Air India को खरीदने के लिए Tata Group की दूसरी कोशिश, पढ़ें- क्या है इस डील की सबसे बड़ी वजह

आइए, हम जानने की कोशिश करते हैं कि टाटा समूह की ओर से शुरू की गई विमान सेवा कैसे भारत सरकार की कंपनी हो गई. किन वजहों से फिर से टाटा समूह के स्वामित्व में इसका जाना लगभग तय हो गया है.

‘Proud to be Indian’ और ‘Proud to be Global’ नारे वाले भारत सरकार की बड़ी फ्लैगशीप विमान सेवा एयर इंडिया (Air India) का मालिक जल्द ही बदल जाएगा. सरकार एयर इंडिया में अपनी पूरी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. इसके लिए 17 मार्च तक आवेदन मांगे गए हैं. जो निवेशक एयर इंडिया खरीदने में रुचि रखते हैं वे 17 मार्च तक अपनी बोली दाखिल कर सकते हैं. 31 मार्च तक इस सौदे के पूरे होने की उम्मीद है.

ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार पहली बार एयर इंडिया के विनिवेश की कोशिश कर रही है. पहले भी इसके लिए असफल प्रयास किए जा चुके हैं. पिछले साल जब सरकार ने एयर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां मंगवाई थीं, तब भी टाटा समूह की ओर से इसको खरीदने की बात उठी थी. तब समूह इसको खरीदने से पीछे हट गया था. एयर इंडिया में 24 फीसदी हिस्सेदारी पास रखने की सरकार की योजना का भी विरोध हुआ था. इस बार केंद्र सरकार की यह कोशिश परवान चढ़ते दिख रही है.

सौदे का ताजा हाल

टाटा समूह सिंगापुर एयरलाइंस की साझेदारी में एयर इंडिया का अधिग्रहण कर सकती है. ये दोनों कंपनियां बोली दाखिल करने के आखिरी चरण में हैं. उन्होंने इस सौदे के कारोबारी ढांचे पर काम करना शुरू कर दिया है. इसके तहत एयर एशिया इंडिया का विलय शामिल है, जिसमें इनकी 51 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस का भी विलय किया जायेगा, जो एयर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी वाली सब्सिडरी है. टाटा समूह और एयर इंडिया दोनों का कार्यवाहक केंद्र मुंबई है.

Tata groups second attempt to buy Air India, Air India को खरीदने के लिए Tata Group की दूसरी कोशिश, पढ़ें- क्या है इस डील की सबसे बड़ी वजह

टाटा समूह के इस बड़े निवेश की खबर सामने आने के बाद एयर इंडिया के इतिहास को लेकर चर्चा तेज हो गई है. आइए, हम जानने की कोशिश करते हैं कि टाटा समूह की ओर से शुरू की गई विमान सेवा कैसे भारत सरकार की कंपनी हो गई. इसके साथ ही किन वजहों से यह फिर से टाटा समूह के स्वामित्व में इसका जाना लगभग तय हो गया है.

टाटा समूह से जुड़ा इतिहास

भारत सरकार की चलाई हुई दो विमान सेवाओं में दूसरी इंडियन एयरलाइंस का पहले ही एयर इंडिया में विलय हो चुका है. टाटा समूह के संस्थापक जेआरडी टाटा ने 15 अक्टूबर, 1932 को टाटा एयर सर्विसेज नाम से एयरलाइंस की शुरुआत की थी. एयरलाइंस की स्थापना के बाद जेआरडी टाटा ने कराची से बंबई तक हवाई जहाज को खुद उड़ाया गया था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस पब्लिक लिमिटेड कंपनी बन गई. तब से इसे एयर इंडिया के नाम से जाना जाता है. साल 1947 में आजादी के तुरंत बाद भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 फीसदी की भागेदारी कर ली थी. साल 1953 में भारत सरकार ने टाटा संस से टाटा एयरलाइंस की अधिकतम हिस्सेदारी खरीद कर इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया था.

जेआरडी टाटा का एयर इंडिया से लगाव

भारत में उद्योग का दूसरा नाम बन चुके जेआरडी टाटा साल 1978 तक इस एयरलाइंस से जुड़े रहे थे. विमान उड़ाने के शौकीन जेआरडी टाटा ने 15 साल की उम्र में पहली बार 1919 में हवाई जहाज उड़ाया था. इसके बाद उन्होंने पायलट का लाइसेंस लिया था. टाटा एयरलाइंस की पहली उड़ान के भी वह खुद पायलट थे. एयर इंडिया के 30वें स्थापना दिवस 15 अक्टूबर 1962 और 50 वें स्थापना दिवस 15 अक्टूबर 1982 को जेआरडी टाटा ने खुद कराची से मुंबई की उड़ान संभालकर उन यादों को सेलिब्रेट किया था.

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एयर इंडिया की वित्तीय हालत

मौजूदा दौर में एयर इंडिया की वित्तीय हालत बेहद खस्ता है. बीते एक दशक में कंपनी को 69,575.64 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. नागरिक उड्डयन मंत्री (Civil aviation minister) हरदीप सिंह पुरी ने दिसंबर, 2019 में संसद में यह जानकारी दी थी. साल 2017-18 में एयर इंडिया को 5438.18 करोड़ रुपये और 2018-19 में 8556.35 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. इतना ही नहीं एयर इंडिया पर 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज भी है. एयर इंडिया के ही एक अधिकारी ने कहा था कि अगर जून 2020 तक कोई निवेशक एयर इंडिया को न खरीदे तो इसका हाल जेट एयरवेज जैसा हो सकता है.

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