क्या महज अफवाह है 1882 का Great Bombay Cyclone? पढ़ें- क्यों सवाल उठाते रहे एक्सपर्ट्स

बताया जाता है कि आखिरी बार साइकलोन मुंबई शहर में 6 जून, 1882 को आया था. इसे बॉम्बे साइक्लोन (Bombay Cyclone) या फिर ग्रेट बॉम्बे साइक्लोन (Great Bombay Cyclone) के नाम से बुलाया जाता है.

साल 2020 अब ऐसे लगने लगा है मानो दुनिया बस तबाह होने को है. कोरोनावायरस से पूरी दुनिया बेहाल है. वहीं कोरोनावायरस के साथ-साथ अब तूफानों ने भी भारत को घेर लिया है. हाल ही में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अम्फान तूफान (Amphan Cyclone) ने तबाही मचाई थी. अब अरब सागर से उठा चक्रवाती तूफान निसर्ग (Nisarga Cyclone) के चलते महाराष्ट्र और मुंबई हाई अलर्ट पर हैं. मौसम विभाग का अनुमान है कि निसर्ग आज देर रात या फिर कल मुंबई और आसपास के इलाकों से टकरा सकता है, जिसके कारण काफी तबाही हो सकती है.

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1882 में आए तूफान ने ली एक लाख लोगों की जान!

बताया जाता है कि आखिरी बार साइकलोन मुंबई शहर में 6 जून, 1882 को आया था. इसे बॉम्बे साइक्लोन या फिर ग्रेट बॉम्बे साइक्लोन के नाम से बुलाया जाता है. दावा किया जाता है कि इस साइक्लोन में करीब एक लाख लोगों की जान गई थी. हालांकि अब कुछ एक्सपर्ट्स पुरानी रिपोर्ट्स में दर्ज इस साइक्लोन की एक्यूरेसी को लेकर सवाल उठा रहे हैं. 2019 में अमेरिका की कॉलम्बिया यूनिवर्सिटी, मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और पुणे बेस्ड इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी ने यह निष्कर्ष निकाला था कि साल 1882 का साइक्लोन केवल एक छल था.

एचटी ने एक रिसर्च पेपर के हवाले से लिखा है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों के लिए 1877-1970 तक चक्रवात ट्रैक के आर्काइव के साथ-साथ डेली वेदर समरी बना रखी हैं. 1877 से 1883 तक आए सभी साइक्लोन के मैप उपलब्ध हैं. यह मैप दिखात हैं कि 1882 में अरब सागर से कोई चक्रवात तूफान नहीं उठा था.

1882 में तूफान आने के दावे खोखले

रिपोर्ट के अनुसार, IITM के डॉ. पार्थसारथी मुखोपाध्याय 1882 के साइक्लोन पर रिसर्च करने वालों में से एक रहे हैं. उन्होंने कहा कि कॉलम्बिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एडम सोबेल ने जब ग्रेट बॉम्बे साइक्लोन की ऑथेनसिटी को लेकर ग्लोबली सवाल खड़े किए, तो हमने इसके सोर्स की जांच करने का फैसला किया. व्यापक शोध के बाद हमने पाया कि साइक्लोन की बात केवल एक धोखा था. उन्होंने यह भी कहा कि अगर 1882 में आए तूफान में एक लाख लोगों की मौत हुई थी तो ब्रिटिश प्रशासन के पास इसका रिकॉर्ड होता, लेकिन हमें ऐसा कुछ नहीं मिला.

IMD के पूर्व डायरेक्टर जनरल का दावा

हालांकि IMD के पूर्व डायरेक्टर जनरल एलएस राठौर का मानना है कि साल 1882 में ग्रेट बॉम्बे साइक्लोन आया था. उन्होंने कहा कि यह कोई धोखा नहीं है. उस समय सूचना के अनुचित प्रसार के कारण सही तथ्य कभी प्रकाशित या रिकॉर्ड नहीं किए गए. अगर थे भी तो वो समय के साथ-साथ खो गए. राठौड़ का कहना है कि उस तूफान ने शहर के बंदरगाह को तबाह कर दिया था. अगर प्रभाव के बारे में डिटेल में जानकारी चाहिए तो किसी इतिहासकार से बात करनी चाहिए.

क्या कहते हैं इतिहासकार?

इतिहासकार दीपर राव कहते हैं कि ज्योग्राफिकली और डेमोग्राफिकली समकालीन मुंबई 1882 के बॉम्बे से बहुत बड़ा है. मुंबई के उपनगरों सहित ग्रेटर मुंबई का विस्तार माहिम से शुरू हुआ, जिसे केवल 1945 में जोड़ा गया था. 1882 में सात द्वीपों को ग्रेटर मुंबई के रूप में एक साथ नहीं देखा गया था और अगर एक चक्रवात आया होता तो आबादी पूरी तरह से तबाह हो गई होती.

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