आखिर कैसा रहा पायलट से पॉलिटिक्स तक का राजीव गांधी का सफर? पढ़ें पूरी STORY

राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की मुलाकात एल्बिना से हुई. दोनों के बीच प्यार हुआ और दोनों ने शादी कर ली. शादी के बाद एल्बिना को नया नाम सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) मिला.
Rajiv Gandhi Death Anniversary, आखिर कैसा रहा पायलट से पॉलिटिक्स तक का राजीव गांधी का सफर? पढ़ें पूरी STORY

प्रधानमंत्री के तौर पर भले ही राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) का कार्यकाल छोटा रहा हो, लेकिन देश की सूरत बदलने वाले किस्सों में उनका बड़ा नाम है. युवा नेता राजीव गांधी के नाम न जाने कितने ऐसे काम हैं जो उन्हें एक बड़ी शख्सियत बनाते हैं. आज यानी 21 मई को राजीव गांधी की पुण्यतिथि है. इस मौके पर हम लेकर आए हैं, राजीव गांधी की जिंदगी के कुछ ऐसे पहलू, जिन्हें आप जानना चाहते हैं.

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क्या सोनिया नहीं चाहती थीं राजीव बने पीएम?

पूरा परिवार राजनेताओं से भरा हुआ था, लेकिन राजीव को राजनीति पसंद नहीं थी. राजीव के अलावा भी एक शख्स था जिसे उनका राजनीति में आना पसंद नहीं था. शुरुआत में राजीव राजनीति से दूर भागते रहे. पेशे से पायलट राजीव ने पहले इंजीनियरिंग करने की कोशिश की. राजीव लंदन में पढ़ाई करने के बाद कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए, उसके बाद जब डिग्री नहीं मिली तो फिर वो इंपीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने पहुंचे, लेकिन इसमें भी उनका मन नहीं लगा. इसके बाद राजीव गांधी ने फ्लाइंग क्लब में पायलट की ट्रेनिंग शुरू की, जिसके बाद वो एयर इंडिया में पायलट बने.

इन सबके बीच राजीव गांधी की मुलाकात एल्बिना से हुई. दोनों के बीच प्यार हुआ और दोनों ने शादी कर ली. शादी के बाद एल्बिना को नया नाम सोनिया गांधी मिला. सोनिया ऐसी महिला थीं जो राजीव को बहुत अच्छे से जानती थीं. सोनिया गांधी को पता था कि राजीव शुरुआत से राजनीति में नहीं आना चाहते और उन्हें भी राजनीति पसंद नहीं थी.

Rajiv Gandhi Death Anniversary, आखिर कैसा रहा पायलट से पॉलिटिक्स तक का राजीव गांधी का सफर? पढ़ें पूरी STORY

संजय गांधी के निधन के बाद धीरे-धीरे राजीव गांधी की राजनीति में एंट्री तो हुई लेकिन सोनिया गांधी उन्हें राजनीति में आने देने के पक्ष में नहीं थीं. लेकिन परिस्थितियों की ख़िलाफत सोनिया नहीं कर सकीं. 31 अक्टूबर को दिल्ली में इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की हत्या कर दी गई थी. देश की ”आयरन लेडी” के नाम से मशहूर इंदिरा की हत्या के बाद सवाल उठा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा. इंदिरा की हत्या के वक्त राजीव दिल्ली में नहीं थे, उस वक्त वो पश्चिम बंगाल में रैली को संबोधित करने गए हुए थे. मां की हत्या के बाद राजीव गांधी विशेष विमान के ज़रिए दिल्ली लौटे. जब वो दिल्ली के एम्स अस्पताल जा रहे थे तो उनकी पत्नी सोनिया गांधी ने उनसे फिर कहा था कि वो राजनीति में न आएं.

नेतृत्व तलाश रही कांग्रेस को राजीव में अगला प्रधानमंत्री दिखा और 1984 को उन्हें इंदिरा गांधी का उत्ताधिकारी मान लिया गया. यही वो दिन था कि उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ भी दिलाई गई. हालांकि राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी ने उनसे राजनीति में न आने का आग्रह किया, लेकिन वक़्त को कुछ और ही मंज़ूर था. देश उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार कर चुका था. राजीव का जादू ऐसा था कि अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को शानदार बहुमत भी मिला, लेकिन उनके कार्यकाल के कुछ काम उनके साथ कुछ स्याह पन्ने भी छोड़ गए.

एक धमाके ने छीना देश से सबसे कम उम्र का पीएम

सबसे कम उम्र में देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने वाले राजीव गांधी अकेले नेता रहे हैं. 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेराम्बदूर में एक आत्मघाती बम धमाके ने देश से उसका नेता छीन लिया. कहा जाता है कि श्रीलंका में शांति सेना भेजने की वज़ह से तमिल विद्रोही उनसे नाराज़ थे. समय लोकसभा चुनाव प्रचार का था, उस वक्त राजीव अपनी गाड़ी की अगली सीट से निकले ही थे कि एक महिला उनके पास फूलों का हार लेकर पहुंची. राजीव के क़रीब जाकर उस महिला ने आत्मघाती बम (Rajiv Gandhi Assassination) से खुद को उड़ा दिया. धमाका इतना जबरदस्त था कि राजीव गांधी के आस-पास मौजूद लोगों के परखच्चे उड़ गए.

इससे पहले नाकाम हुआ था एक हमला

साल था 1987, यानि राजीव गांधी की हत्या से 4 साल पहले. राजीव उस वक्त श्रीलंका में थे और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा था कि तभी वहां एक एलटीई समर्थक नौसैनिक ने ऐसा कुछ किया जिससे सभी के होश उड़ गए. राजीव गार्ड ऑफ ऑनर के वक़्त जब जवानों की टुकड़ी के नज़दीक पहुंचे तो एक एलटीई समर्थक नौसैनिक ने उन पर बंदूक की बट से हमला किया. सुरक्षाकर्मियों ने मौके पर तुरंत हरकत में आते हुए राजीव गांधी को धक्का देकर उस हमले से बचा लिया. बाद में उस जवान का कोर्ट मार्शल कर दिया गया.

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