जब सरदार पटेल ने सुभाष चंद्र बोस पर कर दिया था केस, पढ़ें नेताजी के तीन किस्से

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 123वीं जयंती है. पूरा देश उनके योगदान को याद कर रहा है. 23 जनवरी 1897 को कटक में जन्मे नेताजी का कद क्रांतिकारियों में सबसे बड़ा है. आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक किस्से.
Annecdotes from life jourey of Netaji Subhash chandra Bose, जब सरदार पटेल ने सुभाष चंद्र बोस पर कर दिया था केस, पढ़ें नेताजी के तीन किस्से

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 123वीं जयंती है. पूरा देश उनके योगदान को याद कर रहा है. 23 जनवरी 1897 को कटक में जन्मे नेताजी का कद क्रांतिकारियों में सबसे बड़ा है. अंग्रेजों से आजादी दिलाने के लिए उन्होंने देश और दुनिया की किसी सरहद की परवाह नहीं की. उनका जीवन जितना दिलचस्प था, उनकी मौत उतनी ही रहस्यमयी. आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक किस्से.

भाई-भाई की लड़ाई में केस

साल 1930 की बात है. बर्मा की मंडले जेल में लंबा समय बिताकर बोस स्वदेश लौटे और कांग्रेस के महासचिव बनाए गए. कांग्रेस वॉलंटियर कॉर्प्स नाम से एक स्वयंसेवक संगठन बनाया. इस संगठन के मुखिया खुद सुभाष चंद्र बोस थे. ये समय ऐसा था कि अंग्रेज हुकूमत उनकी हर एक गतिविधि पर नजर रख रही थी.

जब वे कलकत्ता के मेयर पद पर थे और सविनय अवज्ञा आंदोलन में फिर से गिरफ्तार हो गए. फ्रैक्चर होने के चलते इनकी तबीयत खराब हो गई जिसके बाद उन्हें ऑस्ट्रिया पहुंचा दिया गया. वहां उनकी मुलाकात सरदार वल्लभ भाई पटेल के बड़े बाई विट्ठल भाई पटेल से हुई. बोस ने उनकी इतनी सेवा की कि विट्ठल पटेल उनसे प्रभावित हो गए. उन्होंने अपनी जायदाद का एक हिस्सा देश के काम आने के लिए सुभाष के नाम कर दिया. इस बात से सरदार पटेल सुभाष चंद्र बोस से नाराज हो गए और उन पर केस कर दिया. सुभाष चंद्र बोस वह केस हार गए.

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भेष बदलने में उस्ताद

सुभाष चंद्र के रूप बदलकर अंग्रेजों से बचने के कई किस्से फिल्मों और सीरियलों में दिखाए गए हैं. 1941 में अंग्रेजों ने नेताजी को एक घर में नजरबंद करके रखा हुआ था. उन्हें कम समय में बड़े काम करने थे इसलिए हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे रह सके. महानिष्क्रमण यात्रा नाम से एक प्रोग्राम बनाया और भेष बदलकर अंग्रेजों की कैद से भाग निकले.

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रूप बदलकर कार से कलकत्ता से गोमो की यात्रा की. वहां से ट्रेन पकड़कर पेशावर गए. वहां से काबुल होते हुए जर्मनी पहुंचे और जर्मन तानाशाह अडॉल्फ हिटलर से मुलाकात की.

जेल का किस्सा

1925 में सुभाष चंद्र बोस को अंग्रेजों ने कैद करके बर्मा की मंडले जेल भेज दिया था. मंडले जेल कैदियों के लिए बहुत खतरनाक थी क्योंकि वहां बेहद जरूरी चीजों का अभाव था और वह बीमारियों का गढ़ होती थी. सुभाष चंद्र बोस को पता था कि उनकी हालत जानकर घर वालों को दुख पहुंचेगा इसलिए पत्रों में कभी सच्चाई नहीं लिखते थे.

उन्हें वहीं पर टीबी की बीमारी हो गई थी. आज की तरह तब टीबी को हल्के में नहीं लिया जाता था बल्कि ये जानलेवा बीमारी हुआ करती थी. सुभाष ने अपने घर वालों को लिखा कि यहां मस्त होटल का खाना मिलता है. मैनेजर को पपीता पसंद है इसलिए यहां सब्जी, फल, अचार, हर जगह पपीते का प्रयोग किया जाता है.

घर वालों के मन में किसी तरह की शंका न आए इसके लिए वे मजेदार किस्से लिखा करते थे.एक बार उन्होंने लिखा कि यहां पहले बिल्लियों की फौज रहती थी जिनको घात लगाकर पकड़ा गया और दूर ले जाकर छोड़ दिया गया. उनमें से तीन बिल्लियां बहुत शरारती थीं, वे वापस लौट आईं. उनमें से एक का नाम टॉम था जिसने कबूतर को मार डाला. टॉम कैट पर मुकदमा चलाकर कड़ी सजा सुनाई गई लेकिन वैष्णव भावना होने के कारण उसे क्षमादान दिया गया.

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