लॉर्ड माउंटबेटन की पहली पसंद थे ‘जवान लड़के’, अमेरिकी खुफिया एजेंसी FBI के पुराने कागज़ातों से खुलासा

लॉर्ड माउंटबेटन का नाम जितना भारतीय इतिहास के लिए अहम है, उनमें उतनी ही दिलचस्पी ब्रिटेन और अमेरिका की भी रहती है. खासकर माउंटबेटन के जीवन को लेकर वहां कभी चर्चा नहीं थमी. अब खुलासा हुआ है कि माउंटबेटन समलैंगिक थे.

जिसने भी भारत के इतिहास को ज़रा भी पढ़ा होगा उसने लॉर्ड माउंटबेटन का नाम ज़रूर सुना होगा. दूसरे विश्वयुद्ध में बर्मा की लड़ाई के हीरो बने और जापान को घुटने टेकने पर मजबूर करनेवाले लॉर्ड माउंटबेटन भारत के बीसवें और अंतिम वायसराय थे. इसके बाद भारतीय नेताओं के आग्रह पर वो आज़ाद भारत के पहले गवर्नर जनरल भी बने.

माउंटबेटन ने ही अपने से पहले भारत के दो वायसरायों के विफल रहने के बाद कांग्रेस- मुस्लिम लीग के नेताओं को साथ बैठाकर भारत की आज़ादी की योजना को अमीलजामा पहनाया था. भारत को दो भागों में बांटने की अंतिम योजना को आज भी इतिहास में ‘माउंटबेटन प्लान’ कहा जाता है. भले ही उनके दुनिया छोड़कर जाने के बाद उनसे जुड़ी सैकड़ों किताबें और लाखों लेख छप चुके हों लेकिन रह-रहकर उनके बारे में नई-नई बातें सामने आती रहती हैं. ताज़ा खुलासा है कि लॉर्ड माउंटबेटन एक समलैंगिक शख्स थे जो लड़कों की ओर आकर्षित थे.

दरअसल माउंटबेटन के समलैंगिक होने की नई जानकारी अमेरिका की खुफिया एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानि FBI के कागज़ातों से सामने आई है. खुफिया एजेंसी की फाइल माउंटबेटन और उनकी पत्नी एडविना को ‘Persons of extremely low morlas’  यानि ‘बहुत खराब चरित्र के लोग’ जिनके लगातार विवाहेत्तर संबंध रहे हैं, बताती है. एक सूत्र के मुताबिक माउंटबेटन का जवान लड़कों के प्रति झुकाव उन्हें ‘किसी मिलिट्री अभियान के नेतृत्व के लिए अनफिट शख्स’ बनाता था.

माउंटबेटन दंपति की जीवनी लिखनेवाले ब्रिटिश इतिहासकार एंड्रयू लॉउनी ने सरकार से जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में उन्हें FBI के 75 साल पुराने कागज़ हासिल हुए और वहीं से ये जानकारियां मीडिया के हाथ लगीं.

ब्रिटिश अखबार डेली मेल में लिखा गया है कि इन फाइल्स ने माउंटबेटन की एकदम अलग छवि पेश की है जिन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया में मित्र राष्ट्रों की फौज का नेतृत्व करने वाले नायक की तरह सम्मान मिलता रहा है. ये तो नहीं मालूम कि एजेंसी के एजेंट उन पर डोज़ियर क्यों तैयार कर रहे थे लेकिन FBI  हाई-प्रोफाइल लोगों पर ऐसे दस्तावेज़ बनाती रही है. एजेंट्स ने तीन दशकों तक यानि फरवरी 1944 तक उनसे जुड़ी जानकारियां इकट्ठी कीं. इसके बाद माउंटबेटन दक्षिण पूर्व एशिया में मित्र राष्ट्रों की सेना के सेनापति बन गए जिसने जापानी फौज का मुकाबला किया. उनकी नियुक्ति के वक्त FBI ने एलिज़ाबेथ नाम की उस शख्सियत का इंटरव्यू किया जो महारानी एलिज़ाबेथ और महारानी मेरी की करीबी थीं. द संडे टाइम्स कहता है कि एलिज़ाबेथ ने बताया कि परिचितों के बीच लॉर्ड लुई माउंटबेटन और उनकी पत्नी को खराब चरित्र का माना जाता था. लोग माउंटबेटन को जवान लड़कों की ओर रुझान रखनेवाले समलैंगिक के रूप में जानते थे. एलिज़ाबेथ का विचार था कि लुई माउंटबेटन की इस स्थिति के नतीजन वो किसी भी तरह के सैन्य अभियान का नेतृत्व करने के लिए अयोग्य थे. लेडी माउंटबेटन को भी उतने ही अस्थिर चरित्र का कहा गया.

