वो मज़ेदार किस्सा जब अमिताभ बच्चन के दोस्त की मदद करके ‘फंस’ गए कॉमेडियन महमूद..

अमिताभ बच्चन अपने एक दोस्त को स्टार कॉमेडयन महमूद से मिलाने मुंबई ले गए. लोकप्रियता और दौलत के शिखर पर बैठे महमूद ने उस मुलाकात में कुछ ऐसा किया कि मज़ेदार किस्सा बन गया.

एक मज़ेदार किस्सा पढ़ने को मिला. साल 1972 के आसपास का. 1971 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी ने खुद के बूते जीत का परचम फहराकर संदेश दे दिया था कि वो ही भारत का राजनीतिक भविष्य हैं.  उस दौर में गांधी और बच्चन परिवार के रिश्ते खराब नहीं हुए थे. करियर के लिहाज से तब बिग बी करीब-करीब फेल साबित हो चुके थे. आनंद के सिवाय उनके खाते में कुछ भी ऐसा नहीं था जो याद रखने लायक हो. हां, परवाना में उन्हें थोड़ी पहचान तो मिली थी लेकिन उसमें भी वो लीड रोल नहीं निभा रहे थे.

उस वक्त कॉमेडियन महमूद फिल्म इंडस्ट्री के चमकते सितारे थे. लोकप्रियता का शिखर छू रहे थे. मुंबई में तब अमिताभ के लिए वही सबकुछ हुआ करते थे. 1972 में महमूद और अमिताभ ने मिलकर एक फिल्म की, जिसका नाम था बॉम्बे टू गोवा. वो फिल्म हिट हुई लेकिन उसकी रिलीज़ से पहले बिग बी एक दिन दिल्ली से अपने एक दोस्त को मुंबई लेकर पहुंच गए. तय हुआ कि उसकी मुलाकात महमूद से कराई जाए. अमिताभ अपने गोरे-चिट्टे और जवान दोस्त को लेकर महमूद के सामने पहुंच गए. कैम्पोज़ टेबलेट खाए महमूद उस दौरान पूरे होश में नहीं थे. वो इस टेबलेट के आदी हो चुके थे. महमूद के भाई अनवर ने अमिताभ के दोस्त का परिचय महमूद को दिया मगर महमूद तो अपनी ही दुनिया में थे. जो कुछ बताया गया उन्हें कुछ समझ नहीं आया.

देखते-देखते महमूद ने पांच हज़ार रुपए निकालकर अनवर के हाथ पर रख दिए और अमिताभ के दोस्त को देने के लिए कहा. हैरान-परेशान अनवर ने महमूद से जानना चाहा कि ये पैसे महमूद दे क्यों रहे हैं. महमूद बोले कि ये नौजवान लड़का देखने में अमिताभ से भी गोरा और स्मार्ट है. वो एक दिन इंटरनेशनल स्टार बन सकता है. ये पैसा उस नौजवान लड़के का साइनिंग अमाउंट है क्योंकि महमूद उसे अपने अगले प्रोजेक्ट में ले रहे हैं.

महमूद की बात सुनकर अनवर ने एक बार फिर महमूद को लड़के का परिचय दिया. इस बार उन्होंने लड़के के नाम ‘राजीव’ पर ज़ोर देकर दोहराया कि वो भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे हैं. खुशकिस्मती से महमूद ने इस बार पूरी बात ना सिर्फ सुन ली बल्कि समझ भी ली. उन्होंने दिए हुए पैसे चुपचाप वापस रख लिए. पूरे वाकये पर अमिताभ और राजीव गांधी दिल खोलकर खूब हंसे.

वैसे बाद में महमूद की बात सच निकली. राजीव गांधी अपने छोटे से प्रधानमंत्रित्व काल में इंटरनेशनल स्टार बने, भले ही फिल्मों के नहीं सियासत के ज़रिए. उनके अंतर्राष्ट्रीय जगत से संबध इतने गाढ़े थे कि जब उनकी हत्या हुई और वो पीएम भी नहीं थे तब उनके अंतिम संस्कार में दुनिया टूट पड़ी. अफगानिस्तानी राष्ट्रपति नजीबुल्लाह से लेकर पाकिस्तानी पीएम नवाज़ शरीफ और पूर्व पीएम बेनज़ीर भुट्टो तो पहुंचे ही, पीएलओ के यासिर अराफात को बच्चों की तरह बिलखते देखा गया. अराफात राजीव की मां इंदिरा को अपनी बड़ी बहन की तरह मानते थे.ब्रिटिश राजकुमार चार्ल्स भी दिल्ली पहुंचे थे और परंपरा तोड़ते हुए उन्होंने भारतीय संवाददाताओं से एयरपोर्ट पर ही बात की. उनके साथ पूर्व पीएम एडवर्ड हीथ और लेबर पार्टी के नेता नील किनॉक ने भी ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व किया. अमेरिका की तरफ से उप राष्ट्रपति डेन क्वेयल अपनी पत्नी के साथ पहुंचे. सोवियत यूनियन से उप राष्ट्रपति गेनेडी यानायेव,चीन से उप प्रधानमंत्री वू ज़ुकियान, बांग्लादेश से पीएम बेगम ख़ालिदा ज़िया, भूटान के राजा ज़िग्मे वांग्चुक और श्रीलंका से पीएम विजेतुंगे राजीव गांधी के अंतिम दर्शन के लिए आए.

(रशीद किदवई की ’24 अकबर रोड’ में बयान एक किस्सा)