बुद्ध मुस्कराए: पोखरण में पहला परीक्षण, जानें- भारत कैसे बना था दुनिया का छठा परमाणु पॉवर

18 मई रविवार को इस गर्व से भर देने वाली घटना के 46 साल पूरे हो चुके हैं. इस पहले परमाणु परीक्षण ने ही देश में बुद्ध दोबारा मुस्कराए यानी पोखरण में दूसरे परमाणु परीक्षण 'ऑपरेशन शक्ति' की नींव रख दी थी. आइए, पोखरण-1 के बारे में कुछ और खास बातें जानते हैं.
facts Indias first nuclear test in Pokhran, बुद्ध मुस्कराए: पोखरण में पहला परीक्षण, जानें- भारत कैसे बना था दुनिया का छठा परमाणु पॉवर

साल 1974 के बुद्ध पुर्णिमा पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक फोन कॉल के इंतजार में थीं. उनके फोन की घंटी बजी. उठाने पर संदेश मिला- “बुद्ध मुस्कराए”. पीएम इंदिरा गांधी उसके बाद बोलीं – “The Budda has finally smiled.”

इन दोनों ही संदेश का मतलब था कि भारत ने पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इसके साथ ही भारत दुनिया में पहला ऐसा देश बन गया था जिसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य न होते हुए भी परमाणु परीक्षण करने का साहस किया और सफल रहा. यह देखकर पूरी दुनिया चौंक गई थी. 1070 के दशक की शुरुआत में ही बांग्लादेश निर्माण के बाद इंदिरा गांधी ने दुनिया को भारत को लोहा मनवाया था. उसके ढाई साल बाद ही फिर से दुनिया उनका साहस देखकर दंग थी.

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18 मई रविवार को यानी इस गर्व से भर देने वाली घटना के 46 साल पूरे हो चुके हैं. इस पहले परमाणु परीक्षण ने ही आगे 11 मई, 1998 को देश में बुद्ध दोबारा मुस्कराए यानी पोखरण में दूसरे परमाणु परीक्षण ‘ऑपरेशन शक्ति’ की नींव रख दी थी. आइए, पोखरण-1 की इस ऐतिहासिक घटना के बारे में कुछ और खास बातें जानते हैं.

1400 किलो का था परमाणु बम

18 मई, 1974 बुद्ध पुर्णिमा की सुबह 8 बजकर 5 मिनट पर राजस्थान में जैसलमेर के पोखरण में परमाणु विस्फोट किया गया था. परमाणु बम का व्यास 1.25 मीटर और वजन 1400 किलो था. सेना इसको बालू में छिपाकर लाई थी. जानकारी के मुताबिक विस्फोट से 8 से 10 किलोमीटर के इलाके में धरती हिल गई थी.

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टीम के अलावा किसी को नहीं थी खबर

पूरे अभियान को सफल बनाने में नेतृत्व की भूमिका संभालने वाले भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के निदेशक वैज्ञानिक राजा रमन्ना ने अपनी आत्मकथा ‘इयर्स ऑफ पिलग्रिमिज’ में इसके बारे में लिखा. उन्होंने लिखा है कि इस पूरे ऑपरेशन के बारे में पीएम इंदिरा गांधी के अलावा, मुख्य सचिव पीएन हक्सर, पीएन धर, वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. नाग चौधरी और एटॉमिक एनर्जी कमीशन के चेयरमैन एच. एन. सेठना और खुद उनको ही जानकारी थी. कुछ लोगों का दावा है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री जगजीवन राम को भी ऑपरेशन सफल होने के बाद ही जानकारी मिली थी.

ऐसे पार की गई PTBT की बाधा

इस परीक्षण से पहले इसकी राह में कई रोड़े भी आए. पहले तो IAEC के चेयरमैन और देश के सबसे बड़े वैज्ञानिक विक्रम साराभाई का निधन हो गया. उनकी जगह होमी सेठना को लाया गया. एक बाधा और आ गई. भारत ने PTBT नाम के एक समझौते पर हस्ताक्षर कर रखा था जिसके मुताबिक कोई भी देश इस समझौते के तहत वातावरण में परमाणु परीक्षण नहीं कर सकता था. समझौते में वातावरण का मतलब आसमान, पानी के अंदर, समुद्र शामिल था. तब भारत ने इस परीक्षण को जमीन के अंदर करने का निर्णय लिया.

क्या थी दूसरे देशों की हालत

पड़ोसी देश पाकिस्तान टूटने की वजह से दुश्मनी की चरम हालत में था. चीन उस समय भी खुलकर पाकिस्तान के साथ ही था. अमेरिका सोवियत संघ के खिलाफ पाकिस्तान के एयरबेस का इस्तेमाल कर रहा था. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत अब भी गुटनिरपेक्ष देश बना हुआ था. अमेरिका इसलिए भी भारत से नाराज था कि भारत उसका समर्थन नहीं कर रहा.

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