इस इंटरव्यू के कागज़ात न्यूयॉर्क फील्ड ऑफिस के प्रमुख ई ई कॉनरॉय ने साइन किए थे जिन्होंने लिखा कि संबंधित महिला के पास उपरोक्त बयानों को देने का कोई खास मकसद नहीं है. एजेंट्स ने दूसरे विश्वयुद्ध के बाद मित्र सेनाओं के नाटो कमांडर बनने के बाद, एडमिरल ऑफ फ्लीट बनने के बाद और यहां तक कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनने के बाद भी माउंटबेटन के विषय में लगातार कई बातें लिखीं लेकिन खुद FBI की रुचि उनमें स्वेज़ संकट के दौरान चरम पर थी. नवंबर 1955 और नवंबर 1956 में उन पर फाइलें लिखी गईं.

एक किताब ‘द माउंटबेटन्स- देयर लाइव्स एंड लव्स’ में माउंटबेटन के पूर्व ड्राइवर रॉन पर्क्स के हवाले से उल्लेख है कि उनके बॉस की पसंदीदा जगह रबत में एक महंगा समलैंगिक वेश्यालय था जहां वरिष्ठ नेवी अफसर जाया करते थे जिसे रेड हाउस कहा जाता था. लाउनी की नई किताब ‘द माउंटबेटन्स’ 22 अगस्त को प्रकाशित होने जा रही है, उसमें 70 के दशक में पुरुष वेश्या रहे एंथनी डेली का बयान है. डेली ने कहा कि टॉम (जो माउंटबेटन का एक करीबी गे मित्र था) कहता था कि माउंटबेटन यूनिफॉर्म के प्रति कुछ कामोत्तेजना जैसा रखते हैं. उन्हें जवान लड़के सेना की वर्दी में (ऊंचे जूतों समेत) और स्कूल यूनिफॉर्म में छोटे लड़के पसंद हैं.  टॉम ड्रिबर्ग जैसे माउंटबेटन के मित्र उन्हें ‘माउंटबॉटम’ कहते थे.

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में 1967 तक समलैंगिक संबंध बनाने पर प्रतिबंध था. आपको ये भी बता दें कि लॉर्ड माउंटबेटन के यौन रुझान की चर्चा उनकी मौत के 40 साल बाद तक होती रही है. खुद अपनी पत्नी के विषय में एक बार की गई उनकी टिप्पणी काफी चर्चित रही जब उन्होंने कहा कि एडविना और मैंने अपने शादीशुदा जीवन को दूसरों के बिस्तर पर ही गुज़ारा.  हालिया ब्रिटिश राजकुमार चार्ल्स उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते थे और नए खुलासे पर ब्रिटिश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

राजकुमार चार्ल्स और लॉर्ड माउंटबेटन

माउंटबेटन की मौत 1979 में आयरलैंड के एक आतंकी संगठन के नाव में बम धमाके के दौरान हुई थी. इस हमले में उनके अलावा 3 लोग और मारे गए थे. माउंटबेटन कहा करते थे कि वो अपनी अंतिम सांस समुद्र की लहरों पर लेना चाहते हैं. ये विड़ंबना ही है कि उनका शव समुद्र पर ही तैरता मिला था.