ईस्टर के मौके पर इस्लामी आतंकवादियों के गिरजाघरों पर किए गए हमले के बाद दोनों समुदायों में पैदा हुई खाई और चौड़ी होगी. हिंदू और मुस्लिम की संयुक्त रूप से श्रीलंका की कुल आबादी में 20 फीसदी हिस्सेदारी है.

गोताबेया (Gotabaya Rajapaksa) 70 वर्षीय नेता हैं जिन्होंने 1980 के दशक में भारत के पूर्वोत्तर स्थित ‘काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल’ में प्रशिक्षण लिया था.

बड़े भाई महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति रहने के दौरान उन्होंने वर्ष 2005 से 2014 में रक्षा सचिव की जिम्मेदारी निभाई थी. साल 1983 में उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की.

गोताबेया (Gotabaya Rajapaksa) 2012 और 2013 में रक्षा सचिव रहते हुए भारत के दौरे पर आए थे.

2006 में बाल बाल बचे थे गोताबेया (Gotabaya Rajapaksa)

एलटीटीई के निशाने पर रहे गोताबेया (Gotabaya Rajapaksa) 2006 में संगठन के आत्मघाती हमले में बाल-बाल बचे थे. माना जाता है कि उनका झुकाव चीन की ओर अधिक है. गोताबेया (Gotabaya Rajapaksa) के भाई के शासन में चीन ने बड़े पैमाने पर श्रीलंका की आधारभूत परियोजनाओं में निवेश किया था.

चुनाव से पहले विपक्षी यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी)ने गोताबेया पर अमेरिकी नागरिकता रखने का आरोप लगाया था और दावा किया था कि उन्होंने दस साल तक अमेरिका में निवास किया है. इसपर गोताबेया (Gotabaya Rajapaksa) ने सफाई दी कि चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने इस साल अमेरिका की दोहरी नागरिकता छोड़ दी थी.

उच्चतम न्यायालय ने अक्टूबर में उनकी नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी और सारे आरोपों से उन्हें बरी कर दिया था. गोताबेया (Gotabaya Rajapaksa) का जन्म 20 जून 1949 में मतारा जिले के पलाटुवा में एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में हुआ था. वह नौ भाई बहनों में पांचवें स्थान पर हैं.