महात्मा गांधी के बचपन का वो किस्सा जब उन्होंने पहली बार कहा था ‘हे राम’

30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई जाती है. इसी दिन नाथूराम होडसे की पिस्टल से निकली गोलियों ने गांधी जी की जान ले ली थी और उनके मुंह से अंतिम शब्द निकले थे 'हे राम.'
Mahatma Gandhi Death Anniversary, महात्मा गांधी के बचपन का वो किस्सा जब उन्होंने पहली बार कहा था ‘हे राम’

जीवन भर सत्य, अहिंसा और निडरता की प्रेरणा देने वाले महात्मा गांधी बचपन में बहुत डरते थे. उस डर को काटने के लिए उन्होंने राम का नाम प्रयोग करना शुरू किया था, जो उनके अंतिम समय तक उनके साथ रहा. 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई जाती है. इसी दिन नाथूराम गोडसे की पिस्टल से निकली गोलियों ने गांधी जी की जान ले ली थी और उनके मुंह से अंतिम शब्द निकले थे ‘हे राम.’ वह कौन सी घटना थी जिसने गांधी का संबंध राम से स्थापित किया, आइए जानते हैं.

भूत का डर

अपनी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ में गांधी जी लिखते हैं कि मुझे बचपन में भूतों से बहुत डर लगता था. उस घटना के बारे में बताते हैं कि एक बार उन्हें दूसरे कमरे में जाना था लेकिन अंधेरा बहुत ज्यादा था. एक तो रात का अंधेरा और फिर भूत का डर. उनका पांव आगे नहीं बढ़ रहा था. उन्हें लग रहा था कि वह भूत कहीं छिपा बैठा उनका इंतजार कर रहा होगा और बाहर निकलते ही उन पर आकर कूद पड़ेगा.

उन्होंने तेजी से धड़कते दिल के साथ अपना एक पैर बाहर निकाला, इतने में बाहर खड़ी बूढ़ी दाई रंभा ने उन्हें देखा. हंसते हुए पूछा ‘क्या बात है बेटे?’ गांधी जी ने कहा ‘मुझे बहुत डर लग रहा है.’ गांधी जी ने बताया कि अंधेरे में मुझे भूतों से डर लगता है. इस पर दाई रंभा ने उनकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा ‘राम का नाम लो. कभी कोई भूत तुम्हारे पास आने की हिम्मत नहीं करेगा. कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा, राम तुम्हारी रक्षा करेंगे.’

इसके बाद गांधी जी ने राम का नाम कभी नहीं छोड़ा. उनका पसंदीदा भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ था. वे भारत में ‘रामराज्य’ की कल्पना करते थे जिसमें प्रेम और सद्भाव हो. अंत समय भी उनके मुंह से ‘हे राम’ निकला था.

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