वो विस्फोट जो हिरोशिमा-नागासाकी के धमाके से हजारों गुना बड़ा था, जानिए क्राकाटोआ हादसे की कहानी

इंडोनेशिया के पास क्राकाटोआ के मुख्य द्वीप पर 1883 में हुए ज्वालामुखी विस्फोट को मानव इतिहास सबसे विनाशकारी ज्वालामुखी विस्फोटों में से एक माना जाता है. इस हादसे में 36,000 से अधिक लोग मारे गए थे.
Krakatoa Volcano facts, वो विस्फोट जो हिरोशिमा-नागासाकी के धमाके से हजारों गुना बड़ा था, जानिए क्राकाटोआ हादसे की कहानी

दुनिया के सबसे बड़े धमाके या विस्फोट का जिक्र जब भी आता है तो एक घटना जिसकी चर्चा आम तौर पर सबसे ज्यादा की जाती है वो है हिरोशिमा-नागासाकी पर हुए परमाणु हमले की. अगर हम आपसे कहें की एक विस्फोट ऐसा भी हुआ था जो इससे लगभग 10000 गुना ज्यादा बड़ा और शक्तिशाली था तो आप क्या कहेंगे…?

अगस्त 1883 को इंडोनेशिया के पास क्राकाटोआ के मुख्य द्वीप पर हुए ज्वालामुखी विस्फोट को मानव इतिहास सबसे विनाशकारी ज्वालामुखी विस्फोटों में से एक माना जाता है. इस हादसे में 36,000 से अधिक लोग मारे गए थे.

कहां है क्राकाटोआ?

करीब 357 मीटर ऊंचाई वाला यह ज्‍वालामुखी दुनिया के सबसे खतरनाक ज्‍वालामुखियों में से एक है. यह ज्वालामुखी द्वीप जिसे क्राकाटोआ के नाम से जाना जाता है जावा और सुमात्रा के द्वीपों के बीच सुंडा स्ट्रेट में स्थित है. 1883 में हुए विस्फोट के समय यह इलाका डच ईस्ट इंडीज का हिस्सा था. माना जाता है कि पांचवीं या छठी शताब्दी में हुए एक बड़े धमाके की वजह से यह ज्वालामुखी द्वीप बना था. 1883 तक, क्राकाटोआ तीन चोटियों, पेरोबेवेटन (सबसे उत्तरी और सबसे सक्रिय) बीच में दानन और सबसे बड़ा ‘राकाटा’ जो द्वीप के दक्षिणी छोर पर था से मिलकर बना था. इस धमाके से लगभग दो शताब्दियों पहले 1680 में क्राकाटोआ पर आखिरी बार विस्फोट हुआ था और तब ज्यादातर लोगों का मानना ​​था कि यह विलुप्त हो गया था लेकिन मई 1883 में पहले पश्चिमी जावा में और फिर सुंडा स्ट्रेट के दूसरी तरफ सुमात्रा में कई लोगों ने इसमें हलचल और विस्फोट जैसी घटनाएं महसूस की थी.

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जिसके बाद जर्मन युद्धपोत एलिजाबेथ सहित इस व्यस्त जलमार्ग से गुजरने वाले की जहाजों ने भी इसके सक्रिय होने की खबर दी. यहां तक की जर्मन युद्धपोत एलिजाबेथ के कप्तान ने इस ज्वालामुखी से लगभग 6 मील (9.6 कि.मी.) उंचे उठते राख के बादल को देखने का दावा किया था. इन घटनाओं के बाद मई महीने के अंत तक चीजें शांत हो गईं, हालांकि पेरोबेवेटन क्रेटर से धुआं और राख का निकलना जारी था.

जब हुआ विस्फोट

26 अगस्त की दोपहर लगभग 1 बजे पेरोबेवेटन ज्वालामुखी पर एक भीषण विस्फोट हुआ. यह इतना भयानक था की मलबे के साथ निकलने वाली राख और गैस के बादल हवा में लगभग 15 मील (24 किमी) ऊपर तक छा गए. यह अगले 21 घंटों में होने वाले विस्फोटों में पहला था जिसके बाद 27 अगस्त को सुबह 10 बजे के आसपास एक और विशालकाय विस्फोट हुआ, जिससे उठने वाले राख के बादल हवा में लगभग 50 मील ऊपर तक फ़ैल गए. यह धमाका इतना जोरदार था की ऑस्ट्रेलिया के पर्थ तक सुना जा सकता है जो इस द्वीप से कुछ 2,800 मील (4,500 कि.मी) दूर है.

इन धमाकों के बाद पेरोबेवेटन और दानन समेत इस द्वीप के लगभग 9 वर्ग मील का हिस्सा समुद्र तल से लगभग 820 फीट नीचे गहराई में कैल्डेरा में डूब गए. 1883 हुए क्राकाटोआ विस्फोट में 200 मेगाटन टीएनटी जितना बल था वहीं 1945 में जापानी शहर हिरोशिमा को नष्ट करने वाले बम में 20 किलोटन का बल जो क्राकाटोआ में हुए विस्फोट से लगभग 10000 गुना कम था. क्राकाटोआ में हुए विस्फोट की वजह से बेहद ही बड़ी मात्र में चट्टान, राख, धूल और मलबा निकला जो इतना ज्यादा था की इसकी वजह से दुनिया के एक बड़े हिस्से में आसमान का रंग काला हो गया. साथ ही कई जगहों पर आसमान में कई रंग दिखाई देने लगे थे.

विस्फोट ने ले ली हजारों की जान

क्राकाटोआ के भीषण विस्फोट में 36,000 से अधिक लोग मारे गए. जिनमे से कई की मौत विस्फोटों द्वारा बनी टेफ़्रा (ज्वालामुखीय चट्टान) और गर्म ज्वालामुखी गैसों की वजह से हो गई लेकिन दसियों हजार लोग इस ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से आई सुनामी में डूब गए. यह इतनी भीषण थी की इससे समुंद्र में 120 फुट ऊंची पानी की दीवार बन गई जिसकी चपेट में आने से जावा और सुमात्रा 165 गांव तबाह हो गए. सूनामी से उठने वाली लहरें कितनी भयंकर थी इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है इन लहरों ने एक समुद्री स्टीमर बेरौव (Berouw) को सुमात्रा के भीतर करीब एक मील की दूरी पर लाकर फेंक दिया.

कुछ सालों पहले भी इस ज्वालामुखी में एक बड़ा धमाका हुआ था जिसकी आवाज इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता जो कि इस ज्‍वालामुखी से करीब 150 किलोमीटर दूर है, वहां तक इसके धमाके की आवाज सुनी गई थी. साथ ही सैटेलाइट तस्‍वीरों से हवा में 15 किलोमीटर ऊपर तक ज्‍वालामुखी का धुआं रिकॉर्ड किया गया था.

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