ऑपरेशन ब्लू स्टारः आसान नहीं था फैसला, पढ़ें- क्यों और कैसे हुई थी सेना की आतंकियों से मुठभेड़

ऑपरेशन ब्लू स्टार का मुख्य मकसद हरमंदिर साहिब कॉम्प्लेक्स (स्वर्ण मंदिर) में हथियार जमा कर सिख आतंकवादियों के साथ बैठे जरनैल सिंह भिंडरावाले को बाहर निकालना था.
operation Blue star, ऑपरेशन ब्लू स्टारः आसान नहीं था फैसला, पढ़ें- क्यों और कैसे हुई थी सेना की आतंकियों से मुठभेड़

साल 1984… इन्ही दिनों की बात है, जब सिखों के सबसे पवित्र धर्म स्थलों में से एक स्वर्ण मंदिर के परिसर में भारतीय सेना ने दस्तक दी थी और देश के भीतर सबसे बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया था. इस सैन्य ऑपरेशन का नाम था ऑपरेशन ब्लू स्टार. यूं तो ऑपरेशन ब्लू स्टार को पंजाब में बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था को सुधारने के मकसद से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हल के रूप में देखा था. लेकिन इसका मुख्य मकसद हरमंदिर साहिब कॉम्प्लेक्स (स्वर्ण मंदिर) में हथियार जमा कर सिख आतंकवादियों के साथ बैठे जरनैल सिंह भिंडरावाले को बाहर निकालना था.

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1 से 8 जून तक ये ऑपरेशन चला. सेना के पास जानकारी थी, इसलिए उन्होंने 5 जून को स्वर्ण मंदिर के पास की बिल्डिंगों में पहले धावा बोला और वहां छिपे आतंकवादियों को अपने कब्जे में ले लिया. शुरुआत में मिली इस सफलता के बाद कमांडिंग ऑफिसर मेजर जनरल केएस बरार ने अपने सैनिकों को उत्तर दिशा से स्वर्ण मंदिर के भीतर घुसने का आदेश दिया. सेना भिंडरावाले और खालिस्तानी आतंकियों को बाहर निकाल कर फिर से अकाल तख्त पर कंट्रोल करना चाहती थी. लेकिन सब कुछ इतना आसान नहीं था.

सैनिकों के भीतर घुसते ही चारों तरफ से गोलीबारी शुरू

जैसे ही बरार का ऑर्डर मिलने के बाद सैनिक उत्तर दिशा से अंदर घुसे, वैसे ही चारों तरफ से उनपर फायरिंग शुरू हो गई. चंद मिनट और 20 से भी ज्यादा जवान शहीद हो गए. उनपर अत्याधुनिक हथियारों और ग्रेनेड से हमले हुए थे. इस घटना के बाद बरार के सामने स्थिति साफ हो चुकी थी कि उन्हें मिला इंटेलिजेंस इनपुट सही नहीं था. इसके बाद भी कई अटेम्प्ट सेना की ओर से किए गए, लेकिन अकाल तख्त तक पहुंचना नामुमकिन सा लग रहा था.

तमाम तरकीबों के फेल होने और भीतर मौजूद खालिस्तानी आतंकियों की तैयारी को देखकर साफ था कि वो आत्मसमर्पण के मूड में बिल्कुल भी नहीं हैं. वहीं सेना अपने कई जांबाज जवानों को खो चुकी थी. ऐसे में मेजर जनरल केएस बरार के एक कमांडिंग ऑफिसर ने उनसे टैंक बुलाने की मांग की. जैसी तैयारियां भीतर छिपे आतंकी करे बैठे थे, उसको देखकर बरार को भी लगा कि इसके अलावा कोई और हल फिलहाल नहीं है. रात भी छंटने लगी थी और सुबह से पहले अगर ऑपरेशन खत्म नहीं होता तो और भी जानों का नुकसान होता.

सेना ने टैंक से हमला किया, जवाब में आतंकियों ने दागे मोर्टार

बरार ने सरकार से टैंक इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी. इजाजत मिली. टैंक बुलाए गए और सुबह 5 बजकर 21 मिनट पर टैंक ने पहला गोला दागा. जवाब में अंदर से आतंकियों ने एंटी टैंक मोर्टार दागे. गोला बारूद की इस अदला-बदली में सैंकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके थे और मंदिर परिसर में लाशें बिखरी पड़ी थीं. उजाला हो गया. लेकिन सेना अकाल तख्त से अब भी दूर थी. तभी अचानक अकाल तख्त में धमाका हुआ. सबका ध्यान वहीं था, सेना को लगा कि इस धमाके की आड़ में भिंडरावाले को भगाने की तैयारी है.

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जरनैल सिंह भिंडरावाले

हालांकि इस धमाके से अकाल तख्त को जबर्दस्त नुकसान हुआ. धमाके के तुरंत बाद अचानक आतंकी गेट की तरफ भागने लगे, लेकिन सेना ने उन्हें मार गिराया. इस दौरान कई लोगों ने आत्मसमर्पण कर दिया. लेकिन भिंडरावाले के बारे में कोई खबर नहीं थी. आत्मसमर्पण करने वाले लोगों में से कुछ सेना को अकाल तख्त तक ले गए. जहां 40 लोगों की लाशें पड़ी हुई थीं. उन्हीं में से एक भिंडरावाले की भी थी. भिंडरावाले के साथ उसके गुरू का बेटे अमरीक सिंह और उसके मुख्य सहयोगी शाहबेग सिंह की लाश भी पड़ी थी.

ऑपरेशन ब्लू स्टार की कीमत पूरे देश ने चुकाई

6 जून की शाम तक सेना ने स्वर्ण मंदिर के अंदर छिपे सभी आतंकियों को मार गिराया. अकाल तख्त भी सेना के कंट्रोल में था, लेकिन पूरी तरह तबाह हो चुका था. नुकसान सेना को भी हुआ था. भारतीय सेना के इस ऑपरेशन में 4 ऑफिसर्स समेत 83 जवान शहीद हो गए थे. 334 जवानों को गंभीर चोटें आईं. वहीं 492 नागरिक भी इस दौरान मारे गए. मारे जाने वालों में बच्चे और औरतें भी शामिल थीं. हालांकि ये सरकारी आंकड़ा है, अन्य आंकड़ों में मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा बताई जाती है.

सिखों की आस्था के केंद्र को हुए नुकसान ने देश के इतिहास को बदलने वाली घटना को अंजाम दिया. हरमंदिर साहब पर सैन्य कार्रवाई को लेकर दुनियाभर में मौजूद सिख समुदाय के भीतर तनाव पैदा हो गया. इसी के चलते 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उन्हीं के दो सिख बॉडीगार्ड्स ने गोली मार कर हत्या कर दी, क्योंकि उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार को इजाजत दी थी.

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