Why difficult to find the grave of Dara Shikoh, सिर आगरा और धड़ दिल्ली में दफन, पढ़िए- दारा शिकोह की कब्र को तलाशने में क्यों हो रही मुश्किल
Why difficult to find the grave of Dara Shikoh, सिर आगरा और धड़ दिल्ली में दफन, पढ़िए- दारा शिकोह की कब्र को तलाशने में क्यों हो रही मुश्किल

सिर आगरा और धड़ दिल्ली में दफन, पढ़िए- दारा शिकोह की कब्र को तलाशने में क्यों हो रही मुश्किल

शाहजहां के बड़े बेटे दारा शिकोह का उसके भाई औरंगजेब ने बेरहमी से कत्ल कर दिया था. दारा को उदारवादी मुस्लिम बताया जाता है. क्योंकि उसने हिंदू और मुस्लिम परंपराओं में समानता की तलाश करने की कोशिश की थी.
Why difficult to find the grave of Dara Shikoh, सिर आगरा और धड़ दिल्ली में दफन, पढ़िए- दारा शिकोह की कब्र को तलाशने में क्यों हो रही मुश्किल

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के सात सदस्यों का एक पैनल बनाकर मुगल शाहजादा दारा शिकोह (1615-59) के कब्र की पहचान करने का काम सौंपा है. माना जाता है कि मुगल वंश के 140 कब्रों वाले हुमायुं का मकबरा परिसर में एक कब्र दारा शिकोह की है.

इस पैनल में एएसआई में मॉनुमेंट डायरेक्टर टी जे अलोन की अगुवाई में सीनियर आर्कियोलॉजिस्ट आर एस बिष्ट, सैयद जमाल हसन, के एन दीक्षित, बी आर मणि, के के मुहम्मद, सतीश चंद्रा और बी एम पांडेय शामिल किए गए हैं. पैनल को इस काम के लिए तीन महीने का समय दिया गया है. संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बताया कि जरूरत पड़ने पर इस समय को बढ़ाया भी जा सकता है. पैनल को लिखित इतिहास, पुरातात्विक प्रमाण और दूसरी सूचनाओं को जुटाकर दारा की कब्र की पहचान करनी होगी.

कौन था दारा शिकोह

शाहजहां के बड़े बेटे दारा शिकोह का उसके भाई औरंगजेब ने बेरहमी से कत्ल कर दिया था. दारा को उदारवादी मुस्लिम बताया जाता है. क्योंकि उसने हिंदू और मुस्लिम परंपराओं में समानता की तलाश करने की कोशिश की थी. उसने श्रीमदभगवदगीता सहित 52 उपनिषदों का फारसी में अनुवाद भी किया था. कई भाषाओं के विद्वान दारा शिकोह को मारकर ही 1659 में औरंगजेब दिल्ली की गद्दी पर बैठा था.

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दारा के काम का ओबामा पर भी असर

आर्कियोलॉजिस्ट पैनल के सदस्य के के मुहम्मद के मुताबिक दारा शिकोह अपने दौर का बड़ा फ्री थिंकर (स्वतंत्र विचारक) था. उसने उपनिषदों का महत्व समझा और अनुवाद किया. तब इसे पढ़ने की सुविधा सवर्ण हिंदुओं तक सीमित थी. उपनिषदों के दारा के किए फारसी अनुवाद से आज भी फ्री थिंकर्स को प्रेरणा मिलती है. यहां तक कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसको स्वीकार किया है.

दारा शिकोह और औरंगजेब

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि औरंगजेब की जगह अगर दारा शिकोह मुगल काल में ताज पहनता तो मजहबी लड़ाइयों में होनेवाले हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी. ‘दारा शिकोह: द मैन हू वुड बी किंग’ के लेखक अविक सरकार के मुताबिक दारा की सोच औरंगजेब से बिल्कुल अलग थी. औरंगजेब के मुकाबले वह बेहतर सोचनेवाला, संवेदनशील, गर्मजोश और उदार था. इसके साथ ही वह बतौर शासक उदासीन और जंग के मैदान से दूर रहने वाला था.

ईधर, दारा शिकोह को औरंगजेब के मुकाबले देखे जाने की कोशिश फिर से शुरू की जा रही है. दिल्ली में हाल ही में एक कॉन्क्लेव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए लोगों ने दारा शिकोह को एक सच्चा हिंदुस्तानी बताया. वहीं बीते साल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दारा शिकोह के नाम से एक शोध पीठ भी गठित किया गया है.

