औरंगज़ेब: नायक या खलनायक: क्या है मथुरा और काशी के मंदिर तोड़ने के पीछे की असली हकीकत?

6 खंडों की औरंगजेब की इस किताब को लिखा है अफसर अहमद ने.

नई दिल्ली: औरंगजेब का किरदार दरअसल दशकों से भारतीय समाज में तीखी बहस का विषय बना हुआ है. औरंगजेब की नीतियों को लेकर गाहे-बगाहे सवाल उठते रहते हैं और उसके नायक या खलनायक होने की बहस बदस्तूर चलती रहती है. औरंगजेब को लेकर सवालों, आरोपों के अंधड़ के बीच यह साफ नहीं हो पाता कि हकीकत दरअसल है क्या.

6 खंडों की औरंगजेब की यह सीरीज वास्तव में उन आरोपों, सवालों की हकीकत जानने या ये कहें फैक्ट चैक करने की एक मजबूत कोशिश है. इसमें हर उस सवाल का जवाब है जो बीते कुछ सवालों में औरंगजेब को लेकर उठा है. बेशक, जवाब तलाशना आसान नहीं रहा क्योंकि बाद के इतिहासकारों में कुछ ही निष्पक्ष रह पाए. इसलिए पूरी सीरीज में अधिकतर औरंगजेब पर लिखे गए मूल संदर्भ ग्रंथों का सहारा लिया गया है. इसके लेखक हैं अफसर अहमद.

इतिहास में पहली बार

इससे पहले कभी भी औरंगजेब पर इतनी लंबी पड़ताल नहीं हुई. जदुनाथ सरकार ने औरंगजेब पर सर्वाधिक 5 खंड लिखे हैं. वह भी अंग्रेजी में लिखे गए हैं, हिंदी में अभी कोई भी प्रमाणिक पहल पहले नहीं हुई है.

पुरानी किताबों से अलग कैसे

दरअसल यह इतिहास का एकेडमिक लेखन नहीं है. इन 6 खंडों में औरंगेजब की पूरी जिंदगी फैली हुई है. साथ में वो हर सवाल पिरोया गया है जो बार-बार बहस का हिस्सा बन जाता है. ऐसा पूर्व में कभी नहीं हुआ. यह एक तरह से हिस्ट्री का फैक्ट चैक है- मसलन क्या दारा शिकोह का सिर काटा गया? इस पर उस दौर के प्रमुख इतिहासकारों ने जो लिखा उसको एक साथ रखा गया है ताकि इस तथ्य की प्रमाणिकता निकल कर आ सके. ऐसे सभी सवालों का जवाब तलाशा गया है.

संदर्भ

इसमें संदर्भ का आधार उन लेखकों के काम को बनाया गया है जो उसके दौर में थे या फिर आज से करीब अस्सी साल पहले तक जो लिखा गया। इसका कारण है तथ्यों की विश्वसनीयता बनी रहे.

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औरंगजेब नायक या खलनायक

 

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