दुनिया का सबसे पहला अंतरिक्ष यान Luna-2, 14 सितंबर को चांद की सतह से टकराकर हो गया था नष्ट

फर्स्ट मून लैंडिंग मिशन के तहत लूना-2 अंतरिक्ष यान को 12 सितंबर 1959 को लॉन्च किया गया था, जिसने 14 सितंबर 1959 को चांद की सतह को छुआ था. इसे लुनिक-2 भी कहा जाता है.
Luna-2 was first to reach moon, दुनिया का सबसे पहला अंतरिक्ष यान Luna-2, 14 सितंबर को चांद की सतह से टकराकर हो गया था नष्ट

चांद पर उतरने वाला दुनिया का सबसे पहला अंतरिक्ष यान था लूना-2, जिसने 14 सितंबर 1959 को चांद की सतह को छुआ था. इसे लुनिक-2 भी कहा जाता है. सोवियत संघ यानी रूस को ये कामयाबी बड़ी कोशिशों के बाद मिली थी. सोवियत संघ के लूना प्रोजेक्ट के तहत छोड़ा गया, ये दूसरा अंतरिक्ष यान था. लूना-2 को सफलतापूर्वक चांद पर पहुंचने वाली मानवनिर्मित पहली वस्तु माना जाता है.

फर्स्ट मून लैंडिंग मिशन के तहत लूना-2 अंतरिक्ष यान को 12 सितंबर 1959 को लॉन्च किया गया था. लंबे समय से चल रहे सोवियत संघ के इस मिशन को पूरी तरह गुप्त रखा गया था, दुनिया को इसकी भनक तक नहीं लगी थी कि सोवियत संघ इतनी बड़ी योजना पर काम कर रहा है.

14 सितंबर 1959 की रात को लुनिक-2, 12 हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चांद की सतह से टकराया था. इतनी तेज गति से टकराने के बाद लूना-2 पूरी तरह से नष्ट हो गया था. ये वो समय था जब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीतयुद्ध चल रहा था. एक-दूसरे को नीचा दिखने की होड़ के दौरान लूना-2 का नष्ट होना सोवियत संघ के लिए ये बड़ा झटका था, लेकिन चांद की सतह को छूने की कामयाबी काफी बड़ी थी.

नष्ट होने के बाद भी मिली कई अहम जानकारी

लूना-2 भले ही नष्ट हो गया था, लेकिन इस मिशन से वैज्ञानिकों को कई अहम जानकारियां मिली थीं. इससे पता चला कि चांद का कोई प्रभावी चुंबकीय क्षेत्र नहीं है और चांद पर कोई रेडिएशन बेल्ट भी नहीं मिला था.

Luna-2 was first to reach moon, दुनिया का सबसे पहला अंतरिक्ष यान Luna-2, 14 सितंबर को चांद की सतह से टकराकर हो गया था नष्ट

अब तक चंद्रमा के 100 से ज्यादा मिशन हो चुके हैं, जिसमें से 40 प्रतिशत असफल हुए हैं. चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिग के लिए कुल 38 बार कोशिश की गई है, जिसमें से 52 फीसदी प्रयास ही सफल रहे हैं. चंद्रमा पर दुनिया के 6 देशों या एजेंसियों ने अपने यान भेजे हैं, लेकिन कामयाबी सिर्फ 4 को मिल पाई है. ये 4 देश अमेरिका, रूस, भारत और चीन हैं.

अमेरिका के फेल हुए 17 मिशन

चंद्रमा तक पहले मिशन की प्लानिंग 17 अगस्त 1958 को अमेरिका ने बनाई थी, लेकिन ‘पायनियर 0′ का प्रक्षेपण असफल रहा. सफलता 6 मिशन के बाद मिली, जिसके बाद अमेरिका ने 20 जुलाई 1969 को अपोलो 11 मिशन के जरिए चांद पर यान उतारा था. अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन चांद पर उतरने वाले क्रमश: पहले और दूसरे अंतरिक्ष यात्री बने थे. अमेरिका ने चांद पर 31 मिशन भेजे, जिनमे से 17 फेल हुए.

चांद को छूने के लिए रूस ने 33 मिशन भेजे. इनमें से 26 फेल हुए. रूस जहां एक तरफ चांद के चारों ओर चक्कर लगाने वाले ऑर्बिटर, सतह पर उतरने वाले लैंडर और सतह से टकराने वाले इंपैक्टर की तैयारी कर रहा था. वहीं, एक कदम आगे बढ़ते हुए अमेरिका ने चांद पर इंसानों को पहुंचा दिया था.

चांद पर झंडा लगाने वाला चौथा देश बना भारत

14 नवंबर 2008 को भारत का चंद्रयान-1 चांद की सतह पर उतरा था, जिससे भारत चंद्रमा पर अपना झंडा लगाने वाला चौथा देश बना. इस साल भारत के चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अंतरिक्ष में स्थापित हो गया था, लेकिन रोवर की सॉफ़्ट लैंडिंग नहीं हो पाई थी. अब भारत चंद्रयान-3 मिशन पर काम कर रहा है. इसरो प्रमुख के. सिवन ने कहा था कि चंद्रयान-2 की तरह ही चंद्रयान-3 में लैंडर और रोवर होगा. इस मिशन की लागत 250 करोड़ रुपये होगी.

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