राजनीतिक मकसद की चर्चा

दिल्ली यूनिवर्सिटी में मध्यकालीन इतिहास पढ़ाने वाले प्रोफेसर सुनील कुमार ने बताया कि अगर आप आधुनिक राजनीतिक मकसदों से इतिहास का इस्तेमाल करना चाहेंगे तो मुश्किल होगी. क्योंकि इतिहास कभी बेहतर तरीके से आधुनिकता की मदद नहीं कर सकता. इसको मौजूदा नीयत से प्रभावित किया जा सकता है. अगर औरंगजेब नहीं दारा शिकोह बादशाह होता तो भारत कितना अलग होता जैसी सोच से मुगल इतिहास को ठीक से नहीं समझा जा सकता. दारा अच्छा मुसलमान होगा, लेकिन उसकी कब्र की तलाश क्यों हो रही है?

काटा गया था दारा का सिर, सिर्फ धड़ है दफन

शाहजहांनामा के मुताबिक औरंगजेब से हारने के बाद दारा शिकोह को जंजीरों से जकड़कर दिल्ली लाया गया. उसके सिर को काटकर आगरा फोर्ट भेजा गया, जबकि उनके धड़ को हुमायूं के मकबरे के परिसर में दफनाया गया था. के के मुहम्मद ने बताया कि कोई नहीं जानता कि दारा शिकोह को असल में कहां दफनाया गया था. हम सब इतना जानते हैं कि हुमायुं का मकबरा परिसर में एक छोटी सी कब्र उसकी भी है. ज्यादातर लोग वहां एक छोटी कब्र को दारा का मानते हैं. इटली से आए यात्री निकोलाओ मनुक्की ने उस दौरान सबकुछ देखे जाने के दावे के बाद अनुमान के मुताबिक एक ग्राफिक्स बनाकर इसे दिखाया था.

हुमांयु के मकबरे के पास ही दफन है ज्यादातर मुगल

मंत्रालय की ओर से गठित पैनल के सदस्य मणि ने कहा कि उस परिसर में एक कब्र को दारा शिकोह का बताया जाता है. हुमायुं के मकबरे के पश्चिम में स्थित एक प्लेटफॉर्म पर यह कब्र है. हमने इसके बारे में इस इलाके में रहनेवाले कई पीढ़ियों के जानकार लोगों से सुना है. इसके साथ ही एएसआई के कई सीनियरों ने भी ऐसा ही बताया है. इसके बावजूद कोई प्रमाणिक सबूत हमारे पास फिलहाल नहीं है.

एएमयू के प्रोफेसर शिरीन मूसवी ने कहा कि साल 1857 तक मुगल वंश के लगभग सभी को इसी परिसर में दफनाया जाता था. वहीं इतिहासकार जदुनाथ सरकार के मुताबिक युरोपियन और पर्सियन जानकारों ने भी हुमांयु के मकबरे परिसर में ही उसके दफनाए जाने के बारे में बताया है. वहीं एएसआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस परिसर में ज्यादातर कब्रों पर कोई नाम दर्ज नहीं है.

शाहजहांनामा में दारा की जानकारी नाकाफी

पैनल के सदस्य और एएसआई के पूर्व निदेशक हसन ने कहा कि शाहजहांनामा का संकलन करने वाले मुहम्मद सालेह कम्बोह ने महज दो पन्ने दारा शिकोह के आखिरी वक्त के बारे में लिखा है. उसमें बेरहमी से किए गए दारा शिकोह के कत्ल और दफनाने के बारे में लिखा गया है. वहीं मणि के मुताबिक पैनल के ज्यादातर सदस्य अभी तक आखिरी नतीजे पर पहुंचने के लिए सबूत जुटा रहे हैं. इसके लिए लगातार शोध कर ऐतिहासिक स्रोतों को खंगाल रहे हैं. पैनल के सभी सदस्यों ने अपनी विशेषज्ञता को इस मुहिम में झोंक दिया है.

दारा की कब्र मिलने की उम्मीद बरकरार

मुहम्मद ने कहा कि फिलहाल पैनल की मीटिंग नहीं हुई है. इसलिए हमने अब तक कोई मेथडोलॉजी तय नहीं किया है. कुछ निश्चित तौर पर नहीं कह सकते, लेकिन उम्मीद बनी हुई है. सही दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, लेकिन इसे काफी पहले किया जाना चाहिए था. वहीं प्रो. मणि इसे कभी खत्म नहीं होने वाली खोज करार दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसी ने भी दारा की कब्र की जगह के बारे में नहीं लिखा है. न ही किसी कब्र पर ऐसा कोई चिन्ह है. ऐसे में दारा की कब्र की शिनाख्त का कोई रास्ता नहीं है.

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